पति के दो दोस्तों से कार में चुदवाई

प्रेषिका : मिस नूरिया
मुझे हिंदी में सेक्स स्टोरी पढना ज्यादा अच्छा लगता है. हिंदी में मैंने बहुत सी चीजो का अलग अलग नाम सुने जिसे सुनाने के बाद ही अजीब जा खुमार छाने लगता है. मैं बहुत समय से कहानियां पढ़ रही हूँ, सोचा कि आपको अपनी सच्ची कहानी सुना दूँ !
मैं एक 32 वर्ष की छरहरी महिला हूँ, मेरे पति भी लम्बे और स्मार्ट व्यक्ति हैं। वो एक प्राइवेट फर्म में काम करते हैं पर मैं उनकी एक आदत से परेशान हूँ- वो कोई भी दूसरी महिला को देखते ही लाइन मारने लगते हैं। मैं अकसर उनके कमीज और पैंट पर लिपस्टिक के निशान देखा करती, उनके अंडरवीयर में वीर्य के निशान दिखते !

इनके एक दोस्त हमारे घर आते जाते थे। एक दिन मैंने उनसे इनके बारे में पूछा तो वो कुछ नहीं बोले, पर मेरे बहुत जोर देने पर वो मान गए कि मेरे पति का बहुत सी महिलाओं के साथ सम्बन्ध है।
मेरे आँसू बहने लगे। वो मुझे सांत्वना देने लगे और कहा- अब बहुत देर हो चुकी है, इनका ठीक होना मुश्किल है, आप ही अपना मन कहीं और लगा लें !

तो मैंने कहा- अ़ब मुझे कौन मिलेगा !
वो बोले- देखे तो सही !
मैंने कहा- क्या आप तैयार होंगे ?
तो वो बोले- कल बात करते हैं !
मैं सोचने लगी- क्या यह ठीक है?

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पर कुछ अजीब सी बेचैनी होने लगी। दोपहर में उनका फोन आया और मुझे बाहर मिलने को बुलाया। हम कार में ही बात करने लगे और वो सौरी कहने लगे। मैं फिर से रोने लगी और रोते रोते उनके काँधे पर सर रख लिया। वो मुझे चुप करने लगे। अचानक उनका हाथ फिसल कर मेरे स्तन पर आ गया और मैंने उसे वहीं दबा दिया।
वो कहने लगे- आपका दिल तो बहुत जोर से चल रहा है !

मैं कुछ नहीं बोली और वो धीरे धीरे सहलाने लगे। मेरे मुँह से आह निकलने लगी। अ़ब वो दोनों हाथों से मेरे निपल चुभलाने लगे। मैं और जोर से आहें भरने लगी और मेरा हाथ उनके पैंट पर ऊपर से लंड को सहलाने लगा। उन्होंने अपनी पैंट की जिप खोल कर लंड मेरे हाथ में दे दिया। बहुत मोटा लंड था, मेरी मुट्ठी में नहीं आ रहा था। मैं खुद ही उस पर झुकती चली गई और उसे मुँह में भर कर चूसने लगी। वो भी मेरी चूची दबाते २ साड़ी को ऊपर उठा कर पैंटी के ऊपर से मेरी चूत सहलाने लगे। मेरी पैंटी पूरी भीगी हुई थी। उन्होंने उंगली मेरी चूत में घुसा दी और तेजी से अन्दर बाहर करने लगे। मैं उनका लंड दांतों से काटने लगी। वो भी आहें भरने लगे। मेरी जीभ उनके सुपारे पर तेजी से चलने लगी। उन्होंने भी तीन उंगली मेरी चूत में पेल दी और मुझे चूत से पकड़ कर ऊपर उठा दिया।

मेरा एक के बाद एक तीन बार पानी झर चुका था जो उसकी हथेली से नीचे बह रहा था। अचानक वो जोर जोर से लंड मेरे मुँह में पेलने लगा और बोला- अपना मुँह हटा लो ! मैं छुटने वाला हूँ !
पर मैंने उसका लंड और जोर से भींच लिया। उसने एक हाथ से मेरा सर अपने लंड दबा दिया और आहें भरते हुए मेरे मुँह में पानी छोड़ दिया। मैं उठ कर अपना मुँह टिशु-पेपर से साफ करने लगी पर वो मेरे होंठ उपने मुँह में लेकर चूसने लगा। तभी एक कार के हॉर्न ने हमें चौंका दिया।

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वो गाडी जस्ट हमारे सामने आके रुकी और फिर मैंने देखा की उसमे मेरे पति के दुसरे दोस्त थे जिनका नाम अरविन्द था जो की मुस्कुराते हुए गाड़ी के पास आने लगे मेरे तो दिलो की धड़कने बढ़ने लगी मुझे समझ नहीं आ रहा था मेरी तो आवाज भी बंद हो गई थी. वो आकर गाड़ी का दरवाजा खोल पिचेबैथ गये. मैंने अखिलेश को पूछा यार अब ये कहा से आ गए तो अरविन्द ने बताया भाभीजी ये हमारा प्लान था जब आपका पति हमारी बीवियों को चोद सकता है तो हमारा भी आप पर पूरा हक़ बनता है हम आपको कैसे छोड़ सकते है. इतना कहकर अखिलेश गाड़ी चलाने लगा और गाड़ी कही सुमसान इलाके में झाड़ियो में लेकर गया. दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

कार के रुकते ही अखिलेश ने मुझे अपने साथ पीछे वाली सीट पर ले गया और मुझे बिच में बिठा दिया और खुद किनारे अब मेरे दोनों साइड मेरे पति के दोनों दोस्त थे. जो की दोनों ने पहले मेरे बढ़ी हुई धडकनों को शांत करने के लिए मुझे किस किया बोबे को सहलाया और फिर मेरे बूब्स को कपडे से आज़ाद कर उसके साथ खूब खेले मई भी अब पूरी तरह से गर्म हो गई और चूत गीली होने लगी फिर एक एक कर दोनों ने मुझे दो दो बार चोदा और मजे लेने के बाद अखिलेश ने मुझे मेरे घर पहुचकर किसी को न बताने की धमकी दी.

उन्हें समझा भी नहीं की उन दोनों से ज्यादा तो मैंने इस सेक्स को एन्जॉय किया साला पति का लवड़ा कुछ नहीं उन दोनों के आगे. उन दोनों से चुदकर मुझे जन्नत मिल गया.

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