हर कोई यह किसी को चोदता या चुदवाता- 1

विपीन की शादी हुए 1१/२ (डेढ़) साल हो चुके थे . भारती नाम है उसकी बीबी का . विपीन का गारमेंट बनाने की फैक्ट्री है . उसके कारखाने मे बनाये हुए लेडीज़ नाईटी बहुत पोपुलर है . काफी सेक्सी नाईटी बनाता है . कभी कभी अपनी फैक्ट्री की बनी हुई नाईटी को और काट छांट कर अपनी बीबी भारती के लिए घर ले कर आ जाता था . भारती के गोरे और सुंदर बदन पर यह नाईटी काफी सेक्सी लगाती थी . उसके बदन पर नाईटी से ज्यादा उसका बदन झलकता था . विपीन भी चाहता था की भारती जब रात को रूम मे आए तो उसके मखमली बदन को देखने के लिए ज्यादा तडपना न पड़े . उसकी गोरी चिट्टी चुचिया उसकी नाईटी से झलक पड़ती थी .

उसे देखकर विपीन का लंड फन फना जाता था..और लंड उसके बदन से नाईटी के उतरने का इंतज़ार करता था. विपीन कभी भी कंडोम नही लगाता था और इसीलिये सुहागरात को ही भारती गर्भवती हो गई थी…उसके बाद उसे मासिक ही नही हुआ.भारती प्रेगनेंट है और उसकी डिलिवरी का टाइम आ चुका था . भारती ने अपने पीहर फ़ोन करके अपनी चचेरी बहन पार्वती को बुलवाया था . पार्वती अपनी एक और बहन नम्रता के साथ अपने जीजी के घर पर आती है . नम्रता को पेंटिंग करना पसंद था . वोह अपनी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगवाना चाहती थी इसीलिये पार्वती के साथ मुम्बई चली आई .

नम्रता एक कुशल डांसर भी थी . कॉलेज के फंक्शन मे जब वोह डान्स करती थी तो कई मनचलों के दिल की धड़कन बढ़ जाया करती थी .पार्वती जब पिछली बार एक साल पहले जब अपने जीजी के घर आई थी तब भारती , विपीन और पार्वती काफी हँसी मज़ाक कर के अपना टाइम पास कर लिया करते थे . पार्वती अपने जीजा जी के काफी क़रीब हो गई थी . हालांकि उनके शारीरिक सम्बन्ध नहीं बने थे लेकिन अपनी जीजी के सामने विपीन से काफी लिपट चिपट कर रहती थी . आलिंगन और चुम्बन तक ही सम्बन्ध कायम हो पाए थे . और भारती भी उसे बुरा नही मानती थी .कहती थी की जीजा और साली के बीच मे यह सब चलता है .भारती , पार्वती और नम्रता आपस मे चचेरी बहने थी . उनकी उम्र मे ज्यादा फरक नही था .

तीनो काफी गोरी और सेक्सी बदन की मलिक थी . तीनो मे कौन ज्यादा खूबसूरत है यह कहना काफी मुश्किल था .जब शाम को विपीन घर आया तो उसे बेडरूम से काफी आवाजे और हंसाने की आवाजे सुने दी . वोह समझ गया की पार्वती आ गई है . उसका मन हिचकोले खाने लगा . क्यों नही आख़िर उसकी सबसे सेक्सी साली जो थी .वैसे भी पिछले तीन महीने से उसके लंड को चूत नही मिली थी और उसे पूरा भरोसा था की इस बार वो पार्वती की चूत चोद लेगा वोह जैसे ही रूम मे घुसा तो देखता है की उसकी साली एक नही दो -दो सालिया भारती के साथ बेड पर बैठ कर उसके द्वारा लायी गई नाईटयों को देख रही है .

विपीन सीधा पार्वती के पीछे जाकर उसकी आंखों को अपने हाथों से बंद कर अपने से चिपका लिया ..ऐसे ही उसका लंड भी खड़ा हो रहा था और वो पार्वती के पीठ पर तुका दिया था उसने पैंट के अन्दर से..पार्वती कहने लगी , “अरे क्या जीजा जी , बड़ी देर करदी घर आने मे . आपको तो मालूम था की हम लोग आज ही आने वाले है फिर भी देर से आए हो .”विपीन ने पलट -ते हुए जबाब दिया , “सॉरी my डार्लिंग . थोड़ा ऑफिस मे काम आगया था इसलिए लेट हो गई . चलो अब हमे माफ़ कर दो .”और अपने लंड को अभी भी उसके पीठ से चिपकाये रखा..पार्वती भी थोड़ा पीछे झुक कर उसे और दबा रही थी .लंड झटके मार रहा था.

पार्वती ने विपीन के हाथों को अपने हाथों मे लेते हुए कहा , “चलो जाओ माफ़ किया . लेकिन आपको भी हमारी जीजी का ध्यान रखना चाहिए . इस हाल मे ज्यादा अकेले नही छोड़ना चाहिए .”तभी नम्रता बोल पड़ी , “हम भी है इस महफ़िल मे .”विपीन नम्रता की तरफ़ आँख मरते हुए कहा , “अब तुम्हारी जीजी को तो क्या , तुम दोनों को भी अकेले नही छोडूंगा .”फिर विपीन नम्रता को थोड़ा खिसका कर वहीँ बेड पर ही अपने लिए जगह बाना कर बोला , “क्या बात है ?नाईटियों की प्रदर्शनी लगा रखी है .”पार्वती ने एक नाईटी को उठाकर उसके बीच मे से झांकते हुए बोली ,” नही जीजा जी . हम सब तो यह देख रहे थे की इन नाईटियों को पहनने के बाद बदन पर नाईटी दीखती है या हमारा बदन .”नम्रता आंख मारते हुए बोली , “जीजा जी बड़ी सेक्सी नाईटी डिज़ाइन करते हो . पुरा बदन उघाड़ कर रख देती है यह नाइटिया .

“विपीन भी हाजिर -जवाब था . तुरंत बोल पड़ा ,
“जाओ इन्हे पहनकर आओ . हम भी जरा देखें की हमारी नाईटी ज्यादा सेक्सी है या तुम्हारा बदन .”इसी तरह उनके बीच हँसी मज़ाक चल रहा था . तभी एक जोक्स के बीच भारती को ज्यादा ही हँसी छुट गई . ज्यादा हंसने से उसके दरद उठाने लगा . सो फोरुं भारती को ले कर वोह तीनो हॉस्पिटल रवाना हो गए . और आधे घंटे के बाद नर्स ने एक लड़के के जनम लेने की बधाई उनको दी . विपीन , पार्वती और नम्रता तीनो ही लड़के के जनम पर काफी खुश हुए . और एक दुसरे को बधाईयाँ दी . फिर Dr. की इज़ाज़त ले कर अन्दर जा कर भारती को भी बधाई दी . रात को रुकने के नाम पर पहले तो Dr. ने साफ मना कर दिया पर ज्यादा जोर देने पर Dr. ने कहा , “चलो आज रात तो एक जन रुक सकता है लेकिन कल किसी को रुकने की इज़ाज़त नही दूँगी . आख़िर हमारी नर्सें है जच्चा और बच्चा की देखभाल के लिए .

“एक रात के लिए हाँ भरने पर पार्वती ने वहीँ रुकने का इरादा बताया..असाल मे उसे लगा की नम्रता उसे रुकने नही देगी और ख़ुद रुकेगी..वो जीजा जी के साथ घर जायेगी..और फ़िर जीजा जी ने उस दिन जो लंड उसकी पीठ मे लगाया था उसे आज अपने मुह मे और चूत मे लेगी…लेकिन नम्रता ने कुछ नही कहा..इसलिए पार्वती को ही रुकना पड़ा . विपीन पार्वती को वहीँ रुकते देख थोड़ा मायूस हुवा क्योंकि वोह आज रात पार्वती के साथ सेलेब्राते करने का प्लान बना रहा था . लेकिन कुछ न कहकर नम्रता को लेकर वापस घर की तरफ़ चल पड़ा . घर के नीचे नम्रता को छोड़ उस -से कहा की मई आधे घंटे मे आता हूँ .विपीन आधे घंटे बाद एक व्हिस्की की बोतल और एक शेम्पन की बोतल ले कर घर पर आ गया . डुप्लिकेट चाबी से दरवाज़ा खोल नम्रता को आवाज दी .

नम्रता उस समय बाथरूम मे थी . बाथरूम से वापस जवाब दिया , “जीजा जी बाथरूम मे नहा रही हूँ . पंद्रह -बीस मिनट मे आती हूँ .”विपीन नम्रता को बाथरूम मे देख हॉल मे व्हिस्की की बोतल बर्फ और ग्लास लेकर सोफा पर ही पसर गया . साथ ही VCD प्लेयर चालू कर इरोटिक डान्स की एक CD चालू कर दी . CD मे इंग्लिश धुन के साथ कई लडकिया आधी से ज्यादा नंगी हो कर नाच रही थी . विपीन भी इंग्लिश धुन के साथ बैठा बैठा झूम रहा था . उसकी भूखी आंखें उन गोरी लड़कियों के बदन पर जमी हुयी थी . उन नाचती गोरी हसीनो के मम्मे उनके कपड़े से बाहर आने को बैचेन थे . अपनी गोरी -गोरी झंघें फैला कर अपनी छुपी हुयी चूत का इजहार कर रही थी . विपीन की आँखें उनकी जांघों के बीच चिपकी हुयी थी .

उसका भूखा लंड भी उनको नंगा देख बैचेनी से अन्दर ही अन्दर मचल रहा था . बूखा तो होना ही था कारन की Dr. ने भारती के साथ सोने से फिछले तीन महीने से ना कर रखा था जो .जब तक नम्रता बाथरूम से आई तब तक विपीन दो पैग चढ़ चुका था . उसके आँखों मे व्हिस्की का सुरूर चढ़ाने लग गया था . नम्रता ने अपनी जीजी भारती की एक नाईटी निकल कर पहन ली . जब कांच से अपने बदन को देखा तो कुछ झेम्प सी गई . बदन पर नाईटी तो थी फिर भी पुरा बदन साफ दिखाई दे रहा था . कांच मे अपने बदन को गौर से देखने लगी . अपने दोनों हाथों से अपने चुन्चियों को सहलाने लगी और अपनी निपल को चुटकी में भर कर दबाने लगी . रूम मे बैठकर चारो जब हँसी मज़ाक कर रहे थे तभी से ही उसकी चूत मे खलबली मची हुई थी .

नॉन -वेग . जोक्स से पुरे बदन मे स्त्री और पुरूष के सम्बन्ध की विवेचना चल रही थी . साथ मे जीजा जी का बारबार उसके गालों पर चुम्बन उसको वासना की आग मे जला रहा था . मन ही मन जीजा जी के पसंद के दाद देने लगी . फिर भी उसने उसके ऊपर एक झीना गाऊन और पहन लिया .विपीन ने कहा कुछ नही . आओ बैठो . नम्रता वहीँ खड़ी खड़ी बोली , “अकेले ही पियोगे या हमे भी कुछ चखने दोगे .”विपीन ने अपनी ग्लास को नम्रता के चहरे के नजदीक ला कर उसके मदमस्त होंठों से लगा दिया . नम्रता एक साँस मे ग्लास मे जितना था (आधे पैग से भी ज्यादा ) गटक लिया और लगी खांसने . अपना मुहं बिगाड़ते हुए बोली , “उफ़ , कैसी कड़वी है यह शराब .”विपीन हंसने लगा .

फिर नम्रता को अपने क़रीब खींच कर उसके होंठों पर पड़ी शराब की कुछ बूंदों को चाट लिया और बोला , “हमे तो कड़वी नही लगाती . लगता है पहली बार टेस्ट कर रही हो .”नम्रता की उखड़ी साँस थोड़ी शांत हुयी तब बोली , “हा , पहली बार पी रही हूँ . इससे पहले एक दो बार बियर जरूर पी है .” फिर TV पर डान्स देखने लगी . विपीन ने भी नम्रता को अपने पास सोफा पर बैठाकर एक -दो घूंट और पिला दिया . नशा जब हल्का हल्का चढ़ाने लगा तो नम्रता बोली , “क्या ऐसा डान्स देख रहे हो . इससे अच्छा तो मे नाच सकती हूँ .”विपीन ने पहले सोचा की सायद नशा होने की वजह से वोह बोल रही होगी . लेकिन दूसरी बार कहने पर उसने TV बंद कर दिया और बोला , “तो दिखाओ मेरी जान .

हम भी देखें तुम कितना अच्छा नाच सकती हो .”चल्लेंज मान कर नम्रता ने एक ऑडियो CD लगा कर नाचना चालू कर दिया . ऑडियो CD रीमिक्स सोंग्स की थी . और पहला गाना ही “कांटा लगा ” था . नम्रता कांटा लगा की धुन पर नाचने लगी . इसी बीच जो झीना गाऊन पहने हुए थी उसे निकाल कर विपीन की और उछाल फेंका . विपीन की साँसे ये सुब देख कर भारी हो उठी . उसके पुरे शरीर मे वासना की लहरे हिलोरे मार रही थी . लंड उत्तेजना से पागल हो रहा था . पुरे बदन मे लहू सन -सन -सन करके दौड़ रहा था .

अपने लंड को किसी तरह से उसने दबा रखा था..नम्रता का बदन कहीँ से भी स्थिर नही था . उसका जलवा अपने पुरे उफान पर था . कभी नजदीक आकर तो कभी दूर से ही विपीन को अपने बदन की नुमाइश कर के उकसा रही थी . शराब और शबाब अपने पुरी रवानी पर था . पूरे हॉल मे जोर जोर से उठ बैठ रही सांसे म्यूजिक से ताल से ताल मिला रही थी . नम्रता धून के साथ अपनी ताल मेल बैठा कर विपीन को बेकाबू करने मे लगी थी . विपीन भी बेकाबू हो कर अपने सूख रहे होंठों पर जीभ बार बार सहला रहा था .

नम्रता की भरी भरी छातियां उछल उछल कर विपीन को आमंत्रण दे रही थी की आओ मुझे दबोच लो . उसकी मस्त जंघे हठी की सूंड की तरह झूम रही थी . कभी फैला कर तो कभी सिकोड़ कर अपनी चूत को दिखा और छुपा रही थी . पीछे घूम कर अपने चूतड मटका मटका कर नाच कर विपीन के लंड को उसने शायद एक इंच ज्यादा लंबा कर दिया और मोती की तो बात ही क्या थी.वह बेकाबू हो चुका था..तभी विपीन सोफे से उठकर नम्रता के पास जा ही रहा था की नम्रता ने उसको वापस धकेल कर सोफे पर वापस बैठा दिया और अपने चूतड को उसकी गोद पर रख कर उसके लंड को रगड़ने लगी .लंड इस रगड़ाई से एकदम बौखला गया . विपीन के बदन का सारा लहू मनो इस वक्त उसके लौडे मे समाया हुआ था .

उसने अपने दोनों हाथों से नम्रता के कबूतरों को जकड लिया . भारी -भारी दोनों उरोज विपीन के हाथों मे भी नही समां रहे थे . चिकनी नाईटी की वजह से दोनों कबूतरों पर से उसके हाथ फिसल रहे थे . नम्रता के कबूतर शिकारी को इतना नजदीक देख कर फड़फडाने लगे . वोह अपने सीने को अपने कंधे पीछे की और करके आगे तान रही थी . जिससे उसके भरपूर मस्त उरोज और आगे आकर इस समा को और रंगीन बना रहे थे . विपीन ने पागल होते हुए उसकी नाईटी को उरोजो के सामने से पकड़ कर फाड़ दिया और उसके चुंचियों को को अपने हाथो मे लेकर तौलने लगा .

फिर उसके दोनों घुन्डियों को अंगुली के बीच मे लेकर जोर से मसल दिया .हॉल मे पहुँची तो उसकी आग और बढ़ गई . TV मे मादक धुन के साथ नाच रही इंग्लिश मेमो को अपने बदन पर से बचे खुचे कपडे उतार कर फेंकते हुए देख उसके दिल की धड़कन और बढ़ गई . ख़ुद एक अच्छी डांसर तो वोह थी ही . पीछे से आकर अपना चेहरा जीजा जी के गाल से चिपका कर बोली , “बोलो क्या बोल रहे थे .”नम्रता के मुँह से सिस्कारी निकल गई . “उई.ई.ई.ई.i माँ आ.अ.अ.आ….स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्. धीरे से .”विपीन अब आराम से उसकी चुचियो को सहलाने लगा . नम्रता अपने चूतड की रगड़ाई चालू रखी थी . विपीन के लंड को काफी दिनों बाद चूत की महक मिल रही थी .

फिर यह तो साली की चूत . नशा शराब के साथ शबाब का डबल हो रहा था . उसके नशीले बदन को अपनी बाँहों मे समेट कर इस रगड़ाई को रोक कर अपनी अनियंत्रित हो रही सांसों को समेटने मे लगा . नम्रता के शरीर को सामने कर उसके रसीले होंठों को चूमने लगा . उसके होंठों के रस को पीकर वोह और मतवाला हो गया . नम्रता के गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नाजुक होंठों को अपने होंठों से दबाने लगा . अपनी जीभ को नम्रता की जीभ से टकरा रहा था .

दोनों की जीभें पेंच लड़ा रही थी और हाथ उसके दोनों कबूतरों को अपने मे समाते हुए धीरे धीरे मसल रहे थे और नम्रता के मुह से आह्ह..ओह्ह..उफ़..स्.स्.स्.स्.स्…जीजा जी ..आई..ल व ..यु…ओओओह..जैसी मादक सिस्कारी निकल रही थी.विपीन होठों से अपने होठों को छुड़ा कर अपनी जीभ को नम्रता के चुंचियों की तरफ़ ले आया . “उफ़ क्या क़यामत है ,” ऐसे कहते हुए अपनी जीभ से उसकी गुलाबी चूचियों को चाटने लगा . अपनी साली की चुचिया अपनी इतनी नजदीक देख विपीन और पागल होने लगा . उसके होंठों को अमृत का स्वाद मिल रहा था .

अपनी गीली जीभ से उप्पेर से नीचे और नीचे से उप्पेर उसके स्तनों और घुन्डियों को चाटने में लग गया . कभी कभी गोल गोल जीभ फिराने लगा..घुन्ड़ियां सख्त होने लगी और उसके ठोस स्तन पर से उसकी जीभ बार बार फिसलने लगी. फिर अपनी अन्गूलियो से निपल को पकड़ लिया और लगा मसलने नम्रता के सिस्करियो की आवाजे तेज होने लगी..आह्ह्ह.. उफ़..श श श .स्..स्…स्..ई..ईई.ई.इईई…जीजा जी …और करो..अच्छा..लग..रहा..है…ऊह्ह माँ..नम्रता के मुह से सिस्कारी निकल रही थी . उसके दोनों उरोज भरी हो चुके थे . उसकी सांसे जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगी . “और जोर जोर से मेरी चूची .. को.. मसलों.,. बहुत.. मज़ा.. आ. .रहा.. है… तुम्हारे.. हाथ… मे.. जादू. ..है…. इधर… तुम… मेरी.. चूची.. को.. दबा.. रहे.. हो. और…. उधर… मेरी चूत पानी छोड़ रही है ,” नम्रता बेकाबू हो कर बड़बडाने लगी और वो विपीन के लंड के ऊपर कसमसाने लगी थी..दोनों निपल कड़क हो कर विपीन के मुह मे जाने को उतावले थे .

फिर बेकाबू हो कर चीख पड़ी , “Suck it. Take it in your mouth. मेरे निपल को अपने होंठों से दबाव .”विपीन ने भी अपने होंठों के बीच उसके निपल को दबा के चूसना शुरू किया नम्रता ने उसका सर अपने चुंचियों पर जोर से दबाया और उफ्फ्फ्फ़….हाँ..जीजा जी ..ऐसे..हीई..ऐसे ही चुसो ओ ओ..उसने अपनी चूचियों को उसके मुँह मे ठूंस दिया …”येस … येस… जीजा जी …. ऐसे ही चुसो ….देखो मेरे निपल्स की खुजली मिटा दो ,” नम्रता अपनी चाहत छुपा नही पायी . “उउउफ्फ्फ़ … आ … ह्ह्ह … आ आ . .. ह .ह.ह.ह.ह. प्लीज़ थोड़ा धीरे … काटो …ना … ऊ ..उ उ ई ई और जोर से चूसो मेरे चुंचियों को .”दोनों निपल्स को बारी -बारी से अपने मुह मे लेकर चूसने के बाद विपीन खड़ा होकर नम्रता को अपनी बाँहों मे लेकर उसके पुरे बदन को जकड लिया . ऐसा कस कर आलिंगन किया की नम्रता के मुह से चीख निकल पड़ी .
नम्रता का बदन विपीन की बाँहों में समा गया . विपीन उसके जिस्म को अपनी बाँहों में लेकर दबाने लगा . उसके बदन को अपने बदन से रगड़ने लगा . अपने गालों से नम्रता के चिकने गालों को , अपने मजबूत सीने से उसके कड़क कबूतरों को , अपने लंड से उसकी छुपी हुयी चूत को और अपनी जांघों से उसकी चिकनी जांघों को रगड़ कर दोनों एक -दुसरे की बाँहों में झुमने लगे .”जब तुम्हारी चुन्ची इतनी खूबसूरत है तो चूत तो और भी खूबसूरत होगी ,” कहकर विपीन उसके बदन पर लिपटी नाईटी के बाकी हिस्से को भी फाड़ने लगा .लेकिन नम्रता उसको रोकते हुए कहा , “उफ्फ्फ … इतने बेकाबू क्यों हो रहे हो . पहले मुझे अपना झुन झुना तो दिखाओ . मुझे भी उससे खेलना है .

“विपीन बेकाबू था लेकिन नम्रता वापस बोल पड़ी , “तुम अपना लंड मुझे दिखाओ मै तुम्हे अपनी चूत दिखा दूंगी .”नम्रता ने अपने हाथ को बढ़ाकर विपीन की पैंट टटोलने मे लग गई . उसे अपना खिलौना चाहिए था . उसका खिलौना भूखे शेर की तरह अपने पिंजडे मे उछल कूद मचा रहा था . नम्रता का हाथ उस पिंजडे की तरफ़ बढ़ कर उसके पहले ताले यानि पैंट की चैन को खोल दिया . विपीन ने उसके दोनों कबूतरों को सहलाते हुए अपनी पैंट को नीचे की और खिसका दिया ताकी लंड को बाहर निकालने मे ज्यादा परेशानी ना हो
फिर नम्रता घुटने के बल बैठकर अंडविपीन यर की कैद मे बैठे उस भूखे शेर की दहाड़ सुनने लग गई . उसका फूला हुआ लंड अंडविपीन यर मे मचल रहा था . अंडविपीन यर तम्बू बन चुका था .

नम्रता ने अपने हाथो से उसको पुचकार कर शांत करने की कोशिश की . जब लंड ज्यादा ही मचलने लगा तो अपने होंठों से विपीन के लौडे को अंडविपीन यर के साथ ही दबा लिया . अब बारी थी विपीन के सिस्कारने की . तीन महीने मे Dr. के ना करने के कारण वोह अपनी बीबी , भारती , को चोद नही पाया था लेकिन यदा -कदा भारती अपने हाथ से विपीन के लंड को मसल जरूर देती थी .नम्रता उसके लंड को अंडविपीन यर के ऊपर से चाटने लगी और बोल उठी..”जीजा जी ..क्या मस्त खिलौना है..कितना लंबा और मोटा…मेरी चूत को फाड़ डालोगे आज..लगता है..कुंवारी साली की चूत है..जरा प्यार से करना प्लीज़..”लंड फूल कर एक दम भड़क उठा “कुंवारी चूत छोड़ने के ख़्याल से ही विपीन जोश मे आ गया.. तभी नम्रता ने झटके से अंडविपीन यर खींच कर नीचे खिसका दिया .

विपीन का लंड एक दम तन कर नम्रता के मुह के सामने नाचने लगा . “उफ़ … क्या मोटा लंड है तुम्हारा जीजा जी ,” कह कर अपने हाथों मे समेट लिया नम्रता ने .लेकिन लंड पुरा का पुरा हाथों मे आया कहाँ था . मोटे के साथ साथ पुरा 8 ” का लंड था विपीन का ..लंड का सुपाडा भुक्कड़ की तरह नम्रता का चेहरा देख रहा था . नम्रता ने लंड को अपने हाथों मे लेकर उसकी चमडी को ऊपर -नीचे करने लगी . “सच मुच तुम्हारा लंड तो बहुत लंबा और मोटा है ,” नम्रता के मुह से निकल पड़ा . विपीन से अब रहा नही जा रहा था .नम्रता ने अपनी जीभ निकाल कर लंड के सुपाडे को धीरे -धीरे चाटने लगी .

विपीन का लंड उचक -उचक कर उछल रहा था . तोधी देर तक नम्रता उसके सुपाडे को ही चाट रही थी . विपीन और ज्यादा बेकाबू होने लगा . उससे रहा नही जा रहा था . वोह कांपते हुए स्वर मे बोला , “अरीए , मेरी साली , अब तो “सताना ” बंद करो . मेरे लंड को चूसोलेकिन नम्रता ने सुपाडे को चाटना नही छोड़ा . वोह विपीन को और भड़काना चाहती थी . सच तो ये था की विपीन का सोलोना लंड उसे भा गया था..और उसे आज अपनी सील अपने जीजा से ही तुड्वाना था..और उसे मालूम था की मर्द जब ज्यादा भड़कता है तो औरत की चुदाई भी उतनी ही ज्यादा और अच्छे से करता है.. नम्रता अपनी चूत की चुदवाई बहुत जोर से करवाना चाहती थी अभी तक उसके बॉय फ्रेंड ने ऊपर ऊपर से सब किया था क्युकी कभी पूरी चुदाई का मौका ही नही मिलता था..वो कसार आज पूरी करनी थी..पर यहाँ तो विपीन का लंड भड़कता ही जा रहा था .

उसने नम्रता को कहा , “साली मादरचोद , चूस मेरे लंड को . पुरा का पुरा खा जा मेरे लंड को . साली यह लंड तीन महीने से तरस रहा है और तुझे सताने की पड़ी है . अगर नही चूसती तो मे तेरी चूत को ऐसा चोदुन्गा की तू भी जिन्दंगी भर याद रखेगी .”नम्रता का मकसद पुरा हो गया . वोह विपीन को ऐसे ही भड़काना चाहती थी . तभी विपीन ने उसके बाल पकड़ कर अपना पुरा 8 इन्ची लंड उसके मुह मे गप से डाल दिया . “ले छिनाल चूस मेरे लंड को . बहुत ज्यादा मटक रही थी ना . अब चूस मेरे लंड को .”विपीन का लंड 6 इंच तक ही नम्रता के मुह मे घुस पाया . बाकी दो इंच बाहर ही रहा . उसके लंड का किनारा उसके मुह की आखिरी दीवार को छू गया था .

नम्रता को साँस लेने मे तकलीफ होने लगी थी . उसने विपीन के लंड को पुरा बाहर निकाल कर कहा , “जीजा जी , मार ही डालोगे क्या . थोड़ा सब्र करो . चूसती हु तुम्हारे मूसल को .”फिर नम्रता ने लंड को हाथ से पकड़ कर जो चूसाई की विपीन तो पागल हो गया . उसे लगा अगर मेने अपने लंड को बाहर नही निकला तो मेरी पिचकारी अभी छूट जायेगी . उसने अपना लंड बाहर निकल कर नम्रता को खड़ी कर अपनी बाँहों मे उठा लिया और उसके होंठों को चूमते हुए अपने बेडरूम की और चल पड़ा . बेडरूम मे बेड पर नम्रता को सुलाते हुए उसकी नाईटी के बाकी कपड़े को फाड़ते हुए उसकी जांघों को चाटने लगा . न

म्रता की गुदाज़ जांघे मखमल की तरह नरम और दूध जैसी गोरी थी . विपीन उन जांघों को चूसते हुए अपने हाथो को उसकी झाँटो को सहलाने लगा . क्या रानी तुम अपनी झाँटे साफ नही करती..लेकिन मुझे पसंद है कुंवारी चूत पर नरम झाँटे ..उफ़ क्या नरम नरम झाँटे थी . विपीन तो झाँटो मसलते हुए उसकी उठी हुई बुर (चूत ) को देख पागल हो गया .एक दम गीली लेकिन गुलाबी.. अपनी उंगली को धस से उसकी कोमल अनचुदी चूत मे धकेल दिया बोहोत टाईट चूत थी..इतनी गीली होने के बाद भी थोड़ी सी ऊँगली अन्दर घुसी..और … नम्रता के मुह से निकल पड़ा , “ऊईई माँ..आह्ह..दर्द होता है जीजा जी .. . धीरे से .

“विपीन उसकी जांघों को छोड़ उसकी चूत के आस -पास अपनी जीभ से चाट रहा था और अपनी एक उंगली को उसकी चूत मे डाल कर अन्दर बाहर करने लगा वो उसके कुंवारी चूत को थोड़ा अभ्यस्त कर रहा था और चूत की उंगली -चुदाई कर रहा था . थोड़ी देर मे ही नम्रता बोल पड़ी , “हाय ! क्यों टाइम बर्बाद कर रहे हो ? मेरे चूत को उंगली नहीं चाहिए . अभी तुम इसको अपने जीभ से छोड़ो . बाद मे उसको अपने लंड से फाड़ दो . वोह तुम्हारे लंड को खाने के लिए तरस रही है .”तभी विपीन ने अपनी उंगली निकाल कर उसकी जगह अपनी जीभ को लगा दिया . उसके दाने को चूस कर अपनी जीभ को उसकी चूत की गहराई मे उतार दिया गई…ई.ई.ई.ई.ई.इमेरी चूत.. विपीन का लंड फर्र र र र करके उसकी चूत मे जा कर फंस गया . इसी के साथ नम्रता के मुह से फ़िर से चीख निकल पड़ी .

यह चीख दर्द भरी भी थी और साथ ही आनंद से भरी भी थी ..विपीन के लंड से बहकर खून नीचे चादर पर टपक रहा था…इसी बेड पर उसने पार्वती की भी सील तोडी थी अआज वो पार्वती की सील तोडना चाहता था..लेकिन नम्रता मिल गई..थोड़ी देर के बाद नम्रता विपीन के ऊपर बैठ कर अपनी चूत की खाज मिटने लग गई . अपनी चूत की जकड मे लंड को ले कर उछल -कूद मचने लगी . साथ ही उसके मुह से सिस्कारियां निकल रही थी . विपीन अपने हाथो से उसके चुन्ची पकड़ कर सहला रहा था . नम्रता उसकी छाती पर हाथ रख कर अपनी चूत ख़ुद ही चुदवा रही थी .

आनंद से मदहोश हो कर चुद्वा रही थी . स्पीड धीरे -धीरे बढ़ कर अपनी चरम भारती पर चली गई . फुल फास्ट स्पीड मे चुदवाने से नम्रता की सिस्कारी बड़बड़ाहट मे बदलने लगी .”येस .. येस .. क्या मजा आ रहा है .. येस .. येस .. आज पहली बार चूत को मजा मिल रहा है .. ओह्ह .. क्या जन्नत का मजा मिल रहा है .. उफ्फ्फ .. जीजा जी तुम्हारा लंड लाखों मे एक है एक दम लोहे के जैसा सख्त है … उफ़ … मेरी चूत … ह आ ई … मैं …. आह्ह्ह … मेरी चूत का पानी निकलने वाला है .. ओह्ह्ह … क्या हो रहा है मुझे … हाय … मेरी चूत … उफ्फ्फ्फ़ … मेरा पानी निकला … येस .. मेरा पानी निकला … येस … ऊईई … येस … मेरा पानी निकल गया …” ऐसा कह कर नम्रता उसकी छाती पर गिर कर लम्बी -लम्बी साँसे छोड़ने लगी . चूत का पानी निकलते हुए वोह अब हलके हलके धक्के मर कर एकदम से निढाल हो गई .

विपीन ने अपनी बाँहों मे भरकर उसके होंठों को अपने होंठों से जकड लिया . थोड़ी देर बड़ जब नम्रता की धड़कन एकदम सामान्य हुयी तो अपने सरीर से उसे उतरकर अपने बाजु मे सुला लिया और उसके चुन्ची को सहलाता हुआ एक निपल को मुह मे दबा लिया . थोड़ी देर मे दोनों चुन्ची को चूस कर अपनी उंगली से उसकी चूत के दाने को सहलाने लगा . उसकी चूत को सहला कर उसकी चूत की चोदाई की तय्यारी कर रहा था . उसका भूखा लंड अब उसे चोदने को एकदम तैयार था . नम्रता के मुह से जब सिस्कारी निकलने लगी तो उसे डौगी स्टाइल मे कर उसके नितंबो को अपने हाथ से सहलाने लगा . उसकी चूत दोनों चुतडो के बीच एकदम से दबी हुई थी .

अपने लंड को हाथ मे लेकर उसके चूतडो पर हलके से सहला रहा था .नम्रता की चूत काफी गरम हो चुकी थी . उससे अब सहा नही जा रहा था . वोह बोल पड़ी , “हाय जीजा जी , क्यों तद्पा रहे हो . लंड हमारी चुदासी चूत को दिखा रहे हो और उसको चूत के अन्दर नही पेल रहे हो . अब जल्दी से अपने मूसल जैसे लंड को चूत मे घुसाओ , प्लीज़ . “तभी अपने लंड को उसकी चूत की खाई के सामने रखकर उसकी दरार मे टिका दिया और एक जोर का धक्का मारा की नम्रता के अभी अभी सील टूटे चूत मे लंड सनसनाता घुस गया.

नम्रता के मुह से जो चीख निकली वो तो भयानक थी थोड़ी देर धक्के खाने के बाद नम्रता के मुह से आनंद -भरी चीख निकल पड़ी . “हाय . दैय्या .” लंड आधा एक ही धक्के मे चूत के अन्दर घुस गया था..बाद मे हलके धक्के लगे और फ़िर एक जोर का धक्का लगा..इस . दूसरे जबर्दस्त धक्के मे लंड पुरा का पुरा चूत के अन्दर था नम्रता का कलेजा दहल गया लेकिन वो अभी पूरी चुदासी थी… विपीन ने धीरे -धीरे अपने धक्के लगाने चालू रखे . लंड चूत मे पिस्टन की तरह अन्दर बाहर हो रहा था . उसका लंड चूत की गरमी पाकर और फूल गया . नम्रता भी धक्के का जवाब धक्के से दे रही थी . फिर अपने हाथ बढ़ा कर विपीन ने नम्रता के चुंचियों को अपनी गिरफ्त मे ले लिया और धक्को की स्पीड बढ़ा दी . लंड चूत की ज़द तक जा रहा था .

विपीन का लंड चूत के धक्के से एकदम बेकाबू हो उठा . विपीन के मुह से आवाजे आणि शुरू हो गई .”लो रानी … मेरे लंड के झटके … खाओ , ख़ूब खाओ .. देखो तुम्हारी चूत की प्यास बाकी नही रहे .. लो यह लो .. “नम्रता की चूत धक्के पर धक्के खा कर अपना पानी छोड़ना शुरू कर दिया . “येस .. मेरे जीजा जी . .. ऊफ्फ .. मारो धक्के .. और मारो धक्के … मेरी चूत से फिर से पानी निकल रहा हाय . तुम्हारा सख्त लंड ही मेरा पानी इतनी जल्दी -जल्दी निकाल पाया .” फिर भी विपीन अपने धक्के मरने चालू रखा . वोह भी अपना पानी निकलना चाहता था . नम्रता ने देखा की विपीन इसी तरह चोद्ता रहा तो पानी उसकी चूत मे ही छोड़ देगा तो अपनी चूत को एकदम से हटा लिया .

विपीन चिहुंक पड़ा , “यह क्या रानी . मेरा पानी निकलने वाला था .””यही तो मैं नही चाहती की तुम मेरे अन्दर झडो. मैं तुम्हारे वीर्य को अपने पुरे बदन पर झड़वाना चाहती हूँ .””ऐसी बात हाय तो लो अपना मुह खोलो और इसको चूसो . अब थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा मेरे झड़ने का .”नम्रता ने विपीन के लंड को हाथ से पकड़ कर पहले अपने चूंची पर सहलाया फिर लेट कर उसके मूसल को अपने दोनों बूब्स के बीच डाल कर विपीन से बोली , “लो जीजा जी , अब मेरे tits को छोड़ो . अपने लंड को मेरे बूब्स की खाई ई मे डाल कर यहाँ भी अपना झंडा गाड़ दो .

“विपीन अपने लंड को नम्रता के कबूतरों के बीच मे लाकर उसकी tit -fucking चालू कर दी . लेकिन जो टेंपो डौगी -स्टाइल मे बना हुआ था वोह वापस नही बन रहा था . पानी निकलता नही देख उसने अपना ध्यान उसके कबूतरों पर टिका दिया .”मेरी प्यारी साली , अब इस tit-fucking के बाद तुम्हारी चूत की फिर एक बार चुदाई करूंगा . तेरे कबूतरों का जवाब नहीं …..तेरे बूब कितने मलाई जितने चिकने हाय …..और तेरे गुलाबी निपल्स …इन्हे तो मैं खा जाऊंगा ,” कहता हुआ अपने लंड को चुंचियों से निकाल कर उसके ऊपर टूट पड़ा और उसकी चूचियों को मसल मसल कर दबोचने लगा .”प्लीज़ मेरी चूची को और जोर से दबाओ , बहुत मज़ा आ रहा हाय . मुझे नशा सा हो रहा है .

तुम मेरी चूची दबा रहे हो और मेरी चूत मे कुछ कुछ हो रहा है . है ! तुम्हारा तो लंड भी अब वापस से कड़क हो गया है .”नम्रता नीचे पड़ी पड़ी अपनी चूचियों की खाज मिटा रही थी . जीजा जी को पागल होते देख उसकी चूत मे फ़िर खाज शुरू हो गई थी . अपनी चूत पर उसके लंड को रख कर अपने बदन को उसके बदन से जकड लिया और कहने लगी , “मुझे चूत में बहुत …आः ….खुजली हो रही है …..अब अपना चाक़ू मेरी चूत पे चला दो ….जीजा जी तुम्हारे लंड ने मेरी चूत से खून निकाला है आज चूत से .मुझे औरत बना दिया तुमने और दीदी को माँ आज मेरी चूत की मिटा दो खुजली ….. मिटाओ .

“नम्रता को भी तड़पते देख अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर रख कर एक जोर से धक्का दिया और बोला , “ही ! मेरी रानी , ले ! ले ऐ ई ऐ ! और ले , जीं भर कर खा अपनी चूत मे मेरे लंड के धक्के .” फिर धक्के पर धक्के चालू हो गए . नम्रता के पैर उसके सर तक मोड़ दिए..थोड़ी देर तक कमरे मैं केवल “उफ़ ” “है ” “ओह्ह ” “मर गई..ओह्ह माँ…जीजा जी ..धीरे..दर्द हो रहा है..आह्ह भी अभी किया है…आह्ह..ऊह्ह ह की ही आवाजे आ रही थी . तभी विपीन और नम्रता दोनों एक साथ हाय चीख पड़े अह्ह्ह…नम्रता …जीजा जी … दोनों का ही पानी एक साथ छूटने लगा . दोनों निढाल हो कर पलंग पर लेटे रहे और उसी हालत मे नींद आ गई .

दुसरे दिन सुबह ..नम्रता अब कुंवारी नही थी…और चादर पर खून के छिंटे उसकी औरत बनने की गवाही दे रहे थे….सुबह नम्रता ने उठकर विपीन को उठाया . रात की मस्ती झड़ी नही थी .विपीन ने नम्रता को नंगी देखा तो फ़िर से अपने पास खींच लिया..चूमा चाटी शुरू हुयी और लंड लोहे जैसा हो गया… एक बार फिर दोनों आपस मे लग कर चुदाई शुरू कर दी . विपीन नम्रता को नीचे ले कर उसकी दोनों टांगो को आसमान मे फैला कर और उसके चूतड के नीचे दो तकिये रख दिए..जिससे उसकी उभरी हुयी चूत और उभर आयी थी. अभी भी..विपीन ने जैसे ही अपना लंड उसकी गीली हो रही चूत के अन्दर घुसाया..नम्रता चीख पड़ी..विपीन ने दो धक्को मे पूरा लंड चूत के अन्दर डाल दिया था..और कस कस कर उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया . सिस्कारियों से कमरे का वातावरण काफी मदहोश हो गया . नम्रता नीचे से हर धक्के का जवाब अपनी सिस्कारी से दे रही थी .आह्ह..अह्ह्ह.औच..आ..ऊ..च….आह्ह…जीजा जी ….सच मुच तुम्हारा लंड लाजवाब है और बहुत लंबा और मोटा है .

उस लड़की को बहुत मजा आएगा जो तुमसे चुदवायेगी ,” नम्रता विपीन से चुदवाती हुयी बोली .विपीन कस -कस कर धक्के मरते हुए बोला , “हाँ जाने -बहार , तुम्हारी चूत भी एकदम लाज़वाब है .एकदम तिघ्त, उभरी हुयी..कितनी गरम और नरम है..हाय.और इसकी गुलाबी रंगत… लगता है इसे चोद्ता ही जाऊं .”नीचे से नम्रता सिस्कारी मरते हुए बोली , “ओह्ह ! मेरे राजा और पेलो और पेलो अपनी रानी की चूत मे अपना मोटा लंड . आह ! ..मेरी चूत तुम्हारा लंड खा कर और अपनी सील तुड़वा कर निहाल हो रही है . हाय ! लंबे और मोटे लंड की चुदाई ही कुछ और ही होती है . बस मज़ा आ गया . हाँ हाँ , तुम ऐसे ही अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरी चूत मे अपने लंड से धक्का मारते रहो.

मेरी चूत को भी बहुत दिनों से शौक था मोटे और लंबे लंड से सील तुड्वाने का.और फ़िर उससे चुदवाने का.जम कर.. उसको और जोर जोर से खिलाओ अपना मोटा और लंबा लंड .”लेकिन जल्दी ही खत्म हो गई उनकी चुदाई . दोनों का पानी आधे मिनट के फरक पर निकल गया . नम्रता ऐसी चुदाई प कर मस्त हो गई . रात की चोदाई से ज्यादा कड़क चोदाई उसे सुबह वाली लगी .हॉस्पिटल जाकर भारती को देखने और पार्वती को फ्री करने के कारण विपीन को बिस्तर पर से जल्दी उठना पड़ा . बाथरूम मे जाने के बाद पता चला की बाथटब का शावर और नल दोनों ख़राब हो गए है . पानी नही आ रहा था . तो विपीन यह कहकर निकल गया की मैं प्लंबर को भेज रहा हूँ . अगर जल्दी आ गया तो ठीक है नही तो पार्वती को बता देना की प्लंबर से नल ठीक करवाना है .

विपीन हॉस्पिटल जाकर पार्वती को फ्री किया और बोला की घर पहुंचकर नम्रता को जल्दी भेज देना ताकी वोह ख़ुद ऑफिस जा सके .पार्वती घर पहुँची तो नम्रता बाथरूम से निकल कर अपने कपडे बदल रही थी . बाथरूम मे स्टोरेज किए हुए पानी से उसने अपना काम चला लिया था . नम्रता के चहरे पर छायी हुयी खुशी को देखकर पार्वती समझ गई की रात भर क्या क्या हुआ होगा उसने सोच लिया की नम्रता की सील कल रात मे खुल गई है..क्युकी बेड रूम की चादर पर खून उसे दिख गया था… फिर भी अनजान बनते हुए उसने नम्रता को छेड़ते हुए पूछा , “है मेरी जान , बड़ी खुश दिख रही हो . रात भर सोयी नही थी क्या ? लगता है जीजा जी ने बहुत परेशान किया है .””नही तो .

ऐसी तो कोई बात नही है .””अच्छा हमसे ही नाटक .””जब कुछ हुआ ही नही तो क्या नाटक करूं .”फ़िर पार्वती ने उसे बेडरूम की चादर पर खून दिखाया और बिस्तर के नीचे पड़ी हुयी फटी हुई नाईटी की ओर इशारा किया. तो नम्रता शरमा गई और फिर धीरे धीरे सारी बात रात की उगल दी नम्रता ने .पार्वती ने कहा जीजू का लैंड बहुत मज़बूत और मोटा है ये तो मैं जानती हु..मैं ही कल उनसे चुदवाने के मूड मे थी..लेकिन तेरी लॉटरी लग गई. बहुत मज़ा आया होगा ना?..और दोनों फ़िर रस ले कर बातें करने लगी . पार्वती और नम्रता रात की बात करते करते दोनों ही उत्तेजित हो गए . आपस मे अनजाने ही एक दूसरे के बदन को सहलाने लगी . दोनों की चूतें अन्दर की गरमी से पिघलने लगी . तभी टेलीफोन की घंटी बजी . नम्रता ने फ़ोन उठाया .

“मैं विपीन बोल रहा हूँ .””बोलो जीजा जी , मैं नम्रता बोल रही हूँ .””देखो प्लंबर को बोल दिया है . थोड़ी देर मैं आ जाएगा . लेकिन तुम जल्दी आ जाओ . मुझे कुछ दवाई लाना है फिर मैं ऑफिस निकल जाऊंगा .”नम्रता जल्दी ही हॉस्पिटल के लिए निकल गई साथ मे कह कर गई की बाथरूम का नल ख़राब है , प्लंबर आएगा . पार्वती मन मसोस कर रह गई . रात मे भी मौका नही मिला और अब सुबह थोड़ी बहुत गरमी शांत होती वह भी नही हुयी .उसे विपीन पर ग़ुस्सा आ रहा था..ऐसे तो मेरी चुन्ची दबाते है…गांड दबाते है..आज छुट्टी ले कर घर रुक जाते तो मै भी उस मोटे और लंबे लंड से एक बार तो चुदवा लेती.. आख़िर चूत तड़पती ही रह गई . वोह उसे शांत करने के लिए जीजी की एक नाईटी पहन कर बाथरूम मे चली गई .

उससे बदन तो ढक गया लेकिन गला काफी खुला हुआ था और नीचे से भी घुटने के ऊपर तक ही थी .नाईटी को उतार कर जैसे ही नल खोला तो ध्यान आया की वोह तो ख़राब है . उसी हालत मे बैठी बैठी अपनी चूत को हाथ से सहलाने लगी . चूत को सहलाते -सहलाते उसे ध्यान ही नही पड़ा की दरवाजे की बेल कितनी देर से बज रही है . फटा – फट नाईटी पहन कर बाहर निकली और गेट खोल दिया . सामने खड़ा था प्लंबरएक मजबूत किस्म का इंसान . रंग सांवला लेकिन कद काठी कसरती . वोह भी अपने सामने खड़ी पार्वती को देखता ही रह गया . उफ़ क्या नशीला बदन है .

एक मिनी नाईटी पहने हुए तो क़यामत ढा रही थी . छातियां नाईटी मे समां नही रही थी . आधे मम्मे बाहर छलक रहे थे . गहरी साँस लेते हुए बोला , “विपीन साहेब ने बुलाया है . क्या कोई नल ख़राब है .””हाँ .. हाँ . बाथरूम का शावर और नल दोनों ख़राब है . पानी नही आ रहा है .”संजय , यही नाम था प्लंबर का , सीधे बाथरूम मे चला गया . बाथ टब का शोवेर और नल चालू कर के देखा लेकिन पानी नही आ रहा था . तो उसने शावर को निकाल दिया और फिर बाथरूम के अन्दर बनी हुयी टंकी जो सीलिंग से लगी हुयी थी , से नल को चेक करने लगा .”लगता है की टंकी से पानी नही आ रहा है . ऊपर चेक करना पड़ेगा . कोई टेबल है क्या ?

“पार्वती ने एक मध्यम साइज़ की टेबल ला कर दी . वोह उस पर चढ़ कर टंकी चेक करने लगा और बोला , “पानी तो पुरा भरा पड़ा है . पाइप और फिटिंग चेक करना पड़ेगा .”यह कह कर अपनी पैंट और शर्ट निकलने लगा . एक बनियान और स्वीमिंग कास्ट्युम जैसा अंडविपीन यर पहने हुआ टेबल पर चढ़ गया . पार्वती उसके गठीले बदन को देखी तो देखते ही रह गई . मजदूर आदमी का जिस्म था . एक दम कड़क .ऊपर से पाइप को खोलते हुआ बोला “मेम साहेब , आप जरा बाथ टब के पास रहना . जब पानी आए तो शावर को पाइप के ऊपर पकड़ कर रखना .”बाथरूम मे जगह कम थी . टेबल ने जगह घेर कर रखी थी . पार्वती बाथ टब मे जाकर खड़ी हो गई .

जब पानी आने लगा तो वोह शावर को पाइप के ऊपर लगाने लगी लेकिन बाथ टब मे खड़ी होने की वजह से पार्वती पुरी तरह से भीग गई . उसका बदन नाईटी से झलकने लगा . उसके कबूतर नाईटी से आधे तो पहले ही दिख रहे थे अब बाकी आधे नाईटी के पारदर्शी (transparent) हो जाने की वजह से दीखने लगे . उसके दर्क निपल एक दम से तन कर आमंत्रण दे रहे थे . जांघों से नाईटी चिपक गई थी . उसके उभरे हुए नितम्ब आकर्षित कर रहे थे . संजय ने जब नजर नीचे कर यह नज़ारा देखा तो उसका लंड दन -दन करता हुआ खड़ा हो गया . उसका लंड एक गोरी और मस्त लौंडिया को देख कर फड़फडाने लगा . वोह पाइप वापस फिटिंग करते हुए कभी पाइप को देख रहा था तो कभी पार्वती की उफनती हुयी जवानी को देख रहा था . तभी उसके हाथ से रेंच -पाना (an instrument to tight pipe) नीचे बाथ टब मे गिर गया और उसके हाथ से पाइप भी छूट गया .पानी ऊपर पाइप से नीचे गिरने लगा . ख़ुद भी पुरी तरह से भीग गया . उसके बदन के कपडे भी भीग गए .

कोस्ट्युम जैसे अंडवियर से लंड का साइज़ साफ दिख रहा था .बहुत ही मोटा और लंबा लग रहा था.और मुड़ा हुआ था.. ऊपर से ही कहा , “मेम साहेब , जरा वोह रेंच -पाना देना प्लीज़ .”पार्वती ने रेंच -पाना उठाया तो शावर अपनी जगह से खिसक गया . जिसकी वजह से पानी फिर गिरने लगा . एक हाथ से शावर को पकडे हुए दूसरे हाथ से झुक कर उस ने रेंच -पाना को उठाया और उसकी मस्तानी गांड ..ऊह्ह..ओह्ह ..क्या दृश्य था ..मोटे गदराये नितम्बो की गोलाई और उसमे वो गांड..वो हाथ से रेंच पाना देने लगी . लेकिन पानी गिरते रहने की वजह से उसका ध्यान शावर की तरफ़ ही था . दूसरा हाथ रेंच -पाना संजय को देने के लिए आगे बढाया हुआ था .

ऊपर संजय भी पाइप से पानी गिरते रहने की वजह से पाइप की और ही देख रहा था . उसने ऊपर ही मुह किए हुए वापस कहा , “मेम साहेब , प्लीज़ . वह रेंच -पाना देना .”पार्वती भी शावर की और देखते देखते बोली , “दिया तो है . लेलो .”तभी दोनों की नज़र आपस मे टकराई तो देखा की रेंच -पाना पार्वती ने अनजान -वश संजय के मोटे फूले हुए लंड मे फंसा दिया था .संजय यह देखकर मुस्कुराया और पार्वती ने अपनी नज़र नीचे झुका ली . संजय रेंच -पाना अपने लंड पर से निकाल कर पाइप को फिटिंग करने लग गया .संजय बोला , “अच्छा मेम साहिब , अब धक्का नही दूँगा . मैं थोड़ा ज्यादा ही जोश मे आ गया था . लेकिन अब इसे चूसो . तड़पाओ मत मुझे .

“पार्वती उसके लंड को चाट रही थी ऊपर से फव्वारे से पनि गिर रहा था . संजय को जन्नत का मजा मिल रहा था . तभी संजय को महसूस हुवा की अगर लंड को पार्वती के मुह से नही निकला तो फव्वारे की तरह उसका लंड भी पानी फेंकने लगेगा . उसने पार्वती को बाथ टब मे लेटकर उस पर छा गया और उसके मम्मे अपने हाथों से पकड़ एक को मुह मे लेकर आम की तरह चूसने लगा . पार्वती के मुह से सिस्कारी निकल गई ..आह्ह..उफ्फ्फ..इश..श.स्.स्.स्.स्. धीरे..लेकिन अब संजय कुछ नही सुनने वाला था . संजू बगैर दांतों से नुकसान पहुँचाये उसके एक -एक करके दोनों उरोजो को बारी -बारी से मुह मे लेकर चूस रहा था . साथ मे बोलता भी जा रहा था , “मेम साहेब , तुम्हारे चुचियो का जवाब नहीं …..तुम्हारे चूंची कितने मलाई जितने चिकने है …..और तुम्हारे गुलाबी निपल .. उफ़ ….इन्हे तो मैं खा जाऊंगा .

“पार्वती सिस्कारी लेते हुए बोली , “”हाय ! और जोर से मेरी चूची मसलों , इनको ख़ूब दबाव , दबा दबाके इनका सारा रस पी जाओ . मुझे बहुत मज़ा आ रहा है . मेरे पुरे बदन मे नशा छा रहा है . हाय मुझको इतना मज़ा कभी नही मिला . और दबाव मेरी चूची को .”संजय उसके मम्मे चूसते हुए अपने एक हाथ को उसके मम्मे से सरकाते हुए उसकी चूत के ऊपर हाथ से मालिश करने लगा . पार्वती का जोश दुगुना हो गया . उसकी सिस्कारियां बढती ही जा रही थी . जिनको सुनकर संजय का भी जोश बढ़ गया . उसका मुह और दोनों हाथ की स्पीड डबल हो गई .

अपनी जीभ से उसकी कड़क हुयी निपल को चूसने के साथ उसकी चूत और झांटो पर अपनी रगड़ बढ़ा दी . “आः आह्ह ……प्लीज़ आहिस्ता करो . रगडो मेरी चूत को .. आराम से करो .. मजा आ रहा है तुम ने क्या कर दिया है .. आज ऐसा पहली बार फील कर रही हूँ और बहुत अच्छा लग रहा है .. हाँ ऐसे .. आराम से .. मगर रुकना मत .. करते रहो .. ओह्ह हह स्.स्.स्.स्.स्.स्.उफ्फ्फ….और उसने टटोल कर फ़िर से उसके लंड को पकड़ा जो की फुफकार रहा था… “लोहे को गरम होते देख संजय ने अब अपना हथोडा मारना ही अच्छा समझा . उसने पार्वती को दीवाल के सहारे उठा के खड़ा कर उसके पीछे से अपने दोनों हाथो से उसके चूतड को सहलाना शुरू कर दिया .

उफ़ … क्या गुदाज़ जिस्म के उसके चूतड थे . दूध मे सिन्दूरी कलर डाले हुए रंग के चूतड . वोह अपनी किस्मत पर यकीन ही नही कर पा रहा था . वाकई मे ऐसी चूत और चूतड किस्मत वाले को ही मिलते है . उसने अपनी जीभ निकल कर उसके चूतड को चाटना चालू कर दिया . पार्वती के मादक बदन मे एक सिहरन दौड़ गई . उसका बदन का एक -एक रोंया सिहर उठा . पुरे बदन मे बिजली कड़क रही थी . चूतड को चाट -ते चाट -ते अपनी जीभ को उसकी पीछे से उभर कर बाहर आई हुयी चूत पर लगा दिया . जीभ चूत पर लगते ही पार्वती के मुह से “ऑफ़ फ . ..ओफ्फ्फ ” की आवाज आनी शुरू हो गई .

अपनी जीभ को संजय ने धीरे धीरे आगे बढ़ाते हुए चूत की चुदाई अपनी जीभ से चालू कर दी . चोदना -चाटना , चोदना -चाटना , चोदना -चाटना यही कर रहा था अपनी जीभ से उसकी गुलाबी चूत को दोनों फांक चिपकी हुयी थी..उसे ऊँगली से थोड़ा फैला लिया था…”ओओओह मा .. ओह आहा आया .. यह क्या कर रहे हो , बहुत मज़ा आ रहा है और चाटो , चूस डालो … पानी निकल दो इसका …. बहुत प्यासी है मेरी चूत ,” पार्वती की लहराती हुयी आवाज बाथरूम मे गूँज रही थी . मेरी प्यास बुझा दो , मुझे ठंडा कर्दो .. मेरा जिस्म बहुत जल रहा है .. कुछ कुछ हो रहा है मन मे , प्लीज़ मेरी आग बुझा दो मेरी .. प्लीज़संजय ने उसकी रसीली छूट की चुसाई कर उसे वैसे ही खड़ा रहने दिया और अपने सख्त लंड को उसके चूतड पर दबाना शुरू कर दिया . लंड को एकदम नजदीक देख उसकी चूत का पानी बहना चालू हो गया .

चूत एकदम से जूसी हो गई . अपने हाथ को पीछे ले कर संजय को अपने बदन से चिपका लिया .

 

 

 

 

 

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