मोटे लंड को मुह से सक करने को बेताब

मेरे परिवार में चार सदस्य हैं मेरा बड़ा लड़का बैंक में जॉब करता है और मेरी पत्नी घर का काम संभालती है मुझे भी रिटायर हुए अभी कुछ समय ही हुआ है। एक दिन मैं घर पर ही बैठा हुआ था उस दिन मेरे एक रिश्तेदार मेरे पास आए और वह मुझसे पूछने लगे आप क्या कर रहे हैं मैंने उन्हें कहा बस घर पर ही समय बिताता हूं और शाम के वक्त पार्क में घूमने के लिए चला जाता हूं। वह मुझे कहने लगे आगे आपने क्या सोचा है मैंने उन्हें कहा मैंने तो अभी ऐसा कुछ नहीं सोचा है लेकिन मैं सोच रहा था कि यदि भाग्यश्री की शादी हो जाती तो फिलहाल मेरे कंधों से भाग्यश्री की जिम्मेदारी कम हो जाती परंतु अभी तक ऐसा कोई रिश्ता हमें मिला नहीं है जिससे कि हम लोग भाग्यश्री की शादी की बात को आगे बढ़ा पाए।

वह मुझे कहने लगे अरे भाई साहब आप चिंता क्यों करते हैं हम लोग किस दिन आपके काम आएंगे मैंने मैंने कहा लेकिन आजकल अच्छे लड़के मिल पाना भी तो मुश्किल है वह कहने लगे कोई मुश्किल वाली बात नहीं है मेरी नजर में हमारे पड़ोस में रहने वाला एक परिवार है वह लोग बड़े ही सज्जन हैं मैं उन्हें काफी वर्षो से जानता हूं यदि आप कहें तो मैं भाग्यश्री के रिश्ते की बात उन लोगों से करुं। मैंने उन्हें कहा यदि आप कह रहे हैं तो वह लोग अच्छे ही होंगे परंतु एक बार मैं भी उनसे मिलना चाहता हूं वह कहने लगे मैं फिलहाल उनसे भाग्यश्री के रिश्ते की बात करता हूं उसके बाद मैं आपको फोन कर के सूचित करता हूं कि आपको कब आना है मैंने उन्हें कहा ठीक है आप मुझे बता दीजिएगा।

जब उन्होंने मुझे यह बात कही तो मैं खुश था क्योंकि मैं जल्द से जल्द भाग्यश्री की शादी करवाना चाहता था मैं चाहता था कि भाग्यश्री की शादी अच्छे घर में हो सके भाग्यश्री को मैंने बचपन से बहुत नाज और प्यार से पाला है उसे मैंने कभी भी कोई कमी नहीं होने दी उसने जब भी मुझसे कोई चीज मांगी तो मैंने हमेशा ही उसे वह चीज लाकर दी मेरी पत्नी हमेशा मुझे कहती कि तुम भाग्यश्री को कुछ ज्यादा ही प्यार करते हो। भाग्यश्री मेरी लाडली बेटी है इसलिए मैं उससे बहुत ज्यादा प्यार करता हूं, कुछ ही दिनों बाद मुझे मेरे उन्ही रिश्तेदार का फोन आया जिन्होंने भाग्यश्री के रिश्ते की बात की थी वह कहने लगे भाई साहब आपको मैं उन लोगों से मिलवा देता हूं।

मैं उन लोगों से मिला तो मुझे उन लोगों से मिलकर अच्छा लगा मैंने उन्हें अपने बारे में सब कुछ बता दिया था और मैंने यह भी बता दिया था कि भाग्यश्री ने अपनी पढ़ाई के बाद अपनी जॉब भी की थी लेकिन अब वह कुछ समय से घर पर ही है मुझे तो वह रिश्ता बहुत अच्छा लगा लड़का भी इंजीनियर है मैं बहुत खुश था क्योंकि मुझे उम्मीद नहीं थी कि इतना अच्छा परिवार हमारी लड़की को अपना लेगा।

मैं जब लड़के से मिला तो लड़के से मिलकर भी मैं खुश था लड़के का नाम संतोष है सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था और भाग्यश्री की सगाई भी संतोष के साथ हो गई हम लोग बहुत खुश थे और शादियों की तैयारी हम लोग करने लगे जब हम लोग शादी की तैयारी करने लगे तो मैंने शादी की तैयारियों में कोई भी कमी नहीं रखी क्योंकि मैं नहीं चाहता था की शादी में कोई भी कमी रह जाए इसलिए मैंने बड़े अच्छे ढंग से शादी का अरेंजमेंट करवाया मुझसे जितना बन सकता था उतना मैंने किया।

संतोष और भाग्यश्री की शादी हो चुकी थी भाग्यश्री बहुत ही खुश थी भाग्यश्री से जब भी मैं फोन पर बात करता या वह घर आती तो हमेशा उसके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान होती। मैं इस बात से बहुत खुश था कि भाग्यश्री का रिश्ता हमने एक अच्छे घर में करवाया और वह लोग भाग्यश्री को अपनी बेटी की तरह समझते हैं लेकिन कुछ समय बाद ना जाने किसकी नजर संतोष और भाग्यश्री के रिश्ते को लगी उन दोनों के बीच बहुत झगड़े होने लगे जिससे परेशान होकर भाग्यश्री ने एक दिन मुझे फोन किया और कहा पापा संतोष मुझे बहुत ज्यादा परेशान करते हैं मैंने उसे समझाया और कहा बेटा झगड़े तो आपस में होते रहते हैं लेकिन तुम दोनों को एक दूसरे से बात करनी चाहिए भाग्यश्री ने मुझे कहा मैंने काफी बात की लेकिन संतोष मेरी बात को समझने को तैयार ही नहीं है ना जाने वह किस बात का गुस्सा मुझ पर निकालते हैं।

मैं अंदर ही अंदर से बहुत दुखी था लेकिन फिर भी अपनी बेटी को मैं हिम्मत दे रहा था भाग्यश्री अब हमेशा मुझे और अपनी मां को फोन किया करती जिससे कि हम दोनों ही टेंशन में हो जाते लेकिन फिर भी हम लोग भाग्यश्री को हिम्मत देते हुए कहते कि नहीं बेटा तुम अपना ध्यान रखो और ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।

एक दिन भाग्यश्री अपना सामान लेकर घर पर आ गई जब वह अपना सामान लेकर घर आई तो मैं समझ गया कि अब उसने संतोष से अपना रिश्ता तोड़ लिया है मैंने उसे कुछ भी नहीं पूछा और मैं संतोष से मिलने उसके घर पर चला गया उसके परिवार के सब लोग घर पर ही बैठे हुए थे मैंने उनसे कहा आप लोगों ने भाग्यश्री के साथ बहुत गलत किया है वह कहने लगे इसमें भाग्यश्री की गलती है। उन्होंने सारा दोष भाग्यश्री पर लगाया परन्तु मैंने यह बात कबूल ही नहीं कि मैंने कभी भी भाग्यश्री को ऐसे संस्कार नहीं दिए जिससे कि वह किसी के साथ ऊंची आवाज में बात करें या किसी से कोई गलत बात करे इसमें संतोष के परिवार की ही पूरी गलती थी इसलिए मैंने उनसे कोई बात नहीं किया और चुपचाप घर चला आया इस बात को एक महीना हो चुका था एक महीने तक भाग्यश्री घर पर ही थी।

जब भी मैं भाग्यश्री के चेहरे को देखता तो मुझे बड़ा बुरा लगता लेकिन मेरे पास अब और कोई रास्ता नहीं था मैं चुपचाप सब कुछ बर्दाश्त करता जा रहा था और मेरे रिश्तेदार भी मुझे ताने मारने लगे थे वह लोग भाग्यश्री को बहुत बुरा भला कहते जबकि भाग्यश्री की कोई भी गलती नहीं थी लेकिन सारा दोष सब भाग्यश्री के सर पर ही मारते।

मैं इस बात से बहुत ज्यादा दुखी हो गया था फिर भी मैंने भाग्यश्री को हिम्मत दी और उसे कहा जरूर तुम्हारे साथ कुछ अच्छा होगा समय बीतता चला गया लेकिन संतोष भाग्यश्री को लेने कभी घर पर ही नहीं आया और ना ही उसने कभी हमें फोन किया, भाग्यश्री अपने सदमे से उभरने लगी थी और वह स्कूल में पढ़ाने लगी जिस स्कूल में वह पढ़ाती थी उसी स्कूल में एक लड़का है जिसका नाम सुधीर है सुधीर से जब भाग्यश्री की मुलाकात हुई तो सुधीर और भाग्यश्री के बीच में शायद बहुत अच्छी दोस्ती हो गई जिससे कि भाग्यश्री सुधीर के साथ शादी करना चाहती थी।

भाग्यश्री ने मुझे जब इस बारे में बताया तो मैंने भाग्यश्री से कहा देखो भाग्यश्री तुम सोच समझ कर कोई फैसला लेना मैंने आज तक तुम्हें कभी भी किसी चीज के लिए मना नहीं किया है लेकिन तुम्हें हर चीज सोच समझकर करनी चाहिए। भाग्यश्री ने कहा पापा आप एक बार सुधीर से मिल लीजिए मैं जब सुधीर से मिला तो सुधीर बड़ा ही सिंपल और सामान्य सा लड़का है। मैंने सुधीर से कहा क्या तुम्हें भाग्यश्री के बारे में सब कुछ पता है वह कहने लगा जी सर मुझे भाग्यश्री ने सब कुछ बता दिया था मुझे उसके पुराने रिश्ते से कोई भी आपत्ति नहीं है मैं भाग्यश्री को अपनाना चाहता हूं और मैं उससे शादी करना चाहता हूं।

मुझे भी लगा कि सुधीर भाग्यश्री को खुश रखेगा और इसी के चलते मैंने सुधीर से कहा तुम अपने माता पिता से मुझे मिलवाना। उसने कुछ ही दिनों बाद मुझे अपने माता पिता से मिलवाया वह लोग बड़े ही सामान्य और सिंपल लोग हैं सब कुछ ठीक हो चुका था सुधीर और भाग्यश्री ने शादी भी कर ली मैं बहुत खुश था क्योंकि भाग्यश्री ने दोबारा से अपनी जिंदगी की शुरुआत कर ली थी। वह सुधीर के साथ बहुत खुश थी और मैं भी बहुत खुश था।

जब भी मै सुधीर की भाभी से मिलता तो उसकी प्यासी नजरें जैसे मुझे देख रही होती थी। उसकी भाभी का नाम राधिका है राधिका की प्यासी नजरें मुझे घूर रही होती थी मैं इस बुढ़ापे में भी अपने आपको उसे देखकर काबू नहीं कर पाता, मैं उसकी भाभी से फोन पर बात करने लगा था। राधिका से मैं जब भी फोन पर बात करता तो हमेशा ही उससे अश्लील बातें किया करती। वह मुझे अपने पास आने के लिए कहती लेकिन मुझे इस बात का डर था कहीं यह बात सुधीर को मालूम चली गई तो वह मेरे बारे में क्या सोचेगा इसलिए मैं कभी भी राधिका से मिलने नहीं गया परंतु एक दिन ऐसा संयोग बना कि मुझे भाग्यश्री से मिलने के लिए जाना पड़ा। मैं भाग्यश्री से मिलने के लिए चला गया, उस दिन मुझे वहीं रुकना पड़ा।

जब मै कमरे में लेटा हुआ था तो राधिका मेरे पास आई और कहने लगी आप तो आराम कर रहे हैं। वह मेरे बगल में आकर बैठ गई वह अपनी बडी सी गांड को मुझसे टकराने लगी और कहने लगी मै आपका कब से इंतजार कर रही थी। राधिका ने मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाना शुरू किया तो मैं भी उत्तेजीत हो गया, मैं भी अपने आपको रोक ना सका उसने जब मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग किया तो मेरे लंड और भी ज्यादा कडक हो गया।

उसने कमरे का दरवाजा बंद किया और मेरे सामने नंगी हो गई उसकी चिकनी चूत देखकर मै अपने आपको ना रोक सका। मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया काफी समय बाद ऐसा हुआ था जब मै बड़े अच्छे से चूत मार पा रहा था क्योंकि मैंने काफी समय से सेक्स नहीं किया था। मैंने जब उसकी गांड मारी तो मुझे बहुत मजा आ रहा था वह अपनी चूतडो को मुझसे मिलाती जाती और कहती मुझे तो बड़ा मजा आ रहा है। यह कहते हुए मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देता लेकिन मैं ज्यादा देर तक उसकी गांड की गर्मी को बर्दाश्त ना कर सका और मेरा वीर्य पतन हो गया लेकिन मुझे बड़ा अच्छा लगा और उसके बाद तो जैसे उसका जादू मेरे सर पर चढकर बोलने लगा था।

मुझे भी राधिका से मिलने मै खुश होत, भाग्यश्री भी सुधीर के साथ बहुत खुश थी, सुधीर उसका बहुत ध्यान रखता है। वह दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, मैं जब भी उन दोनों के चेहरे को देखता हूं तो मुझे सुकून मिलता है कि कम से कम भाग्यश्री की जिंदगी पहले से बेहतर हो चुकी है।

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