हर कोई यह किसी को चोदता या चुदवाता- 2

हर कोई यह किसी को चोदता या चुदवाता- 1

उसकी चूत की भूख अब बढती ही जा रही थी . अब उससे सहन नही हो पा रहा था . वोह भड़क कर बोली , “उफ्फ्फ … देख क्या रहे हो … चालू करो …. लगाओ अपने लंड को निशाने पर और मारो धक्का .”संजय ने अपने लंड को उसकी चूत के निशाने पर ला थोड़ा सा धक्का दिया . आधा सुपाडा लंड का चूत मे जा कर फँस गया . दूसरा धक्का मारा तो उसके लंड का पूरा सुपाडा उसकी चूत मे जा कर धंस गया .

तीसरा धक्का मारा तो आधा लंडउसकी गुफा मे गायब हो गया . साथ ही पार्वती की चीख पूरे घर मे फ़ैल गई..ऊह मेरी माँ..मर गयी..निकालो….अह्ह्ह..आह्ह..बाप रे..इतना मोटा…निकालो..मैं मर जाऊंगी.. लेकिन संजय रुका नही..वो समझ गया था की ये चुदी हुयी चूत है ..थोड़ा चिल्लायेगी..क्युकी इतना मोटा लंड कभी चूत मे नही घुसा है ..उसके शहरी दोस्त का नए ज़माने का लंड ही घुसा होगा..उसने पार्वती को थोड़ा दबा के पकड़ा और फ़िर धीरे धीरे चोदने लगा..एक और धक्का मारा तो इस बार पार्वती की आनंद भरी चीख भी निकल गई . “हाय …. क्या लंड है तुम्हारा …. एक दम से तगड़ा और सख्त …. उफ़ ….. वाकई मे ही … जैसे कोई गरम गरम हथोडा जाकर मेरी चूत मे फँस गया हो .

“अब संजय ने अपने धक्के लगाने शुरू कर दिए . खड़े होने की वजह से पूरा लंड तो अन्दर नही जा रहा था लेकिन जितना भी जा रहा था वह पार्वती की चूत मे खलबली जरूर मचा रहा था . थोड़ी देर इस तरह दक्के मरने के बाद उसने अपने लंड को बाहर निकाल दिया और पार्वती को बाथरूम के फर्श पर लेटा कर अपने लंड को उसके मुह मे दाल दिया . पार्वती ने गप्प से उसको मुह मे ले लिया . थोड़ी देर चूसाने के बाद बाहर निकाल उसके लंड को हाथ से पकड़ सुरेश को कहा , “प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत मैं डाल दो . मुझे और मत तड़पाओ ज़ालिम . मुझे छोड़ो , मैं तुम्हारे लंड की दीवानी बन गयी हूँ . अपने लंड से मेरी चूत की प्यास बुझाओ .

“संजय ने उसकी जांघों को चौड़ा कर अपने लंड को उसकी चूत पर टिका दिया . फिर कस कर एक धक्का मारा .लंडउसकी रस से भरी हुयी उसकी चूत को ककड़ी की तरह फाड़ता हुआ चूत की अन्दर वाली दीवार से सीधा जा टकराया . पार्वती तो एक बार पुरी तरह कंप गई और पूरा बदन दहल उठा और मुह से चीख निकल गई..उईई माँ.मार डाला ..मेरी फट गयीई…आह्ह्ह..लेकिन संजय को अब कोई परवाह नही थी..उसने आव देखा ना ताव..और फटके लगाने शुरू कर दिए..उसने देखा उसके लंड पर कुछ खून के दाग लगे है..आज सच मे पार्वती की चूत फट गई..संजय ने . लंड को बाहर निकाल वापस धक्का मारा तो उसकी सिस्कारी निकालनी चालू हो गई . “उफ़ … अह्ह्ह …” संजय अपनी फुल्ल स्पीड से उसकी चूत के अन्दर बाहर अपने लंड को कर रहा था .पार्वती बड़बड़ा रही थी , “ओह्ह ह … क्या चोद रहे हो तुम …. वाकई मे मेरी चूत धन्य हो रही है … तुम्हारी चुदाई से …. उफ्फ्फ …. मेरी चूत को आज चोद -चोद कर ख़ूब रगड़ाई करो …. आह्ह्ह ह …. चोदो …. चोदो …. और चोदो …. चोदते ही जाओ .

मुझे मार डालो..मेरी चूत का पूरा पानी निकालो “हाँ रानी …. ख़ूब चोदुंगा तुझे आज …तुम्हारी जीं भर की कसर निकालूँगा आज मैं ….लो संभालो मेरे लन्ड को …..उफ्फ्फ ….तुम्हारी चूत …..क्या नरम और नाजुक है ….तुम्हारे संतरों का भी जवाब नही ….उफ़ क्या चुचिया है तुम्हारी ….आज तुझे ऐसा चोदुन्गा मैं की जिंदगी भर याद रखोगी .”धक्कों की स्पीड बढती ही जा रही थी . दोनों मदहोश हुए चुदाई मे लगे हुए थे पार्वती इस बीच दो बार झाड़ चुकी थी..और चूत ने इतना पानी फेंका था की लंड अन्दर अब आराम से फिसलता हुआ जा रहा था और बाहर भी आ रहा था..और बाथ रूम मे . घचा -घच ….फचा -फच .की आवाज़ आने लगी थी. दोनों आँखों से एक -दूसरे को देखते हुए एक दूसरे मे ज्यादा से ज्यादा सामने की कोशिश मे लगे हुए थे लंड अन्दर जता फिर बाहर आकर दुगने जोश से वापस अन्दर चला जाता .

चूत उसका थोड़ा ऊपर उठके स्वागत करती फिर गुप्प से उसको अपने अन्दर समां लेती .पार्वती की चीखें बढती गई , “राजा चोदो मुझे . और तेज .. और जोरसे … चोदो . ऊफ्फ्फ , ओह्ह्ह , आह्ह्ह , ऊईई माँ , मार गई मैं आज . फाड़ दो मेरी चूत को …. और जोर से चोदो मुझे …अपने लंड से फाड़ दो मेरी चूत को … मुझको अपना बनालो …. चोदो मुझको … जोर से चोदो … प्लीज़ …..इसको अन्दर तक चोदते रहो …. ऊईए … उफ़ … कितना मोटा लंड है , ऐसा लगता है की गधे का लंड हो ….मुझे ऐसा लग रहा है की मैं पहली बार चूदी हूँ ….तुम बहुत मजे का चोदते हो देखो मेरी चूत फटी क्या..और उसने ख़ुद अपना एक हाथ चूत और लंड पर लगाया..और देखा की खून निकला है..वो बोल उठी..राजा..आज सच मे मेरी सील टूटी है..साली नम्रता ने कल सील तुडवाई लेकिन..मेरी चुदी हुयी चूत की भी आज फ़िर से सील टूट गई..ई.ई.ई.आह्ह…

“संजय अपने लंड को थोड़ा निकाल उसकी जांघों को और फैला कर उसकी चूत की चुदाई चालू कर दी . अन्दर तक जा रहे लंड से अब उसकी चूत पिघलने को तैयार हो गई . पार्वती ने अपनी टांगो से उसकी टांगो को एकदम से जकड लिया और बड़ बड़ाई , येस्स … मेरे राजा … चोदो मुझे …. उफ्फ्फ …. और …. और ….. अह्ह्ह . … मेरा पानी …. हाय …..मेरा पानी निकलने वाला है ….राजा ….चोदो ..आह आह आह्हा आह ओफ्फ्फ ..मेरा पानी निकला …..हाँ …. निकला ….. हाँ .हाँ हाँ हाँ उफ़ इश श स्.स् स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्. …. निकल गया .”संजय के साथ एक -दम से चिपट कर अपनी चूत के पानी से उसके लंड को सींच ही रही थी ..इस बार उसका पानी बहुत तेजी से और बहुत सारा निकला..और उसके इस तरह चिपकाने से संजय के लंड ने भी अपना फव्वारा छोड़ दिया .

चूत और लंड का मिलन अपने चरम पर पहुँच गया . दोनों एक दूसरे की बाँहों मे खोते हुए निढाल हो कर फर्श पर ही लेट गए . थोड़ी देर बाद संजय उठा और अपनी नज़रे पार्वती की आँखों मे गडाते हुए बोला , “मेम साहिब ये चुदाई मुझे जिंदगी भर याद रहेगी .”पार्वती ने भी कहा ,”और नही चोदोगे मुझे .””नही मेम साहिब , अब दूकान पर जन होगा . नही तो सेठ को बोलना भारी पड़ेगा मुझे .”इच्छा नही होते हुए भी संजय को विदा करने पार्वती उठ खड़ी हुयी .उसकी चूत की हालत ख़राब हो गई थी..ऐसी चुदाई उसने सपने मे भी नही सोची थी..पुरा बदन टूट रहा था..लेकिन फ़िर भी अच्छा लग रहा था…संजय खड़ा होकर अपने कपड़े पहने और पार्वती को चूमता हुवा बाथरूम से बाहर निकल गया .

दरवाजे पर आया पार्वती उसके पीछे थी उसने देखा फिर बगैर कपड़ों मे खड़ी पार्वती को अपनी बाँहों मे समेत -ते हुए उसके होंठों को चूमा , चुचियो को सहलाया , चूत को मसला . पार्वती भी उसकी बाँहों से अपने एक हाथ को फ्री कर पैंट के ऊपर से ही उसके लंड को मसलने लगी . लंड झट से खड़ा हो गया . खड़े हुए लंड ने पार्वती के हाथों मे फुर्ती ला दी . और जोर से मसलने लगी और बोली , “देखो इसे . इसको अभी नही जाना है .”फिर नीचे बैठ कर उसके लंड को पैंट की चैन खोल कर बाहर निकाल ली और चूसाने लग गई . लंड मुह मे जाते ही उछल कूद मचने लग . अपनी पैंट को नीचे खिसका कर पार्वती को घोड़ी बना कर अपना लंड उसकी नाजुक चूत मे एक धक्के मे पेल दिया और क़रीब २० मिनिट ऐसे ही चोदा और फ़िर अपना पूरा माल उसकी चूत मे डाला..ये चुदाई बहुत ही घमासान थी..पार्वती सिर्फ़ चीखती रही..आह्ह..मर..गयी.ई.ई..अआछ..चोदो..और संजय ने हुमच हुमच कर चोदा जब पार्वती झड़ी उसके १ मिनिट बाद ही संजय ने अपना पानी भी उसकी चूत मे डाल दिया… पार्वती की जान मे जान आई . उसकी चूत लंड खाने को ही उतावली थी और उसे लंड मिल गया ..प्यारी चूत वालियों…कैसी लगी ये चुदाई..

दोस्तो अभी तक आपने पढ़ा की कैसे नम्रता की कुंवारी चूत की चुदायी विपीन ने की और पार्वती की गरम तड़पती चूत मे प्लंबर संजय ने अपना लावा डाल के उसकी आग को ठंडा किया. नम्रता की पिछली रात अपने जीजा जी के साथ और आज सुबह ही पार्वती की प्लंबर के साथ चुदाई हो चुकी थी लेकिन चूत का मज़ा देखो अभी बात करते -करते दोनों की चूत मे फिर से खाज शुरू हो चुकी थी . पार्वती ने संजय के लौडे का पूरा साइज़ अपनी बातों से नम्रता को बताया . सुनते ही नम्रता के मुह से सिस्कारियां निकालनी चालू हो गई . अपने हाथ से वोह पार्वती के बूब्स को हलके हलके सहला रही थी . पार्वती के दिल और दीमाग पर संजय द्वारा की गई चुदाई छायी हुयी थी . उ

से अपने बूब्स पर नम्रता का हाथ फेरना अच्छा लग रहा था .लेटे लेटे पार्वती ने अपनी आँखों को बंद कर लिया और इस आनंद का ख़ूब मज़ा ले रही थी .नम्रता की चेष्टाये बढ़ने लगी . उसने पार्वती की अस्त -व्यस्त हुयी नाईटी को निकाल फेंका . अपनी जीभ को उसके मम्मो के पास लेजा कर उसे चाटने लगी . उसकी जीभ नीचे से ऊपर उसके संगमरमरी कबूतरों को हलके हलके चाट रही थी . भारी बूब्स को चाटने मे नम्रता को भी ख़ूब मज़ा आ रहा था . “उफ्फ्फ , चाट … रगड़ रगड़ कर चाट ,” ऐसा कह कर पार्वती ने अपने हाथ बढ़ाकर उसकी जांघों पर फेरना चालू कर दिया . जांघों पर हाथ फेरते ही नम्रता को गुदगुदी का एह्साश हुआ . उसके बदन मे करंट दौड़ाने लगा .

अपनी दोनों जांघों को उसने फैला दिया अन्दर उसने पैंटी नही पहना था..असल मे दोपहर के ३ बजे नम्रता हॉस्पिटल से घर आ गई थी..और उसने आते ही पार्वती की हालत देखी..उसे पहले लगा की शायद विपीन दोपहर मे घर आया होगा और उसने पार्वती की कस के चुदाई की है..पार्वती को चलने मे भी तकलीफ हो रही थी..संजय के मोटे लंड ने उसकी हालत ख़राब कर दी थी…लेकिन बाद मे पार्वती ने ख़ुद ही सब उसे बता दिया..सुनकर ही नम्रता गरम हो गई थी और उसने अन्दर कुछ भी नही पहना था…जगह मिलते ही पार्वती के हाथ नम्रता की जांघों के और अन्दर घुसने लगे . उसके हाथ किसी खास जगह को तलाश रहे थे . थोड़ा गीलापन उसके हाथ को मह्सूश हुआ . उसे अपनी मंज़िल मिल गई .

अपनी अन्गूलियों से नम्रता की चूत को सहलाने लगी . चूत पर अन्गूलियों के छूते ही नम्रता की जीभ की स्पीड पार्वती के बूब्स को चाटने के लिए और बढ़ गई . नम्रता के दांतों की हलकी -हलकी चुभन भी पार्वती को महसूस हो रही थी वैसे पार्वती की चुंचिया एकदम लाल हो गई थी और निपल भी सुज़े हुए लग रहे थे..दर्द तो था..संजय ने इन्हे बहुत मसला था..जैसे कपड़ा निचोडा हो..और निपल चूसने मे तो उसने कोई कसर नही छोड़ी थी.. लेकिन यह चुभन पीड़ा देने की बजाय ज्यादा आनंद दे रही थी . पार्वती ने अपनी एक अंगुली नम्रता की रस से भीगी हुयी चूत के अन्दर पेल दी . अपनी अंगुली को वोह लंड की जगह उपयोग मे ला रही थी .

दोनों के मुह से सिस्कारियां निकल रही थी . अब दोनों एक दूसरे को अपनी बाँहों मे लेकर अपने गरम जिस्म को आपस मे रगड़ना शुरू कर दिया . दोनों के बदन की रगड़न से पूरे कमरे का माहौल नशीला हो गया कमरे मे आह्ह..ओह्ह..इश स्.स्.स्.स्.स्. हाय..की आवाज़ आ रही थी. .. दोनों को अब एक -एक लंड की जरूरत महसूस हो रही थी लेकिन मजबूरी मे दोनों और क्या कर सकती थी . दोनों एक दूसरे से चिपट कर एक दूसरे के मम्मे को , चूत को सहला रही थी दबा रही थी… फिर थोड़ी ही देर मे दोनों हापने लगी और निढाल हो कर बिस्तर पर लेट गई .लेकिन ऐसे पड़े पड़े दोनों ही अपनी चूत की आग को और भड़कती हुयी देख सिस्कारियां ले ले कर अपनी ही उन्गलिओं से चूत को चोदना चालू कर दिया .

फिर आपस मे ही घूम कर एक दूसरे की चूत को चूसने लगी . जीभ लगते ही दोनों की सिस्कारियां और बढ़ गई . जहाँ पार्वती सिस्कारी मरते हुए चीख रही थी , “अहह …उफ़ ….देख कैसी चूत ….मे आग लगी .साले प्लाम्बेर को फ़िर से बुला ले…नही तो जीजा जी को फ़ोन कर जल्दी आने के लिए…..हाय ….तू मेरी चूत को .देख क्या हालत की है……उफ्फ्फ …और चाट ….एस ….चाट -ती जा .”वही नम्रता कह रही थी..जीजा जी जब चोदेगा तब मज़ा बहुत आएगा..बहुत प्यार से गरम करता है..तू..जीभ लगा..हाय..और..अन्दर…आह्ह..उफ़..ऐसे ही दोनों बड़बड़ा रही थी नम्रता सिस्कारी मरते हुए मादक आवाज मे चीख रही थी , “हाय ! काया चीज बनाईं है भगवान ने , चुसो चुसो , और जोर से चुसो मेरी चूत को . और अन्दर तक अपनी जीभ घुसेड दो . हाय ! मेरी चूत के दाने को भी चाटो . बहुत मज़ा आ रहा है .

” दोनों मदहोश हो कर एक दूसरे की प्यास मिटाने मे लगी हुयी थी . लेकिन प्यास जो थी वह बुझने की जगह और बढ़ गई . इसी समय विपीन , उनका चहेता चोदु जीजा जी , घर मे हॉस्पिटल से आया और घर मे किसी को ना पाकर चौंक गया . तभी एक बेडरूम से सिस्कारियों की आवाजे सुने दी . अन्दर गया तो रूम का सीन देख कर उसकी आँखों मे चमक आ गई . दोनों सालिया अपनी चूत की खाज मिटाने के लिए एक दूसरे के साथ गुथ्थाम -गुथ हो कर अपनी -अपनी चूत चट्वा रही थी . यह देख कर उसका लंड एक दम से खड़ा हो गया . दोनों , पार्वती और नम्रता बेखबर हो कर एक दूसरे की चूत चाटने मे लगी हुयी थी .

विपीन ने अपने कपड़े उतर कर अपने लंड को तोला . मनो लंड को समझा रहा था की आज रात को एक नही बल्कि दो -दो चूतो को पानी पिलाना है और उनका पानी निकालना है..आगे बढ़कर उसने अपने लंड को नम्रता की चूत के पास लेजा कर खड़ा हो गया . पार्वती थोड़ा चौंकी . मन ही मन सोचा की यह लंड कहाँ से आ गया ..ये भी संजय के लंड जैसा ही मूसल है..लेकिन थोड़ा गोरा है और सुपाडा और मोटा है.. चेहरा ऊपर उठाया तो अपने जीजा जी को खड़े पाया . उसकी तो मन की मुराद पुरी हो गई . उसने लपक कर लंड को अपने हाथो मे समेत लिया . मनो कोई दूसरा आ कर नही ले जाए या कोई दूसरा कब्जा नही कर ले .लंड को हाथो से सहलाती हुयी अपनी जीभ नम्रता की चूत से हटा कर अब लंड को चाटने लगी .”क्या हुआ …चाटो न मेरी चूत को .” कोई जवाब न पाकर नम्रता ने अपना चेहरा ऊपर उठा कर देखा की पार्वती तो जीजा जी के लंड को चाट रही है . नाराज़ होने की जगह उसके अन्दर भी अब चूत की खाज मिटने का औजार मिलाने की खुशी ही महसूस हो रही थी .

नम्रता के चेहरा को देख विपीन ने अपनी आँख मार कर उसके चुताद पर अपना हाथ रख दिया और लगा सहलाने .पार्वती ने विपीन के लंड को पुरा मुह मे लेकर चूसने की पुरी कोशिश कर रही थी और उसे बुरी तरह चुम्हला रही थी और चूस चूस कर बेहाल कर दिया . विपीन अपने लंड को आगे -पीछे कर चुसवा रहा था मनो की यह पार्वती का मुह नही बल्कि उसकी चूत है . विपीन के आनंद की कोई भारती नही रही . अपने हाथो से नम्रता का चुताद कस कर पकडा और लंड चुसाई से वोह बेकाबू हो कर बड़्बड़ा रहा था , “”वाह , मज़ा आ रहा है . कितना अच्छा चूस लेती है तू .आह..पार्वती ..तुझे चोदने के लिए तो मै एक साल से इंतज़ार कर रहा हु..

असल मे कल मै तेरी चुदाई करना चाहता था..जीजू आज दिन मे तो आ सकते थे..मै भी तो मौका ढूंढ़ रही थी.. अभी तो आ गया हूँ तू चूस मज़ा आ रहा है .. किसीने ऐसे चूसा नही मेरे लंड को पहले . मेरे लंड को जन्नत मिल गई , आज …ले …उफ़ …चूस मेरा और … चूस और . ले .. ले ….मेरे लंड को पुरा मुह मे ले कर चूस .”लेकिन जवाब दिया नम्रता ने दूसरे छोर से . वह विपीन के लंड की चूसी बड़े गौर से देख रही थी . उसने कहा , “मैंने भी पहले ऐसा बेकाबू लंड नही देखा . पहली बार ऐसी चूसी देख रही हूँ पर मज़ा आ रहा है इस बड़े लंड को चूसते देखकर मुझे . कितना मोटा और बड़ा है ,.मेरे तो कल चूत का कचूमर निकाल दिया..अभी मुह मे पानी आ गया ..

“तभी विपीन ने अपना लंड पार्वती के मुह से निकाल कर नम्रता के मुह मे पेल दिया और कहा , “ले मेरी नम्रता रानी , तू क्यों बाकी रहती है . चूस के मुझे पागल कर दे . हाय , वह जीभ से कर , मुह मे ले और अन्दर ले . पुरा खा इस बड़े लंड को .”नम्रता को अब लंड चूसने मे बड़ा मज़ा आ रहा था . अपने हाथ से लंड को हिला -हिला कर चूस रही थी . कभी अपनी जीभ बहार निकाल कर लंड के सुपाडे और लंड की गोटियों को चाट रही थी तो कभी लंड को मुह मे लेकर गपा -गप चूस रही थी . पार्वती विपीन के सामने आकर खड़ी हो गई . विपीन ने उसके कबूतरों को दबोच लिया .

अपने हाथो से उन दोनों फड़ फडाते कबूतरों को मसलने लगा . मसलने के साथ ही पार्वती के मुह से सिस्कारी निकाल गई आह्ह..जीजू.. क्या ..कर..रहे हो.. उनमे वैसे ही दर्द था..दोपहर मे संजय ने उन्हें जबर्दस्त मसला था… विपीन ने अपना मुह बढ़ाकर उसके मम्मो को जीभ से चाटने लगा . वासना की आग मे जलते हुए उसके मम्मे भारी हो चुके थे . उसके निपल्स कड़क होकर एकदम से तन गए थे . निपल्स पर विपीन जब अपना दंत गदाता तो पार्वती की सिस्कारी और बढ़ जाती ..दर्द के बावजूद उसे मजा आ रहा था..अब नम्रता लंड को मुह से निकाल कर बेद पर चित हो कर लेट गई और विपीन के लंड को अपनी चूत पर रगड़ने लगी और कहने लगी… “जीजा जी , आओ . घुसाओ अपने लंड को अपनी प्यारी साली की चूत मे..आह्ह.. बड़ी बेचैनी हो रही है मेरी चूत मे .””ले मेरी रानी . संभल अपनी चूत को .” इतना बोलकर अपने लंड का एक धक्का विपीन ने दिया तो सर्र.र.र.र..र. से नम्रता की चूत मे लंड का सुपाडा घुस गया वो चिल्ला उठी.ऊईई..माँ..लेकिन साथ ही नीचे से कमर उछाला और अब गप्प प.प. से पूरा लंड अन्दर…और उसकी खुशी की चीख..आह्ह जीं .ज्जू. . नम्रता खुसी से पागल हो गई .

विपीन ने लगातार अपने धक्के देने चालू रखे . चूत भी धक्के खाकर लगातार पनि छोड़ रही थी . तभी पार्वती उठाकर नम्रता के मुह पर बैठ गई . पोजीशन यह थी की नम्रता का मुह पार्वती की चूत पर और पार्वती के मम्मे विपीन के मुह मे और विपीन का लंड नम्रता की चूत मे . बड़ा ही कामुक सीन था यह . तीनो बड़े मजे से चूसी और चुदाई मे लगे हुए थे . तभी पार्वती ने अपने हाथ बढ़ाकर विपीन का लंड अपने हाथ मे जकड लिया . विपीन जब भी धक्का मर रहा था तो नम्रता की चूत का दाना भी पार्वती के हाथ से रगड़ खा रहा था . इसके कारण नम्रता का चुदाई का मज़ा डबल हो गया .नम्रता विपीन को उसका रही थी , “छोड़ो मेरे राजा , ख़ूब जोर -जोर से धक्के लगाओ ..

अब कोई डर नही है… मेरी चूत की खाज मिटाओ … उफ्फ्फ …. मेरे चोदु राजा ….. चोदो मुझे …. जोर से चोदो …. तुम्हारे लंड से मुझे रात भर चोदो ….. आह्ह ह . … ख़ूब चुदाई करो मेरी ….. ओह्ह ह ह …. मेरे लंड …. मेरी चूत के दीवाने ….. मेरे रस को पीने वाले ….. मेरे जीजा जी ….. चोदो मुझे ….. धक्के ….. अहह ह ह … उछल -उछल कर …. मारो धक्के मुझे …. चोदो उफ़..मर..गयी..उई..ई.ई.ई.ई.आह…… खाज मिटाओ मेरी चूत की तुमने कल से मुझे चुदवाने की आदत लगा दी है जिज्जू.अब मै यही रहूंगी और तुमसे चुदवाउंगी ….. मारो धक्के मारो …”विपीन भी उसी हिसाब से जवाब दे रहा था , “ले मेरी रानी ….खा मेरे …. लंड को .तेरी जीजी की मैंने सील तोडी और तेरी भी..

पार्वती पिचले साल यहाँ से बच कर गई..लेकिन उसने शायद सील तुड़वा ली है..लेकिन तुझे मै चोदुंगा रानी तेरी जीजी के साथ तीनो को चोदुँगा .. ले … और ले … मेरे लंड ….. तुम्हारी चूत आज कितनी ज्यादा जुसी हो गई है …. ले मेरी … चुद्क्कड़ साली …. ले और ले …. खा मेरे लंड के धक्के …. हाई …. चुदा अपनी चूत को … ले खा … और खा … मेरे लंड के धक्के .”पार्वती उस चुदाई को बड़ी बेसब्री से देख रही थी . उसकी चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी . वोह भी नम्रता से चुसवाते चुसवाते बोलने लगी , “चूस मेरी चूत को …. साली .. चुद्वा चुद्वा कर अपनी चूत की …खाज तो मिटाली .मै कल से इस लंड के लिए बेचैन हु.अभी जल्दी खत्म कर मुझे भी चुद्वाना है..जीजा जी ..तुम्हारी पार्वती की चूत मे तुम्हारा लंड बिल्कुल टाईट जायेगा .

नम्रता साली तू मजा लेगी .. लेकिन मेरी … चूत … को चूसेगी कौन … चूस मेरी चूत को … लो जीजा जी … साली का और जोर से धक्के मारो … फाड़ दो इसकी चूत …. को … पेलो .. पेलो … और जोर से पेलो ..अपने मोटे को …. उफ्फ्फ्फ़ … मेरे बूब्स … देखो …. दांत न गडाओ …आह..काटो मत प्लीज़….. हाँ … ऐसे … जीभ से चाटो मेरे चुन्चियो को …. मेरे … निपल्स को …. चाटो …”पानी …चोद साले … चोद साले …. चोद मुझे …. चोदते जाओ … चोदो … चोदो मुझे … यह लो मैं झड़ गई …. येस …. येस … झड़ गई मै .”विपीन ने आखरी धक्का लगाया और अपने मूसल लंड को नम्रता की चूत से निकाल कर पार्वती को घोड़ी बनाकर उस पर सवार हो गया .

एक झटके मे ही उसकी चूत मे अपना लंड पेल दिया पार्वती की चूत अभी तक फूली हुयी थी..संजय की चुदाई से अभी भी दर्द था..और फ़िर विपीन का झटका..उसकी चेख निकाल गई..ऊह्ह..माँ..मर गई.ई.ई.ई.ई. मेरी चूत गई.ई.ई. काम से…विपीन का लंड अब और सख्त हो चुका था नम्रता की चुदाई करते हुए.. नम्रता को चोदते चोदते उसका लंड थका नही था बल्कि उसकी चोदने की भूख बढ़ गई थी . नम्रता साइड मे लेट कर अपनी उखड़ती साँसों को बराबर करने मे और पार्वती और विपीन की चुदाई देखने मे लग गई .”आः … हान् … और जोर्सय चोदो …. इसी तरह से … चोड़य … रहो … हाय ई दैय्या ……. बहुत गज़ब के चोदते हो … जीजा जी ….मै पिचले साल तुमसे सील तुड़वा लेती तो मज़ा आता..मेरे चाचा के लड़के ने सील तोडी..तुमने मुझे इतना चुदासी बना दिया था..मेरे सामने ही जीजी को चोदते थे..क्यों नही मुझे भी चोदा तभी..?

आह्ह.. चोदो और जोरसे …. हाय रे दैया !” पार्वती के मुह से सिस्कारी निकलने के साथ बेडरूम मे केवल चुदाई चुदाई हो रही थी . विपीन भी अपने लंड से पार्वती की चूत की चुदाई फुल स्पीड से चालू रखी .पार्वती का मज़ा बढ़ता ही जा रहा था , “इसको देखो … कितना ज़ालिम लौडा है तुम्हारा जीजा जी ! हाय ई ई … कैसा अकड़ कर खड़ा है …. बड़ा मजा आ रहा है मुझे तुमसे चुदवाने में डीअर … …. ओ ऊह ह हह ह तुम बहुत अच्छा चोदते हो ….. आ अहह ….. ऊ उह्ह ….. ऊफ्फ्फ …. यूंही … हाँ यूंही चोदो मुझे … बस चोदते जाओ मुझे … अ अब कुछ और नहीं चाहिए मुझे …. आज जी भर के चोदो मुझे … … हाँ राजा जम कर चोदाई करो मेरी … तुम बहुत अच्छे हो … बस यूंही चोदाई करो मेरी … ओ ओ ओ ओह्ह ह ह ह ह ह ….. खूब चोदो मुझे …

“विपीन भी उसका जवाब देते हुए बोला , “ले साली , खा मेरे लंड को … देख कैसे साली … चुदवा रही है तेरी जीजी को चोदते हुए भी मै तुझे याद करता था..लेकिन तू ने कभी कहा नही की जीजा जी मेरी चूत मारो….. ले संभाल अपनी चूत को … उफ्फ्फ .. संभाल … कितनी नरम और कोमल है तुम दोनों की चूतें … साल्ली … चुदा … और … चुदा … ऐसा लंड और चूत का संगम तुझे और कहीँ नही मिलेगा … ले चुदवा … साली … तुम दोनों को आज रात भर चोदुँगा … ले खा मेरे लंड को …. ख़ूब चुद्वाओ ….उफ्फ्फ “”चोद डालो मुझे ! मेरे लंड राजा ….मुझे लूट लो ….. ये बदन तुम्हारा है . अहह ! चढ़ जाओ मुझ पर मेरे जिस्म के मालिक , मेरी चूत छिन्न भिन्न कर दो . मेरी चूत चिर डालो . मेरे चूत के सरताज … अपने मूसल , मोटे , लंबे और …. गधे जैसे लंड से ! मेरी चूत …. के अन्दर तक पेलो !….

मै और मेरी चूत केवल और केवल तुम्हारी है . आओ , मेरे राजा ….. प्लीज़ मेरी चूत को जोर जोर से …. रगड़ रगड़ कर …. पुरी तरह से पेलो अपने मूसल से !” साथ ही उसका भी पानी निकलना शुरू हो गया . लेकिन विपीन का लंड अभी भी झडा नही था .रात भर दोनों को थोड़ी थोड़ी देर से चोद्ता रहा . जब भी उसका लंड झड़ने के क़रीब होता तो चुदाई रोक देता . उसे आज रात भर दोनों को चोदना जो था . सुबह जैसे ही हुयी विपीन ने दोनों सालियों को पलंग के नीचे बैठाकर अपने लंड को हाथ से उनके ऊपर आगे पीछे करने लगा .”ओह्ह्ह …. उ उ उह्ह ह्ह्ह …. अब मेरा लंड झादेगा …. लो संभालो मेरी धार को … मेरा अमृत निकाल रहा है ,” कहता हुआ अपने लंड को दोनों के मुह पर बारी बारी से ले गया और अपनी वीर्य की धार फौवारे जैसी और तेज़ पिचकारी जैसी छोड़ दी .

रात भर का रुका हुवा माल जोर की पिचकारी बन कर छूता . दोनों सालिया हैरानी के साथ इतना ज्यादा मख्खन एक साथ निकलते हुए देख रही थी . विपीन ने झड़ने के बाद अपना लंड बारी -बारी से दोनों के मुह मे ठेल दिया . उसको पिचकारी मरने के बाद इस चुसाई मे बड़ा ही मज़ा आया .थोड़ी देर बिस्तर पर लेटने के बाद दोनों सालिया नम्रता और पार्वती एक पार्टी की फरमाइश कर बैठी . शाम की पार्टी फिक्स हुयी . जगह के बारे मे बोला की मेरे दोस्त भी उस पार्टी मे आएंगे तो जगह दोपहर मे फ़ाइनल करके बता दूँगा लेकिन पार्टी के बाद फ़िर से चुदाई होगी ये भी कह दिया..भले ही वो होटल के रूम मे हो..दोनों तैयार हो गई…

फिर नहा कर ऑफिस मे निकाल गया . नम्रता और पार्वती रात भर की चुदाई के बाद थक चुकी थी . दोनों बिस्तर पर एक दूसरे के गले लिपट कर नंगी ही सो गई दो घंटे बाद उठकर दोनों ने एक दुसरे की चूत को गरम पानी से सेंका फ़िर हॉस्पिटल गई..उन्हें रात को फ़िर चुदवाना था..

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