गुलाबी होठ वाली चूत की प्यास-2

हेल्लो दोस्तों कैसे है आप सब मै फिर लौट आया हूँ अपने अगले भाग के साथ .. अभी तक आप लोगो ने पढ़ा … ताजिया ने चुप्पी तोड़ी। इसमें चौंकने वाली क्या बात है… मैं भी अक्सर गैर मर्दों और औरतों से भी चुदवाती रहती हूँ… अगर तुम्हारी पहचान का कोई है तो उसे बुला ना!”ताज़ीन काफी खुली हुई और ज़िंदगी का मज़ा लेने वालों में थी। उसने काफी लण्ड खाये थे।.. और अब आगे …. जैनब के दरवाज़ा खोलते ही रधुराज उसपर टूट पड़ा। उसने जैनब को गोद में उठाया और उसके होंठों को चूसते हुए उसे अंदर बेडरूम में बिस्तर पर ले गया। जैनब ने सिर्फ़ एक गाऊन और ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहन रखे थे। वो रधुराज का ही इंतज़ार रही थी और पिछले पंद्रह दिनों से चुदाई ना करने की वजह से जल्दी में भी थी… चुदाई करवाने की जल्दी !
रधुराज ने उसे बिस्तर पर लिटाया और सीधे नीचे से उसके गाऊन में घुस गया। अब जैनब आहें भर रही थी… उसकी चूत पर तो जैसे चींटियाँ चल रही थीं उसे अपना गाऊन उठा हुआ दिख रहा था और वो रधुराज के सिर और हाथों के हिसाब से ऊपर नीचे हो रहा था। रधुराज ने उसकी चूत को अपने मुँह में दबा रखा था और उसकी जीभ ने जैनब की चूत में घमासान मचा दिया था। अचानक जैनब की गाँड ऊपर उठ गयी, और उसने अपने गाऊन को खींचा और अपने सिर पर से उसे निकाल कर फ़र्श पर फेंक दिया। उसकी टाँगें अब भी बेड से नीचे लटक रही थीं और उसके ऊँची हील के सैंडल वाले पैर भी फर्श तक नहीं पहुँच रहे थे। आप यह कहानी गुरु मस्ताराम डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | रधुराज बेड से नीचे बैठा हुआ उसकी चूत खा रहा था। जैनब उठ कर बैठ गयी और रधुराज ने अब उसकी चूत में उंगली घुसा दी – जैसे वो जैनब की चूत को खाली रहने ही नहीं देना चाहता था। साथ ही वो जैनब के मम्मों को बेतहाशा चूसने और चूमने लगा। जैनब की आँखें बंद थी और वो मज़े ले रही थी। उसकी गाँड रह-रह कर हिल जाती जैसे रधुराज की उंगली को अपनी चूत से खा जाना चाहती थी। फिर उसने रधुराज के मुँह को ऊपर उठाया और अपने होंठ रधुराज के होंठों पर रख दिये। उसे रधुराज के मुँह का स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था। उसकी ज़ुबान को अपने मुँह में दबाकर वो उसे चूसे जा रही थी। फिर रधुराज खड़ा हो गया। अब जैनब की बैठा थी। उसने बेड पर बैठे हुए ही रधुराज की बेल्ट उतारी। रधुराज की पैंट पर उसके लण्ड का उभार साफ़ नज़र आ रहा था। जैनब ने उस उभार को मुँह में ले लिया और पैंट की हुक और बटन खोल दी। फिर जैसे ही ज़िप खोली तो रधुराज की पैंट सीधे ज़मीन पर आ गिरी जिसे रधुराज ने अपने पैरों से निकाल कर दूर ढकेल दिया। रधुराज ने वी-कट वाली अंडरवीयर पहन रखी थी। जैनब ने उसकी अंडरवीयर नहीं निकाली। उसने रधुराज की अंडरवीयर के साइड में से अंदर हाथ डाल कर उसके लण्ड को अंडरवीयर के बाहर खींच लिया। फिर उसने हमेशा की तरह अपनी आँखें बंद की और लण्ड को अपने चेहरे पर सब जगह घुमाया फिराया और उसे अपनी नाक के पास ले जाकर अच्छी तरह सूँघने लगी। उसे रधुराज के लण्ड की महक मादक लग रही थी और वो मदहोश हुए जा रही थी। उसके चेहरे पर सब जगह रधुराज के लण्ड से निकाल रहा प्री-कम (पानी) लग रहा था। जैनब को ऐसा करना अच्छा लगता था। फिर उसने अपना मुँह खोला और लण्ड को अंदर ले लिया। फिर बाहर निकाला और अपने चेहरे पर एक बार फिर उसे घुमाया।

गुलाबी होठ वाली चूत की प्यास-1

जैनब ने अपने मुँह में काफी थूक भर लिया था और फिर उसने लण्ड के सुपाड़े पर से चमड़ी पीछे की और उसे मुँह में ले लिया। रधुराज का लण्ड जैनब के मुँह में था और जैनब अपनी जीभ में लपेट-लपेट कर उसे चूसे जा रही थी ऊपर से नीचे तक… सुपाड़े से जड़ तक! उसके होंठों से लेकर गले तक सिर्फ़ एक ही चीज़ थी… लण्ड! और वो मस्त हो चुकी थी… उसके एक हाथ की उंगलियाँ उसकी चूत पर थिरक रही थी और दूसरा हाथ रधुराज के लण्ड को पकड़ कर उसे मुँह में खींच रहा था। फिर जैनब ने रधुराज की गोटियों को खींचा जो कि इक्साइटमेंट की वजह से अंदर घुस गयी थी। अब गोटियाँ बाहर आ गयी थी और जैनब ने अपने मुँह से लण्ड को निकाला और उसे ऊपर कर दिया। फिर रधुराज की गोटियों को मुँह में लिया और बेतहाशा चूमने लगी।

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