अतरंगी परिवार की सतरंगी चुदाई- 2

रेवती शाम को चली गई, मेरा भाई भी तीन दिन बाद चला गया, कोई दस दिन बाद मेरे पति टूअर से लौटे। इस बार भी वे तरह तरह के प्रसाधन लाये थे, शाम के वक्त घर में घुसे तो घुसते ही मुझ पर टूट पड़े, उन्होंने कपडे भी नहीं बदले और मुझसे लिपट गये। मैंने दरवाजे को जब तक लोंक किया तब तक वे मेरे गाउन को हटा चुके थे और देखते ही देखते मेरी ब्रा को हटा स्तनों से सरका कर मेरे स्तनों को चूसने लगे।
ओफ्फो … तुम सारे भाई बहन एक जैसे हो ! घर में आकर पानी वानी पीने के स्थान पर मेरे स्तनों पर टूट पड़ते हो ! मैंने उनके सिर पर हाथ फ़ेर कर कहा।

वह चौंके और स्तन के निप्पल को मुंह से निकाल कर बोले- क्या मतलब है तुम्हारे कहने का? तुमने मेरे साथ मेरी बहन का जिकर क्यों किया..?
इसलिये किया क्योंकि आपके यहाँ से उस दिन जाते ही आपकी बहन रेवती आई थी, वो भी दरवाजा खुलते ही मेरे ब्लाउज को खोलने लग पड़ी थी ! मैंने हंसते हुए कहा।
क्या !!!??? … ..क्या रेवती को भी यह सब पसंद है … .? उन्हें आश्चर्य हुआ।

फिर क्या हुआ?… उन्होंने मुझे अपनी बाजूओं में उठा कर बैडरूम की ओर चलते हुए पूछा।यह कहानी देसिबीस डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे ।
मैं उनकी टाई की नॉट ढीली करती हुई बोली- जब वह यहाँ पहुंची थी तब मैं अपने भाई के साथ बाथरूम में थी, हम दोनों नहा रहे थे।
साथ साथ नहा रहे थे …! तब तो बड़ा मज़ा आ रहा होगा ! चलो, अपन भी साथ साथ नहाते हैं, नहाते नहाते सुनेंगे पूरा किस्सा ! उन्होंने बैडरूम में प्रवेश होते होते अपने कदम बाथरूम की और मोड़ कर कहा।
मजा तो आना ही था …! मेरा भाई मुझे साबुन लगा कर मुझे बुरी तरह गर्म चुका था, वह मेरी योनि को चाट ही रहा था कि तुम्हारी बहन ने कॉल बेल बजा दी, हम दोनों का मूड ऑफ़ हो गया। मैं उसे प्यासा छोड़ बाथरूम से निकली और जल्दी जल्दी साड़ी ब्लाउज पहन कर दरवाजे पर पहुंची। दरवाजा खोला तो पाया कि सामने गहरे गले के टॉप और घुटनों तक की चुस्त स्कर्ट में अपनी उफनती जवानी लिये रेवती खड़ी थी।

मेरे इतना कहते कहते मेरे पति ने मुझे बाथरूम में ले जाकर मुझे फर्श पर उतार दिया और मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया। फिर मेरे होंठों को चूमने के बाद मेरे स्तनों को चूम कर बोले- फिर … फिर क्या हुआ … कहती रहो और मुझे इन झरनों से अपनी प्यास बुझाने दो !
इतना कह कर उन्होंने फिर मेरे स्तन पर मुंह लगा दिया। मेरे शरीर में आग भरती जा रही थी, मेरे हाथों ने उनकी टाई निकालने के बाद उनके कोट को भी उतार दिया था, अब शर्ट के बटन खुल रहे थे।

शर्ट के बटन खोलते खोलते मैं बोली- उफ … .उफ … रेवती ने भीतर आते ही रंगीन मजाक आरंभ कर दिये, मेरे महकते रूप की तारीफ़ करने लगी, मैं समझ गई कि लड़की प्यासी है, मेरी बातों को … .उफ … उफ … आहिस्ता आहिस्ता चूसिये इन्हें … . आप तो पागल हुए जा रहे हैं … उफ … मेरे पति पागलों की भांति ही मेरे स्तनों का दोहन सा कर रहे थे, मेरे होंठों से सिसकारियां फूटने लगी थी, ऐसा लग रहा था जैसे नाभि में कोई तूफ़ान अंगडाई लेने लगा है, मैंने उत्तेजना से उतपन्न होने वाली सिसकारियों को अपने दांतों तले दबा कर एक लंबी सांस छोड़ी फिर कहना शुरू किया- रेवती को मैं चाय बनाने के लिए अपने साथ रसोई में ले गई तो उसने … ..उफ … ..ऑफ … ओफ्फो … क्या कर रहे हैं आप … .? क्या कोई ट्रेनिंग लेकर आये हैं कहीं से स्तनों के साथ इस तरह पेश आने की … … ..आज तो आप मेरे स्तनों को झिंझोडे डाल रहे हैं आज … मेरे इस तरह कहने से उन्होंने स्तन से मुँह हटा कर मेरे होंठ चूम कर मनमोहक ढंग से कहा- क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा? अगर मजा नहीं आ रहा है तो मैं इन्हें आहिस्ता आहिस्ता चूसता हूँ।

मजा तो बहुत आ रहा है, इतना आ रहा है कि ऐसा लगता है जैसे मैं आज कण कण होकर बिखर रही हूँ … … ठीक है तुम ऐसे ही चूसो !
मैंने उनकी शर्ट को उनकी बाजुओं से निकाल कर कहा।
तुम रेवती वाली बात तो बताओ … उन्होंने यह कह कर स्तन के निप्पल को फिर मुंह में ले लिया और अपने हाथों को मेरे नितंबों पर ले जाकर नितंबों की मालिश सी करने लगे।

मैं उनकी बेल्ट खोलते हुए बोली … फिर एक ओह्ह..उफ … ऊई … फिर हाँ मैं..उफ … .मैं कह रही थी कि रेवती को मैं रसोई में ले गई तो उसने वहां पहुँचते पहुँचते ही मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया और मेरे स्तनों को चूसने की इच्छा जाहिर की और यह भी बताया कि अपनी सहेली के साथ लेस्बियन लव का आनंद लेती है। मेरी … .उफ … … .ओह … अपने पति के द्वारा अपनी योनि में मौजूद भंगाकुर को मसले जाने से मेरे कंठ से कराह निकल गई- उफ … ये शावर तो खोल लो … .नहाना भी साथ साथ हो जायेगा !

मैं इतना कह कर पुनः विषय पर आई … मेरे शरीर में मेरे भाई ने पहले ही कामाग्नि भड़का डाली थी, रेवती द्वारा स्तनों को पकड़ने मसलने और उसकी स्तन पान की इच्छा ने मुझे और उत्तेजित कर डाला था। उसे तबतक पता नहीं था … उफ … ओह … ओफ … .मेरे पति अब मेरे स्तनों को छोड़ कर नीचे पहुँच गए थे, उन्होंने मेरी योनि पर मुख लगा दिया था, अब वो मेरे भंगाकुर को चूसने लगे थे।
मैं उनके बालों में अंगुलियाँ फंसा कर मुट्ठियाँ भींचने लगी, उनकी इस क्रिया ने मेरी नस नस में बहते रक्त को उबाल सा दिया था, मुझे अपनी उत्तेजना ज्वालामुखी का सा रूप लेती महसूस हुई, मुझे रोम रोम में फूटते कामानन्द के कई घूंट भरने पड़े।
सुनाओ न आगे क्या हुआ …? मेरे पति ने अपना मुख मेरी योनि से पल भर के लिए हटा कर कहा।

तुम शावर खोलो, मैं आगे बताती हूँ … अपनी साँसों को संयत करने का असफल प्रयास करती हुई बोली।यह कहानी देसिबीस डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे ।
ओफ़्फ़ … फिर रेवती के सामने मेरा भाई आ गया, वह रसोई के बाहर खड़ा होकर पहले से हम दोनों को देख भी रहा था और हमारी बातें भी सुन रहा था, मेरा भाई सिर्फ अंडरवीयर में था, वह भी पहले से उत्तेजित था इसलिए उसका बृहद आकार में फैला लिंग अंडरवीयर में से भी उभरा उभरा दिखाई दे रहा था। रेवती की दृष्टि उसके अंडरवीयर पर टिक गई, मैं समझ गई कि उसने अभी तक लिंग के दर्शन नहीं किए हैं, ओह … उफ आउच … ओह …

इतनी कहानी सुनते सुनते ही मेरे पति ने अपने लिंग का मुंड मेरी योनि में प्रविष्ट करा दिया, वे शावर वह खोल चुके थे।
मैं उनके द्वारा हुए लिंग प्रवेश से आवेशित होने लगी थी, मेरे हाथ उनके कन्धों से पीठ तक बारी बारी से कस रहे थे, मेरी साँसें तीब्र हो रही थी, मादक सिसकियों की अस्फुट ध्वनियाँ रह रह कर मेरे कंठ से उभर रही थी,
मेरे पति ने लिंग का योनि में घर्षण करते हुए कहा … .स्टोरी का क्या बना …! आगे क्या तुमने अपने भाई से रेवती की प्यास बुझवा दी? … ओह … कितना मजा आ रहा है शावर के नीचे मैथुन करने में … उफ … वह लिंग को आगे तक ठोक कर बोले। उनके हाथों में मेरी पतली कमर थी, उनकी जांघें मेरी जाँघों से टकरा कर विचित्र सी आवाज पैदा कर रही थी।

 

हाँ … उफ … .ओह … … ..ऊई मां … .तुम क्या मोटा कर लाये हो अपने लिंग को … इससे आज ज्यादा ही आनंद मिल रहा है … ., मुझे वाकई पहले से ज्यादा मजा आ रहा था, मैं फिर स्टोरी पर आई … .बड़ा मजा आया था … .रेवती को मेरे भाई ने पूरा मजा दिया था … खूब जोर जोर के धक्के मारे थे … मैंने बताया और लिंग प्रहार से उत्त्पन्न आनन्दित कर देने वाली पीड़ा से मेरे शरीर के रोयें रोयें में पुलकन थी, कंठ खुश्क हो गया था, मेरी जीभ बार बार मेरे होठों पर फिर रही थी।

थोड़ी देर में मेरे पति ने मेरी मुद्रा बदलवाई। अब मेरी पीठ उनकी ओर हो गई, मैंने जरा झुक कर दीवार में लगी नल को पकड़ ली, वह मेरी योनि से लिंग निकाल चुके थे और अब मेरी गुदा(गांड) में प्रवेश करा रहे थे। गुदा में लिंग पहले ही प्रहार में प्रवेश हो गया, उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर खूब शक्ति के साथ धक्के मारे और गुदा में ही स्खलित हो गए, मैं भी स्खलित हो चुकी थी।
फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर देर तक नहाते रहे।

मेरे पति को अब तीस पैंतीस दिन तक किसी टूर पर नहीं जाना था, उन्होंने रेवती वाली कहानी कई दिनों तक मुझसे बड़ी बारीकी से सुनी थी ऑर फिर हसरत जाहिर की थी कि काश इस बार रेवती जब घर आये तो वो भी मौजूद हों, इस बात पर अफ़सोस भी जताया था कि जब रेवती वाली घटना घटी तब वह वहाँ क्यों नहीं थे।

वे इस बार टूर से सिर्फ सौन्दर्य प्रसाधन नहीं लाये थे बल्कि कई इंग्लिश मैगजीन भी लाये थे, जिनका विषय एक ही था सेक्स। उन मैगजीनों में अनेक भरी सेक्स अपील वाली मोडल्स के उत्तेजक नग्न व अर्धनग्न चित्र थे, कुछ कामोत्तेजक कहानियां व उदाहरण आदि थे तथा दुनिया के सेक्स से संबंधित कुछ मुख्य समाचार थे।
मैं कई दिनों तक खाली समय में उन मैगजींस को देखती व पढ़ती रही थी।
दरअसल मेरी ससुराल इस शहर से चालीस किलोमीटर दूर एक कस्बे में है, जहां से कभी किसी काम से मेरी ससुराल के अन्य लोग आते रहते हैं, कभी मेरे वृद्ध ससुर तो कभी ननद रेवती, कभी मेरा एक मात्र देवर जो रेवती से चार वर्ष बड़ा है, अगर शहर में उनमें से किसी को शाम हो जाती है तो वे हमारे घर में ही ठहरते हैं।

एक दिन फिर मेरी ससुराल से एक शख्स आया, वह मेरा देवर था। शाम के पांच बजे वह हमारे घर आया था, मेरे पति घर पर नहीं थे, ऑफिस से साढ़े पांच या छः बजे तक ही आते थे।
मैं सोफे पर बैठी इंग्लिश मैगजीन पढ़ रही थी, तभी कॉल-बेल बजी, मैंने मैगजीन को सेंटर टेबल पर डाला ऑर यह सोचते हुए दरवाजा खोला कि शायद मेरे पति आज ऑफिस से जल्दी आ गए हैं, लेकिन दरवाजा खोला तो पाया कि मेरा देवर जतिन सामने खड़ा है, उसने कुर्ता पायजामा पहन रखा था, वह कुर्ता पायजामा में काफी जाँच रहा था।
भाभी जी नमस्ते …! उसने कहा और अन्दर आ गया।
कहो जतिन ! आज कैसे रास्ता भूल गये? तुम तो अपनी भाभी को पसंद ही नहीं करते शायद … ! मैंने दरवाजे को लॉक करके उसकी ओर मुड़ कर कहा।

ऐसा किसने कहा आपसे? वह सोफे पर बैठ कर बोला।
वह मेज़ से उस मैगजीन को उठा चुका था जिसे मैं देख रही थी।
मेरे दिल में धड़का हुआ, मैगजीन तो कामोत्तेजक सामग्री से भरी पड़ी थी, कहीं जतिन उसे पढ़ न ले, मैंने सोचा लेकिन फिर इस विचार ने मेरे मन को ठंडक पहुंचा दी कि अगर यह मैगजीन पढ़ ले तब हो सकता है उसकी मर्दानगी का स्वाद आज मिल जाए, इसमें भी तो जोश एकदम फ्रेश होगा ! मैं निश्चिंत हो गई।

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