येसी चुदक्कड़ लड़की पहली बार देखा

येसी चुदक्कड़ लड़की पहली बार देखा
( Yesi Chudakkad Ladki Pahali Baar Dekha )

यह कहानी मेरी यानि संजय और कामिनी की (नाम बदला हुआ) है। कहानी 2 साल पुरानी है। मेरे ऑफिस में एक औरत ने ज्वाइन किया था उसका नाम कामिनी था। सबमें बहुत चर्चा थी कि यह औरत बहुत तेज़ है। कुछ ने कहा कि बहुत बड़ी चुदक्कड़ है। मैं हैरान था कि क्या सही में ये ऐसी ही इतनी खुश मिजाज़ है.. सबसे बात करने वाली है.. या लोग सिर्फ़ अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आते है, इसलिए इसके विषय में ऐसा कह रहे हैं।

खैर.. भगवान को शायद कुछ और मंजूर था, उसकी सीट मेरे पास हो गई, उससे मेरी बात शुरू हुई। आम ऑफिस के अन्य सहकर्मियों की तरह थोड़ा छेड़छाड़ भी हुई। वो इतना हँसती और ऐसे शरमाती थी.. जैसे सच में वो खुद को और छेड़ने का आमंत्रण दे रही हो।

उसकी बहुत अच्छी स्माइल थी। उसका शरमाना ऐसा कि उससे नाज़ुक और उससे ज़्यादा कमसिन कोई नहीं हो। वो 32 साल की होकर भी लड़कों से बहुत घुलमिल कर रहती थी। एक दिन मैंने पूछा तो उसने बताया कि उसका पति साइंटिस्ट है और एक बेटी भी है।

शायद वो अपने पति से थोड़ी उखड़ी सी थी। जब उसकी तारीफ करो तो कहती शायद मेरा पति इस बात को समझता। मुझे समझ आ गया कि इसका पति इसे परेशान करता होगा। खैर कुछ दिन बीते.. एक दिन शाम को एक अंजान नंबर से फोन आया।

ये कामिनी ही थी.. वो बोली- मुझे तुमसे कुछ काम है। मैंने फोन पर ही मदद की बात कही, तो उसने कहा- फोन पर थोड़ा समझ नहीं आ पाएगी। मैंने कहा- चलो आकर मिलता हूँ। वो नज़दीक ही रहती थी।

मैं उससे मिला, बात हुई.. आते हुए मैंने हाथ मिलाया.. तो वो थोड़ा झिझक रही थी। मैंने पूछा तो कहती है- मैं ऐसे हाथ नहीं मिलाती.. अजीब लगता है। पर उसने मुझसे हाथ मिलाया और कहा- तुम गर्म हो.. मतलब तुम अपनी गर्लफ्रेंड के लिए वफ़ादार रहोगे।

मैंने कहा- तो अच्छा है ना तुम्हारे लिए | वो शर्मा गई। फिर उससे मुलाकात होने लगी। वो हर बात मुझसे शेयर करती, उसने अपने पति के बारे में बात करनी शुरू की। अब सब कुछ खुल कर होने लगा। एक दिन वो यूं ही खुलते हुए बोली- मेरा पति मुझको सिर्फ़ चोदने के लिए इस्तेमाल करता है। जब भी ऑफिस से आता.. वो मुझको नंगी करता और चढ़ जाता। चाहे मेरा मन हो या ना.. वो मुझे ज़बरदस्ती चोदता है।
यह बता कर वो काफ़ी उदास हो गई।

मैं उसकी तरफ ही देख रहा था। वो आगे बोली- मेरा पति कहता है कि चुदाई करना.. ऑफिस की टेन्शन मिटाने का सबसे बढ़िया उपाय है। उसको मना करो.. तो वो मुझको धक्के देकर कमरे से निकाल देता है।

मैं हैरान होकर उसकी बातों को सुन रहा था। उसने बताया- मैं इस सबसे परेशान होकर एक और लड़के के चक्कर में पड़ गई, जिसने मुझे प्यार के जाल में फंसाया और मेरे पैसे लूटे। कई बार मेरा जिस्म इस्तेमाल किया, जबकि मैं उससे प्यार करने लगी थी। मैं उस लड़के के लिए अपने पति को छोड़ कर बंगलोर आ गई थी। आज मैं घरवालों से बात को छिपा कर अपनी बेटी उनके पास छोड़कर यहाँ काम कर रही हूँ।
मुझे उसकी बातों से लगने लगा था कि वो काफ़ी सताई हुई है। मुझे उस पर दया आ गई और मैं उसके करीब हो गया।

मैं उसको खुश करने के लिए मज़ाक में छेड़ने लगा और उससे कहा- मेरी गर्ल-फ्रेण्ड बनोगी?

वो बोली- मैंने प्यार तो बहुत कर लिया अब ना होगा। मैं चुप हो गया। पर वो मुझे खोना भी नहीं चाहती थी। वो मुझसे हमेशा कहती रहती कि लड़की को पटाना हो.. तो आगे बढ़ना सीखो। उसका एक मुँह बोला भाई भी था, जो उसको नशा करवा के चोदता था। वो उससे तंग आ गई थी। एक दिन उसके पास उस भाई का फोन आया तो वो रोने लगी।

मैंने उसका हाथ थामा और चूम लिया। वो अपना गम भूल कर मुस्कुरा दी। फिर मेरे हाथ को लेकर वो फोन सुनने लगी कि अचानक वो मेरा हाथ अपने बोबे पर ले गई और मेरा हाथ उसके चूचे को महसूस करने लगा। तभी वो अचानक चौंक गई और शर्मा गई। फिर मैं उसके माथे को चूम कर जाने लगा।

उसने कहा- तुम मत आया करो।

मैंने कहा- पक्का..?

हँस कर बोली- प्लीज़ मुझे मत छोड़ना।

मैंने कहा- ओके.. नहीं छोडूंगा।

मैं उसके गले से लग गया।

कहती- अब मुझे छोड़ो.. और जाओ..

मैं चला गया।

उसने मुझे फोन किया.. कहती है- तुम मेरे गले से मत लगा करो।

मैंने कहा- क्यों?

कहती- कुछ होता है।

मैंने कहा- कहाँ?

‘तुम बहुत शरारती हो..’

फिर वो हँस दी।

मेरे साथ बाइक पर आते-जाते कहती- ब्रेक मत मारो.. और कितना दबाओगे।

मेरा लौड़ा गरम होकर खड़ा हो जाता.. तो हँसने लगती।

एक दिन वो मेरे कमरे में आई। मुझसे बात करने लगी।

मैंने कहा- मुझे तुमको चूमना है।

बोली- नो..

मैंने कहा- हाँ..

और मैंने उसका गाल चूम लिया।

वो- मैं शादीशुदा हूँ।

तो मैंने कहा- चुम्मा अच्छा नहीं लगा?

कहती- नहीं ऐसी बात नहीं..

मैंने उसको और चूमा।

फिर यह सिलसिला चलने लगा। बहुत जल्दी ‘वो’ दिन भी आ गया।

एक दिन वो बहुत परेशान थी।

मैंने कहा- क्या हुआ?

कहती- पति फोन करके तलाक़ देने का बोल रहा है।
वो बहुत परेशान थी।
मैंने उसको गले से लगाया.. तो थोड़ी शांत हुई।

फिर अचानक से मैंने उसके होंठ चूमे तो उसने कुछ ना कहा।

मैंने फिर से चूमा.. तो वो खुद से लेट गई।

मैंने भी अचानक से उसके ऊपर लेटकर उसको चूमना जारी रखा.. तो उसने साथ देना शुरू कर दिया।

मैंने उसके बोबे दबाए.. तो वो और गर्म हो गई, फिर अचानक वो मुझसे कसके लिपट गई.. जैसे कह रही हो कि आओ मेरी प्यास बुझाओ।
मैंने उसकी टी-शर्ट उठा कर उसके बोबे दबाए और ब्रा उतार दी।

क्या बोबे थे.. एकदम मस्त.. और निप्पल तो बस कातिलाना थे।

मैंने हल्का सा काटा तो उसने टाँगें उठा कर मेरी कमर से लपेट लीं।

बस फिर मैंने नीचे आकर उसकी पैन्ट निकालना चाही.. तो उसने पहले मना किया।

मैंने कहा- चाहती नहीं क्या?

तो थोड़ी देर में वो मान गई, उसने फिर अपनी चूत सिकोड़ ली।

मैंने चूत में उंगली डाल दी.. तो उसने ‘आ.. उहह’ शुरू कर दी.. और टाँगें खोल दीं।

अब उसने भी मेरी शर्ट उतार कर मेरी छाती चूमनी शुरू कर दी।

अब मैंने अपने लंड निकाल कर उसके मुँह में देने लगा।

कहती- नहीं.. यह ग़लत है।

मैंने कहा- प्लीज़ आज मत रोको.. क्या मेरे प्यार भरोसा नहीं है?

उसने मेरी तरफ प्यार से देखा और मुँह में लेकर मेरा लौड़ा चूसने लगी।

फिर उसने कहा- तुमने पहले चुदाई की है?

मैंने कहा- नहीं।

तो बोली- मुझे प्रेग्नेंट मत कर देना।

मैंने उसकी बात को सुन कर लौड़ा चूत में पेल दिया।

हाय क्या मस्त चुदाई हुई.. उसने भी क्या गाण्ड उठा कर साथ दिया.. मजा आ गया।

पूरी दम से चोदा और फिर उसकी गाण्ड में उंगली की.. तो कहती है- नो.. आज उधर नहीं।

‘ओके..’

कुछ देर यूं ही पड़े रहने के बाद उसने कहा- अब जाने दो यार.. दो बज गए।

वो उठी तो सामने शीशे में उसके उछलते बोबे देखकर मैं फिर उत्तेजित हो गया और उसको पीछे से पकड़ कर बिस्तर पर गिर गया।
मैं उसके बोबे चूसने लगा तो उसने कहा- तुम मुझे इतना प्यार मत करो.. डर लगता है।

मैंने कहा- क्यों?

तो कहती है- यह ग़लत है.. भगवान ने मुझे सच्चा प्यार दिया।

फिर हमने दीवार के साथ लग कर एक बार फिर से चुदाई की। अब तो यह सिलसिला चलने लगा। हर हफ्ते एक-दो बार चुदाई पक्के में होने लगी।

उसके साथ अब तक के जीवन के कई दिन बिताने के बाद मैं सोचने लगा कि कामिनी के साथ मेरी जो कल्पना थी, वो सच में पूरी होती नजर आ रही थी।

मैं बिस्तर में लेटा हुआ उसकी याद में डूबा था.. कुछ पुरानी यादें याद आ गईं कि कैसे कुछ दिन पहले ही कामिनी मिली थी.. कितनी जल्दी हम दोनों कितने करीब आ गए।

फिर दिमाग वही सब फिल्म की तरह चला कि हमारी छेड़-छाड़ से हुई शुरुआत.. बिस्तर तक आ गई और इस तरह से कब हमारे सम्बन्ध चुदाई में बदल गए.. पता ही नहीं चला।

उन दिनों के कुछ किस्से भी याद आए कि कैसे मैं उसे छेड़ता था.. या वो खुद मुझे छेड़ती थी।
एक बार हम दोनों उसकी कार में घूमने भी गए थे, उस दिन उसने बहुत मस्त बैकलैस टॉप पहना हुआ था।

उस वक्त मैंने उसे देख कर ‘आह..’ भरी थी तो उसने मुस्कुरा कर मुझसे पूछा था कि कैसी लग रही हूँ, जिस पर मैंने उत्तर दिया था कि बहुत हॉट लग रही हो।

मेरे इस उत्तर पर बोली थी कि मेरी शादी ना हुई होती और बच्चे ना होते तो रोज ऐसे ही सजती संवरती।

इसी तरह की बातों के बाद बोली कि चलो वापस चलते हैं। मेरे कार में बैठते ही उसने कहा कि मेरे टॉप का फीता बांध दो ना।
मैंने कहा- आहह.. दिल तो टॉप ही उतारने का कर रहा है!

तो पलट कर बोली- चुप.. फीता बाँध दो.. और ये कहते हुए ही वो मुड़ गई थी।

मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरा और कहा- सोच लो घूमने जाना है कि रूम पर वापिस चलें?

कामिनी बोली- घूमने जाना है।

मैंने कहा- अगर मैं शरारत करूँ तो?

बोली- मुझे भरोसा है तुम पर!

मैंने फिर फीता पकड़ा.. थोड़ा पीठ पर हाथ फेरा और साइड से थोड़ा उसका बोबे को हल्का सा छुआ.. तो वो सिसक गई। फिर मैंने फीता बाँध दिया।

फीता बंधने के बाद घूम कर बोली- मुझे पता था.. कि तुम मेरा भरोसा नहीं तोड़ोगे।

मैंने कहा- मुश्किल से कंट्रोल किया मैंने!

इस पर वो हँसने लगी और बोली- कंट्रोल करो.. अभी कुछ नहीं होने वाला।  आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

मैंने कहा- अभी कुछ नहीं.. तो मतलब रात को पक्का!

तो वो शर्मा गई।

इस तरह के सीन आँखों के सामने चलते रहे।

एक दिन हम यूँ ही बातें कर रहे थे, तो कामिनी बोली- पता तुमको मैं क्यों पसंद करती हूँ?

मैंने बोला- बताओ?

बोली- तुम लड़की से बात करते समय उसका चेहरा देखते हो.. औरों के जैसे उसके बूब्स पर नहीं देखते हो।

मैंने कहा- अभी तो तुम्हारे देख कर करता हूँ।

तो हँस पड़ी.. और बोली- अब तो तुम प्यार करने लगे हो।

मैंने कहा- और तुम..?

तो वो चुप हो गई और रुक कर बोली- मुझे पता नहीं..!

मैंने कहा- अब मान भी लो ना!

तो बोली- मान कर खुद को और तुमको भी दोबारा दुख नहीं पहुँचा सकती।

मुझे उसकी वो बात याद थी कि वो मुझसे टुन्नी में कहती थी कि उसके मुँहबोले भाई के साथ मिलकर वो नशा करती थी और वो उसको ब्लू

फिल्म दिखा कर न जाने कितनी पोज़िशन्स में उसको चोदता था।

जब मैंने उससे कहा- उसको मना नहीं करती थीं।

तो बोलती थी- नहीं.. पता नहीं उस वक्त मुझे क्या हो जाता था।

मैंने कहा- सो डोंट यूँ एंजाय गेटिंग फक्ड?

तो कहती- मुझे नहीं पता कि इसे लड़कियाँ पसंद करती हैं या नहीं… मुझे इतना मालूम है कि वे जोर जबरदस्ती पसंद नहीं करती हैं।

मैंने कहा- आज फिर पूरी रात तुम्हारे साथ चुदाई करूँ?

तो कहती- पूरी रात.. इतना करोगे, तो मैं तो मर ही जाऊँगी.. मेरा तो इतना स्टॅमिना है ही नहीं।

मैंने कहा- ओके थोड़ी देर सही..

तो वो चुप होकर मुझे देखती रही। उसकी आँखें कुछ ऐसे कह रही थीं कि मन की बात ज़ुबान पे नहीं ला रही हो।

हमारी चुम्मा-चाटी शुरू हो चुकी थी, मैं ऑफिस में भी उसके साथ ये सब कभी भी कर लेता। जो लोग उसको या मुझे नहीं जानते थे, उन

देखने वालों को लगता था कि वो मेरी बीवी है।

एक बार मैंने उसे लिफ्ट में चूमा तो बहुत खुश हुई, कहती है कि मेरा ब्वॉयफ्रेंड भी ऐसे ही करता था.. तो मुझे गुस्सा आ गया, तब वो चुप हो जाती थी।

मुझसे कई बार गले लगने के बाद बोलती- तुम बहुत गर्म हो.. जिसके साथ शादी करोगे, वो बहुत लकी होगी।

मैंने कहता कि तुमसे ही करूँगा.. तो हंस देती और कहती कि जब तुम मेरी गर्दन के पास गरम साँसें लेते हो.. तो मुझे कुछ हो जाता है..

पागल हो जाती हूँ।

दोस्तो, कई बार लगता था कि इन सब बातों से वो मुझे उकसा रही थी.. कि मैं आगे बढूँ और उसको चोदूं।

खैर.. हमारा रिश्ता बन चुका था, अब आगे की कहानी पर आता हूँ।

उस रात के बाद अगले दिन जब हम मिले, तो वो थोड़ी उदास थी।

बोली- संजय कल जो हुआ, उससे बड़ा अजीब लग रहा है।

मैंने उसे गले से लगाया तो कहने लगी- नहीं नहीं.. दूर रहो।

मैंने कहा- यार अब तुम ऐसे कर रही हो तो मुझे गिल्टी फील हो रहा है।

कामिनी- नहीं.. तुम दोष मत लो.. हमने पी कर कंट्रोल खो दिया था।

मैंने फिर पूछा- सच्ची बताओ.. अच्छा नहीं लगा था?

बोली- पता नहीं..

इतना बोल कर मुझे देखा और फिर कस के मेरे गले से लग गई। मैंने भी उसको कसके अपनी बांहों में भींच लिया और उसको चूमने लगा।

बोली- हटो अब.. संजय ऐसा फिर से नहीं होगा ना..!

मैंने कहा- जैसा तुम चाहो.. लेकिन ग़लत क्या है.. तुम मुझसे प्यार करती हो, मैं भी!

वो इठला कर बोली- मिस्टर मैं अभी भी शादीशुदा हूँ.. अच्छा नहीं लगता यार!

मैंने कहा- ओके जब तुम्हें ठीक लगे, तब आगे बढ़ेंगे।

फिर उसने कहा- चलो कहीं चलते हैं।

हम दोनों घूमने गए और देर रात को वापिस आए.. तो ठंड हो रही थी। वो काँपने लगी. फिर खुद बाइक पर मुझसे चिपक गई और मेरी जाँघों

पर हाथ फेरने लगी।

उसके ऐसा करने से मैं बहुत गर्म हो गया.. फिर भी मैंने कंट्रोल किया।

फिर हमने खाना खाया ही था कि उसके भाई का कॉल आ गया कि उसने बताया वो इसी शहर में है.. उससे मिलने आया है, यह सुन कर वो

परेशान हो गई, वो झुंझला कर बोली- इसीलिए मैं इसका फोन ही नहीं उठा रही थी.. और अब यह यहाँ आ गया।

मैंने कहा- तो मिल लो..!

बोली- लेकिन यार वो तंग करेगा।

मैंने कहा- फिर मैं साथ चलता हूँ.. मैं सब संभाल लूँगा।

बोली- नहीं यार, फिर वो कहेगा कि अब इससे चुद रही है तू!

मैंने कहा- तुम पहले ही कह देना कि मैं तुम्हारी टीम में हूँ.. साथ में काम करते हैं।

तो बोली- हाँ देखती हूँ, अभी मैं जाती हूँ.. तुम थोड़ी देर में आ जाना।

मैं वहाँ पहुँचा तो देखा वो टेंशन में लेटी थी और उसका भाई दारू पीने में लगा था। मुझे देखकर उसने अच्छे से बात की।

कामिनी को लगा था कि कहीं मैं उसके भाई की पिटाई ना कर दूँ। उसके भाई ने मुझे भी दारू पिलाई और कामिनी को भी पैग बना कर दिया।

फिर थोड़ी देर के बाद मैं और कामिनी निकल पड़े.. मैंने कहा- कहाँ चलोगी?

कामिनी- तुम्हारे रूम पर ही चलती हूँ।

हम दोनों वहाँ गए..

वो बुझी हुई थी, बोली- साले ने मुझसे पैसे ले लिए और कह रहा था कि और पैसे चाहिए।

मैंने कहा- मत दो..

तो कहती- भाई है..

मैंने कहा- ऐसा कैसा भाई है यार?

वो उदास हो उठी थी।

मैंने उसके साथ बिस्तर पर लेट कर उसे गले लगा लिया।

फिर वो बोली- मैं बहुत थक गई हूँ।

मैंने कहा- यहीं सो जाओ।

वो लेट गई.. मैंने किस की तो वो हँसी और आँख मार दी। मैंने कमरा बंद कर दिया और उससे लिपट गया। थोड़ी देर बाद उसने मेरे हाथ पर

हाथ फिराना चालू किया। मैंने उसकी चुची दबाना चालू की।

वो मुझे कसके लिपट गई।

फिर हम दोनों ने चूमना चालू किया.. बहुत देर चूमते रहे। मैं उसकी चुची मसलता रहा.. उसकी टी-शर्ट ऊपर कर दी और ब्रा ऊपर करके

एक दूध चूसने लगा, वो मुझे अपने ऊपर दबाने लगी।

फिर चूमते-चूमते मैं नीचे आ गया.. उसकी पैंट निकालने लगा। वो रोकने लगी.. लेकिन थोड़ी देर में उतार दी। मैंने पैंट उतराते ही उसकी

पेंटी भी उतार दी।

वो ‘उहह ह्म..’ करने लगी।

मैंने उसकी टांगें खोलीं और उसकी चूत पर चूमा, तो उसने चूत पसार दी।

फिर मैंने अपने कपड़े उतारे, उसको चोदने लगा।

उसने पहले मना किया.. लेकिन फिर धक्के लगते रहे उम्म्ह… अहह… हय… याह… और वो मस्त होती रही।

मैंने थोड़ी देर बाद लंड निकाल कर उसकी चूत पर पानी छोड़ दिया। माल को एक कपड़े से साफ करके उससे लिपट गया।

वो रात को उठी.. थोड़ी उखड़ी हुई थी, उस वक्त बोली- मुझे अभी घर छोड़ कर आओ।

मैंने कहा- सुबह चली जाना।

बोली- नो.. अभी।

मैं उसको 3.30 बजे उसके घर छोड़ कर आया।

सुबह उसने उलाहना देते हुए कहा- हमने फिर हदें पार कर दीं।

मैंने कहा- तो क्या हुआ.. तुम मेरी हो।

वो कहती- नहीं.. जब तक डाइवोर्स नहीं होता.. तब तक नहीं हूँ।

मैंने कहा- हाँ.. ये सही बात है।

फिर अगले दिन ही ऑफिस में ही लिफ्ट के पास मैंने उसे चूम लिया। हम दोनों फिर से हँस कर बातें करने लगे।

फिर कुछ दिन सिर्फ़ चुम्मा-चाटी या बोबे दबाना चलता रहा। अचानक एक दिन लगा कि चुदाई न हो पाने के कारण वो कुछ उखड़ी सी है।

एक-दो बार ऐसा लगा कि अभी वो जानबूझ कर मुझे चिढ़ा रही है।

जैसे एक दिन क्या हुआ कि सुबह मैं उसको ऑफिस लेने के लिए पहुँचा और हॉर्न मारा.. उसकी मकान मालकिन ने उसको आवाज़ लगाई..

दरवाज़ा खुला था, वो अचानक से तौलिया में ही भाग कर बाहर बालकनी में आई और उसने न सुन पाने के लिए ‘सॉरी’ बोला।

मैंने नोटिस किया कि तौलिया से सिर्फ़ बोबे छुप रहे थे.. उसकी चूत नहीं।

उसने नीचे खुद को देखा और शर्मा कर कमरे में चली गई। फिर वो तैयार होकर नीचे आई और बाइक पर बैठ गई।

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