शादीशुदा रेखा की चुदाई

मेरा नाम राहुल है, मैं पुणे का रहने वाला हूँ। मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी मैं काम करता हू। जो पुणे के हिन्जेवादी आईटी पार्क एरेखा में है। रोज की तरह मैं अपनी बाईक से शाम को सात बजे घर जाने के लिए निकला। रास्ते में काफी भीड़ होने के कारण मैं बाईक काफी धीरे चला रहा था। बस स्टॉप के पास एक लड़की दिखी जिसकी उम्र 28-29 साल होगी। उसका कद 5 फुट 2 इंच, बदन बहुत आकर्षक था। उसने मुझे बहुत प्रभावित किया। देख कर लगता था कि उसकी नई नई शादी हुई थी। वो साड़ी में क्या खूब लग रही थी, बिल्कुल परफेक्ट फिगर।
मैंने उनको देखकर लिफ्ट देने का इशारा किया, वह धीरे से मुस्कुरा दी। फिर मैंने भीड़ से थोड़ी दूर अपनी बाईक रोक दी।
वो मेरे पास आकर बोली- मेरी ऑफिस-बस छूट गई है। कृपया मुझे थोड़ी दूर तक छोड़ सकते है क्या ?
मैंने हाँ कर दी।
वो मेरी बाईक पर बड़ी मुश्किल से बैठ पाई क्योंकि मेरे पास यामाहा एंटआयिसर बाईक है जिसकी सीट काफी छोटी होती है। आगे काफी लम्बा रास्ता जाम था जो कि उस क्षेत्र में आम बात है। मैंने उससे थोड़ा लम्बा रास्ता
लेने को कहा तो वो तैयार हो गई।
रास्ते में मैंने उससे बातचीत करना शुरू की। बातों ही बातों में उसने बताया कि उसका नाम रेखा शर्मा है जो मैं पहले ही उसके कंपनी आईडी कार्ड में देख चुका था।
और उसने बताया कि उसके पति भारत में नहीं हैं वो अमेरिका गए हुए हैं, उसको गए हुए दो महीने हो गए हैं और शायद अगले छ: महीने तक नहीं आ सकते हैं। उसने बताया कि वो यहाँ अपनी दोस्तों के साथ फ्लैट में
रहती है। अचानक बारिश शरू हो गई और हम सर छुपाने के लिए एक चाय की टापरी में चले गए, वहाँ हमारे साथ काफी लोग और भी थे। मैंने दो कॉफी का आर्डर दे दिया। बारिश के कारण सर्दी ज्यादा ही लग रही थी।
फिर उसने मेरे बारे में पूछना चालू किया। मैंने उसे बताया कि मैं इंदौर का रहने वाला हूँ और यहाँ मैं एक रूम-किचन का फ्लैट लेकर रहता हूँ।
फिर बारिश बंद हो गई और मैंने उसको घर छोड़ दिया। मैंने उसे कहा कि मैं भी इसी समय ऑफिस से निकलता हूँ अगर आपकी फिर कभी बस मिस हो जाए तो मुझे कॉल कर दीजिएगा, अगर मैं ऑफिस में रहा तो
आपको ले लूँगा। उसने मेरा नंबर ले लिया और फिर मैं अपने घर आ गया।
उस रात उसको याद कर कर के 3-4 बार मुठ मारनी पड़ी। मैंने उसके वक्ष और गांड के बारे में सोच सोच कर मुठ मारी।
अगले एक सप्ताह मैं उसके ऑफिस के सामने से काफी रुक-रुक कर निकलता था पर शायद मेरी किस्मत काफी खराब थी। मैंने उनका नाम ऑरकुट और फेसबुक में ढूंढा पर रेखा शर्मा नाम से 40 लड़कियाँ मिली। उसमें से
एक मुझे काफी सुन्दर लड़की की प्रोफाइल में उसका फोटो दिखा, शायद शादी के पहले का फोटो था। मैंने उसे मित्रता-प्रार्थना भेजी और साथ में लिख दिया उस दिन लिफ्ट देने की बात।
उसी शाम को मैंने उसे अपनी फ्रेंड लिस्ट में देखा। मैं काफी सुकून महसूस कर रहा था शायद मैंने अपनी मंजिल की ओर पहला कदम बढ़ा लिया था।
अगले दिन शाम को वो मुझे ऑनलाइन फ़्रेंड्स की लिस्ट में दिखी। फिर मैंने उससे काफी अच्छी फ्रेंडशिप कर ली। अपने ऑफिस मेल आईडी से भी मैं उसे मेल करने लगा।
एक दिन फिर उसने मुझे कॉल किया और कहा कि आज उसे घर जल्दी जाना है इसलिए क्या मैं उसे छोड़ सकता हूँ? मैं उस दिन ऑफिस नहीं आया था पर मैंने कहा कि हाँ जरूर ! आपके ऑफिस के पास आकर आपको
कॉल कर दूंगा और उनका नंबर सेव कर लिया।
फिर मैं उसके ऑफिस से उसे लिया। आज उसने जींस-टॉप पहना हुआ था। उसने बताया कि आज उन्हें कुछ शॉपिंग करने ऍफ़सी रोड जाना है।
मैंने उसको कहा- मुझे भी कुछ काम से उसी तरफ जाना है।
उसको ऍफ़सी रोड छोड़ने के बाद मैं वहाँ अपने एक दोस्त के घर चला गया। एक घंटे के बाद मैंने उनको कॉल किया और कहा- मैं अभी भी ऍफ़ सी रोड पर ही हूँ, अगर घर चलना हो तो बता दो।
उसने मुझे 15 मिनट बाद सी सी डी पर मिलने को कहा। हमने वह काफी पी और अपने घर की तरफ चल पड़े। सामान ज्यादा होने के कारण उसे पैर क्रॉस करके बैठना पड़ा। रास्ते भर मुझे काफी मज़ा आया। जिस रास्ते
से हम आ रहे थे वहाँ से मेरा घर नज़दीक पड़ता था। मैंने उनको अपने घर आने को कहा, काफी जोर देने पर वह तैयार हो गई।
हम मेरे फ्लैट में आये तो मैंने उसको कहा- उस दिन मुझे पता नहीं था कि तुम शादीशुदा हो, इसलिए मैंने तुम्हें लिफ्ट दी थी।
वह मुस्कुरा दी और कहा- तो सिर्फ आप कुँवारी लड़कियों को लिफ्ट देते हैं?
मैंने कहा- नहीं ! मैं हर खूबसूरत लड़की को लिफ्ट देता हूँ !
मैंने उससे दो मिनट का समय माँगा और पिज्जा-हट कॉल करके दो वेज पिज्जा का आर्डर दे दिया। वह कुछ समझ पाती उससे पहले ही मैंने कॉल कट कर दिया। यह मेरा तरीका था उनको आधे घंटे रोकने का। समय
बिताने के लिए मैंने अपना पीसी चालू किया और उसे अपने और मेरे घर वालो के फोटो दिखाने लगा। उन्हें भी खूब मज़ा आ रहा था।
फिर मैंने उनको अपने मॉडलिंग वाले फोटो भी दिखाए। मेरे बिना शर्ट वाले चित्रों की उसने खूब तारीफ की। उसने कहा कि मैं बहुत हैण्डसम दिखता हूँ।
उसकी आँखों में अजीब सा इशारा था। उसने मुझ से पूछा कि मेरी कोई गर्ल-फ़्रेन्ड है क्या? मैंने कहा- नहीं !
उसने पूछा- कोई मिली क्यों नहीं अभी तक?
मैंने कहा- जो मिली, उसकी शादी हो चुकी है।
वो मेरा इशारा समझ गई और कहा- तुम किसकी बात कर रहे हो?
तो मैंने कहा- तुम मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड बन सकती हो ?
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।
उसने हाथ छुड़ा कर मुझे प्यार से डाँट दिया और शरमा गई। वह शरमाई तो मैंने देर नहीं की और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपनी बाहों में भर लिया।
मेरे अचानक इस तरीके से वो थोड़ा घबरा सा गई।
फिर मैंने सॉरी बोल कर कहा- मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ, अपने आप को रोक नहीं पाया।
मेरी आँखे ग्लानि से झुक गई। फिर उसने मेरा हाथ पकड़कर कहा- मुझे भी तुम अच्छे लगते हो ! पर मैं शादीशुदा हूँ हमारी इस दोस्ती को कोई भी अच्छा नहीं समझेगा।
मैंने कहा- यह बात किसी को पता नहीं चलेगी।
मन ही मन मैं भी उसकी बहुत इज्जत करने लगा था क्योंकि उसने मुझ पर भरोसा रखा और मेरे घर आई। मैंने कहा- मैं तो आपका साथ चाहता हूँ बस ……. पिज्जा तो एक बहाना है आपको यहाँ रोकने का ! मैंने कोई
पिज्जा आर्डर नहीं किया था ….. मैंने सच सच बोल दिया।
उन्होंने कहा- एक आप हैं जो मेरा साथ चाहते हैं और मेरे पति को मुझसे कोई मतलब ही नहीं है, शादी के दो सप्ताह बाद ही वो अमेरिका वापस चले गए यह बोलकर कि मेरा आश्रित वीजा बनवा लेंगे और मुझे वह बुला
लेंगे … दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |
वो मायूस हो गई…
फिर उसकी आँखों में आंसू आ गए।
मैंने उनके गाल पर चूम कर उन आसुओं को अपने होंठों से पी लिया और अपनी बाहों में भर लिया।
फिर क्या था, मुझे आज्ञा मिल गई और मैंने उसके चेहरे से उसके हाथ हटा कर उसके गाल पर चूम लिया। तो उसने अपनी आंखें बंद कर ली। मैं उसके गालों से उसके होंठों पर चूमने लगा और वो भी धीरे-धीरे मेरा साथ
देने लगी।
मैं उसके ऊपर लेट गया उसकी टॉप में से उसके स्तन हाथ में लेकर मसलने लग गया। वो सिसकारेखाँ भरने लगी, उसने मुझे अपनी बाहों में कस कर पकड़ लिया।
बस फिर क्या था, मैं चूमता गया उसकी आँखों, माथे और फिर नीचे की ओर गले में, सब जगह ! बस उसने आँखें बंद कर ली। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |
फिर मैंने अपने होंटों को उसके पेट पर रख दिया और उनकी नाभि को चाटने लगा। धीरे धीर मैंने उसका टॉप ऊपर कर दिया और उतार दिया। वो काली ब्रा और जींस में क्या लग रही थी ! ब्रा खोलते ही उसके दोनों स्तन
बाहर आ गए। दूध सा सफ़ेद गोरा स्तन और बीच में गुलाबी चुचूक देखते ही मेरी जीभ लपलपाने लगी और फिर मैं दोनों हाथों से उसकी चूची को मसलने लगा ….
वो मदहोश होने लगी, उसकी आँखें बंद हो गई ..मैं उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा।
उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रहीं थीं। मैंने अपना हाथ जब उसकी जींस में डाला तो जाना कि उसकी पैन्टी आगे से पूरी गीली थी। फिर मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। मैंने उसकी जींस और पैन्टी उतार दी और उसकी
चूत चाटने लगा। उसकी चूत एकदम गुलाबी और बिना बालों की थी ।
उसकी चूत काफी टाईट थी। मैं अंगुली को धीरे धीरे अन्दर-बाहर करने लगा, इससे उसको मजा आने लगा क्योंकि वो कामुक सिसकारेखाँ लेने लगी थी।
फिर मैंने अपना लंड उसको पकड़ा दिया, वो मेरे लंड को धीरे धीरे सहलाने लगी। फिर मैंने उसको मेरा लंड को मुँह में लेने को कहा तो उसने साफ़ मना कर दिया। मेरी इच्छा अधूरी रह गई। पर मैं समझ सकता था कि
सबके सेक्स करने का तरीका अलग अलग होता है इसलिए मैंने ज्यादा जोर नहीं दिया। हाँ, मैंने उसकी चूत का हर हिस्सा अच्छे से चूसा था। चूत के दाने पर ही मैं 15 मिनट तक डटा रहा था।
इसके बाद मैंने रेखा को सीधा लिटा दिया और उसकी टांगों को ऊपर उठा कर अपना लंड उसकी चूत से सटा दिया, मैं अपने लंड को उनके दाने पर मलने लगा … जो ख़ुशी मुझे मिल रही थी उसको मैं बयान नहीं कर
सकता। फिर एक जोर से धक्का मार कर लंड को आधा अन्दर सरका दिया। वो इस धक्के को सहन नहीं कर पाई और चीखने लगी। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |
मैं समझ गया कि वो अभी तक अच्छे से नहीं चुदी है।
उसके बाद मैं उसको सहलाने लगा, उसके शरीर को चूमने लगा, इससे उसका दर्द कुछ कम हुआ और वो भी नीचे से कमर उचकाने लगी। उसका दर्द अब थोड़ा कम हो गया था। अब वो भी चुदाई में साथ देने लगी और
अपने चूतड़ों को उठा उठा कर धक्के लगाने लगी। मेरे भी धक्के तेज होने लगे थे। पूरे कमरे में बस सी… सी…. आह….. आह्…… की आवाजें सुनाई दे रही थी।
मैं भी ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था। अब मैने रेखा को अपने ऊपर लिया और उसकी चूत में अपने लंड को पेल दिया। अब वो मुझे चोद रही थी। मैं भी उनके चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे से धक्के
लगा रहा था।
करीब दस मिनट की चुदाई के बाद उनका शरीर अकड़ने लगा मुझे पता चल गया कि अब वो झड़ने वाली है।
मैं झटके से उसके ऊपर आ गया और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा। उसने मेरे सारे बदन को जकड़ लिया। मेरे शरीर पर उसके नाखूनों के खरोंचों के निशान पड़ चुके थे। ज़ोर से आवाज करती हुई वो झड़ गई।
अब मैंने और ज़ोर से धक्के लगाने शुरु कर दिये। करीब दस मिनट तक मैं उसको चोदता रहा अब मैं भी झड़ने के करीब आ रहा था। मैंने उसके दोनों स्तनों को ज़ोर से पकड़ लिया और धक्के लगाते हुए झड़ गया और
उसके ऊपर ही निढ़ाल पड़ गया। दोस्तों आप यह कहानी गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |
काफ़ी देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे फिर उसने बाथरूम में जाकर अपने आप को साफ़ किया। पता नहीं क्यों, वो मुझसे नज़र नहीं मिला रही थी।
मैं समझ गया और उसको बाहों में लेकर एक प्यारा सा किस किया और समझाया कि यह सब जरुरत है, आपने कुछ गलत काम नहीं किया है।
आखिर वो समझ ही गई ..
फिर हम लगभग हर सप्ताहांत पर चुदाई करते थे क्योंकि काम के दिनों पर उसे जल्दी फ्लैट पर जाना होता था।
फिर अचानक उसके पति ने उन्हें अमेरिका बुला लिया। अभी भी उसके ऑफिस से सामने मेरी बाईक धीमी हो ही जाती है।
आखिर मैं समझ गया कि अब शायद ही उनसे मुलाकात हो इसलिए तलाश कर रहा हूँ कि फिर कोई लिफ्ट मांगे उसी रास्ते पर…. अलविदा दोस्तो ..