सेक्स की कमी महसूस कर रही आंटी की चुदाई

हेल्लो दोस्तों आज जो मै कहानी आप सभी को सुनने जा रहा हूँ यह मेरी पहली कहानी है मुझे उम्मीद है की आप सभी को मेरी ये कहानी बेहद पसंद आयेगी. इस कहानी को और मजेदार बनाने के लिए मैंने खुद इसमे कई अलग से इंटरटेनिंग वर्ड उसे किये है जिससे ये कहानी और भी मजेदार बन जाये.ये कहानी तब की है जब मै मुझे अपने बोर्ड के एग्जाम के कारण पटना में रहना पड़ा, पटना हमारे घर के पास ही मेरे एक आंटी का घर था. वह एक डिवोर्सड लेडी थी, उसको दो लड़कियां थी उस लेडी का नाम वंदिता था. बड़ी लड़की का नाम अलिश्का और छोटी वाली का नाम मलिश्का था . वंदिता आंटी दिखने में बहुत ही सेक्सी थी उसके बूब्स का साइज ३६ था और हाइट ५ फुट २ इंच थी, वह घर में सलवार कमीज पहनती थी. उसके साथ उसके पिताजी रहते थे. जिनकी उम्र 70 साल थी, और वह आर्मी से रिटायर्ड थे. और काफी कमजोर थे. और बेड पर पड़े रहते थे. उनकी पेंशन से घर का खर्च चलता था.

मेरे पैरेंट्स ने वंदिता आंटी से कहा कि वह मुझे अपने घर में ५ महीने के लिए रख ले, ताकि मैं अपने बोर्ड के एग्जाम दे सकूं. हर मंथ इसका खर्च भेजते रहेंगे, वंदिता खुशी से मान गई, में सेक्स के बारे में काफी कुछ जान चुका था, मैंने कई बार पोर्न मूवी देखी थी. जब मेरे पेरेंट्स और भाई लुधियाना चले गए, तो मैं वंदिता आंटी के घर में रहने लगा. उनके घर में तीन रूम थे और एक किचन था, दिसंबर का महीना था. मेरी तबियत ठीक नहीं थी, सर्दियां अभी शुरु हुई थी, मैं उस दिन स्कूल नहीं गया था. घर में मैं वंदिता आंटी और उनके पिता जी थे, बाहर मौसम बहुत अच्छा था. और उनकी लड़कियां स्कूल गई हुई थी. बाहर धूप निकली हुई थी और वंदिता आंटी छत पर बैठी धूप का आनंद ले रही थी.

मैं अपने रूम से बाहर आ कर वंदिता आंटी के पिता से पूछा कि आंटी कहां है? तो उन्होंने कहा कि वह ऊपर छत पर है. मैं ऊपर चला आया मैंने देखा कि आंटी चटाई पर बैठी थी, उन्होंने येलो सलवार कमीज पहना हुआ था. और स्वेटर नहीं पहना हुआ था. मुझे देखा और उन्होंने मुझे पूछा अब तुम्हारी तबीयत कैसी है? मैंने कहा ठीक है. आंटी ने कहा तुम खड़े क्यों हो? बैठ जाओ नहीं तो थकावट हो जाएगी.

मैं उनके पास ही बैठ गया, सूरज की रोशनी में उनका चेहरा लाल होकर चमक रहा था. उनकी कमीज में से उनकी काली रंग की ब्रा साफ नजर आ रही थी. उसको इस हालत में देख कर मैं पागल सा हो गया. मैं उनको सिड्यूस करने के बारे में सोचने लगा, मैं जानता था कि उनका डायवोर्स हुए ५ साल हो गए हैं, वह सेक्स की कमी महसूस करती होगी. और अगर मैं सही जगह हथोड़ा मारा तो मुझे इसका फायदा मिलेगा और मैं उनको चोदने का तरीका सोचने लगा. अचानक मुझे एक आयडीया आया. मेरे लंड का साइज़ ७.५ इंच था, में नीचे अपने रूम में आया और एक पतला सा पजामा पहन कर फिर से छत पर आ गया.

फिर मैं आकर बैठ गया मैंने अपना सर जानबूझकर पकड़ कर हुए बोला मेरा सर बहुत दर्द हो रहा है और नींद आ रही है. मैं लेट गया और वंदिता आंटी का दुपट्टा जोके उन्होंने एक साइड पर रखा था उस से अपने फेस को ढक लिया और सोने का नाटक करने लगा, और थोड़ा दुपट्टा जोकि जालीदार और पतला था उसमें से अब सबकुछ दिख रहा था. मैंने सिर्फ अपना फेस ही ढका था. मैं आंटी के बूब को देख रहा था जो कि उसके सांस लेने से हिल रहे थे मेरे लंड खड़ा हो गया. और पजामे में टेंट के जैसे ऊभर आया और वो पतले पजामे में साफ दिख रहा था. अचानक वंदिता आंटी नजर मेरे लोड़े पर पड़ी देखते ही उसके सांस थम गए और वह मेरे लोड़े को देखने लगी. उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक आ गयी और अब उसकी सांसे तेज हो गई थी. थोड़ी देर बाद वंदिता आंटी अपना हाथ अपनी चूत पर ले गई और सलवार के ऊपर से वह अपनी चूत मसलने लगी, मैं यह सब देख रहा था थोड़ी देर बाद आंटी ने अपना हाथ मेरे नजदीक लाकर छाती पर रख दिया.

तभी अचानक डोर बेल बजी और वंदिता आंटी हड़बड़ा गई और नीचे देखा, नीचे उनकी बेटियां स्कूल से आ गई थी सैटरडे होने की वजह से स्कूल हाफ टाइम में बंद हो गया था, वह नीचे चली गई. मैं अपनी किस्मत को गालियां दे रहा था पर इतना सुकून था कि मेरा प्लान काम कर रहा था और मुझे उनकी अंदर की भावनाओं का पता चल गया था. रात का खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में सोने जा रहा था, तो आंटी ने कहा अगर तुम्हारी तबीयत अभी भी खराब है तो यही हमारे रुम में सो जाओ, मैं यह सुनकर खुश हो गया. रात को मैं वंदिता आंटी और उनकी लड़कियां टीवी देखने के बाद सोने की तैयारी करने लगे, आंटी के पिताजी दूसरे रुम में सोते थे. और वह उनकी बेटियां एक कमरे में. उनकी बेटीया एक बेड पर लेट गई और मैं और आंटी डबल बेड पर लेट गए, रात को सर्दी हो गई, हम सब ने अलग रजाई लपेटे हुई थी. रूम अंदर से बंद था रात को सबके सोने के बाद मैं आंटी के पास खीसक गया और उनके नजदीक हो गया. आंटी ने अपनी रजाई सिर्फ टांगो तक ले रखी थी. रात को रूम बंद होने की वजह से थोड़ी गर्मी हो गई थी. सर्दी अभी शुरू ही हुई थी. आंटी करवट के बल लेटी थी और उसकी पीठ मेरी तरफ थी. मैं उसके साथ ऐसे सट गया मेरा लंड उनकी गांड के बीच में सट गया, मेरा तना हुआ लंड गांड पर दबाव बना रहा था.

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थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ आगे ले जाकर आंटी के राइट बूब पर रख दिया तो हरकत ना पाकर मैं धीरे धीरे मसलने लगा, मुझे आंटी की सिसकारी सुनाई दे रही थी. मैं समझ गया कि आंटी सोने का नाटक कर रही है. और वह भी गरम हो चुकी है. मैं यह सोच कर पागल हो गया और उनका फेस अपनी तरफ करके जोर से उनके लिप्स पर किस करने लगा. आंटी ने अपनी आंखें खोली और मुझे पीछे धकेला और कहा तुम यह सब क्या कर रहे हो? रमा जाग जाएगी तुम पागल हो गए हो क्या? मैंने कहा मेरी रानी मैं तुम्हारी प्यास बुझाना चाहता हूं. यह कहकर मैं फिर से उसे किस करने लगा. तो उसने फिर मुझे पीछे किया और कहा रमा जाग जाएगी, और यह सब गलत है. और मेरे और तुम्हारे उम्र में बहुत फर्क है. मैंने कहा प्लीज सिर्फ एक बार मुझे चोदने दो. तो पता चल जाएगा . मैं ने कहा मैं अपने रूम में जा रहा हूं, तुम थोड़ी देर बाद आ जाना. तो आंटी ने कहा मैं नहीं आऊंगी. मैंने कहा तुम नहीं आओगी तो मैं तुम्हें यही चोद दूंगा और यह कर कर अपने रूम में आ गया.

थोड़ी देर बाद आंटी भी आ गई, उसने आते ही गुस्से से कहा तुम क्या पागल हो गए हो? अगर कोई जाग गया तो तुम्हें पता है कि हमारा क्या हाल हो गया? मैं तो अपने बच्चों को मुंह दीखाने के लायक नहीं रहूंगी. पर मैं जानता था कि वह अंदर से सेक्स के लिए तड़प रही थी. मैं आगे बढ़कर रूम का दरवाजा बंद कर दिया तो आंटी ने कहा तुम यह क्या पागलपन कर रहे हो? पर मैंने एक नहीं सुनी और आगे बढ़ कर उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया और उसको चूमने लगा.

मैंने उसे बैड पर धकेल दिया और उसके ऊपर चढ़ गया, वह छुटने की कोशिश कर रही थी. मैं उसको किस करता रहा और उसके होंठ चूसता रहा, फिर मैंने अपनी टांगे उसके टांगो को अलग करके उसे बीच में डाल दी. आंटी के टांगों को अलग होने की वजह से मैं ऐसी पोजीशन में आ गया कि जैसे मैं उसे चोद रहा हूं. मैं अपने लंड जो कि अभी पजामी के अंदर ही था आंटी की चूत पर सलवार के ऊपर से रगड़ने लगा. मैंने उसकी टांगों को घुटनों के बिच से मोड़ दिया और ऊपर उठा दिया, अब उसकी चूत साफ नजर आ रही थी. मेरा लौड़ा एकदम तन गया, मैंने अपना पजामा उतार फेंका और मेरा लंड आजाद हो गया, मैंने अपना लंड का सुपाडे पर थूक लगाया और लंड को उसकी चूत पर रख दिया. उसने अपना मुंह अपने हाथों से ढक लिया. मैंने एक जोरदार धक्का मारा तो मेरा लंड का सुपाडा पूरा उसके अंदर चला गया और धक्के लगाने लगा, मैं समझ गया कि अब वह गरम हो गई है, और कुछ नहीं करेगी.

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी सलवार खिंच कर निकाल दी और उसे फेंक दिया फिर मैंने उसकी टांग उठाई और लंड फिर उसकी चूत में डाल दिया. अब उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी, उसकी चूत से पचपच आवाज आ रही थी, मैं धक्के मारने के साथ उसके बूब्स को बारी बारी चूस रहा था, १० मिनट तक चोदने के बाद उसका पानी निकल गया और वह झड़ गई थी, जैसे वो झड़ी उसने मुझे जोर से गले लगा लिया और किस करने लगी. मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और एक मिनट बाद मैं भी झड़ गया. में और वंदिता आंटी थोड़ी देर वैसे ही लेटे रहे, थोड़ी देर बाद वंदिता आंटी उठी और उसने अपनी सलवार पहनी और अपने रुम में चली गई और मैं सो गया.

अगले दिन सुबह वंदिता आंटी मेरे रूम में ९ बजे चाय लेकर आई, और मेरे पास आकर बैठ गई. मैं जाग रहा था, पर मेरी आंखें बंद थी, वह अपने हाथ मेरे बाल पर फेरने लगी और मेरे माथे पर किस किया, मैंने आंखें खोली तो वह चाय देकर मुडने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और बेड पर खींच लिया. तो आंटी ने कहा आज संडे है सब घर पर हैं, कोई आ जाएगा. मुझे जाने दो. मैंने कहा जाने दूंगा पर बताओ की क्या आप मुझसे नाराज हो? तो उसने कहा नहीं, तो मैंने कहा तो कल आप इतनी जिद क्यों कर रही थी? तो उसने कहा इसके बारे में बाद में बात करुंगी. मैं उठा और फ्रेश हो गया, मैंने देखा कि उनकी बेटियां अपने नाना जी के साथ कही बाहर जाने के लिए तैयार थे, और वह चले गए. मैंने वंदिता आंटी से पूछा कि वह कहां गई है तो आंटी ने कहा वह किसी रिलेटिव के यहां गए है और रात को वापस आएंगे.

फिर मैंने उससे पूछा कि आप कल की बात से नाराज है? तो उन्होंने कहा नहीं मैं नाराज नहीं हूं, तो मैंने कहा फिर आप ऐसे क्या कर रही थी? तो उन्होंने कहा उनका डायवोर्स हुए ५ साल हो गए हैं, मैंने अपने पति के सिवा किसी को अपने जिस्म को छूने नहीं दिया. और ना ही कभी सोचा. मैंने कल दोपहर को जब तुम्हारा लंड देखा तो मेरे अरमान फिर से जाग गए, पर मैं जानती हूं कि तुम भी ५ महीने बाद चले जाओगे और मैं फिर से अकेली हो जाऊंगी, मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती और इसलिए मैं तुम्हारे नजदीक नहीं आना चाहती थी. मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, मैं आज से तुम्हारी रखेल बन कर रहूंगी और तुम जैसा चाहोगे वैसा ही करूंगी.

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मैं बहुत खुश हो गया और उसके लिप पर किस करने लगा. वह भी किस करने लगी हम एक दूसरे की जीभ को सक करने लगे. ५ मिनट तक यूही करने के बाद मैंने कहा हम दोनों आज बाहर शॉपिंग पर चलते हैं, मैं और आंटी १० बजे घर से निकल पड़े. मार्केट हमारे घर से थोड़ी ही दूर पड़ता हे, वहां पर हम एक लेडी अंडर गारमेंट की दुकान पर गए, वहां से मैंने आंटी के लिए रेड कलर की पैंटी और ब्रा लिए, और एक ब्लैक कलर की नई नाईटी ली. फिर हम घर आ गए. मैंने आंटी से कहा में आपको इस नाइटी और ब्रा में देखना चाहता हूं. तो उन्होंने कहा १५ मिनट इंतजार करो, १५ मिनट में वह बाथरुम से बाहर आई, आंटी के गोरे रंग पर ब्लैक नाइटी बहुत अच्छी लग रही थी.

मैं उठकर उनके पास गया और उन को किस करने लगा. उन्होंने मुझे जोर से गले लगा लिया, हम ५ मिनट तक किस करते रहे और उसके बाद बेड पर लेट गए, मैं आंटी का सारा जिस्म चूमने लगा और मैं आंटी की नाइटी आगे से खोल दिया, और उनकी बेली को किस करने लगा, आंटी ने मेरे सर को पकड़ लिया और अपनी उंगलियां मेरे बालों में फेरने लगी और अहः औऊ ईई अह्ह्ह अग्ग्ग ईई ओऊ अहह औऊ ईई अम्म्म हहह ओह्ह हहह अम्म्म आवाज निकालने लगी. फिर मैंने उन की ब्रा जो की फ्रंट साइड से ओपन होती थी, उसके हुक खोल दिए और उनकी एक बुब को सक करने लगा और मैं उनके ऊपर लेट गया, आंटी ने मुझे बाहों में ले लिया और अपने लेग्स को मेरे हिप्स पर मोड लिया, वह बहुत गर्म हो चुकी थी. मैं १० मिनट तक उनके बुब्स चूसता रहा और उनके लिप्स को किस करता रहा. फिर मैंने उनकी पेंटी को चूत से एक साइड पर कर दिया और अपनी पेंट और अंडरवियर उतार दिया और फिर से ऊपर लेट गया, और उनको किस करने लगा. वह बहुत गर्म हो चुकी थी और अपने पैर से मुझे अपनी छाती से सटा रखा था.

मैं धीरे धीरे नीचे गया और उनकी चूत के लिप्स को खोलकर अपनी जीभ चूत बीच में डाल दिया और जीभ से उनकी चूत चाटने लगा, उनकी चूत से पानी निकलने लगा वह बहुत गीली हो चुकी थी. वह पागल सी हो गई और मेरे सर को पीछे धकेल रही थी और कह रही थी आह्ह औउ हहह ओऊ अह्ह्ह औऊ प्लीज चोद दो मैं मर जाऊंगी.. बहुत मजा आ रहा है. फिर आंटी ने मुझे पकड़ कर ऊपर खींच लिया और मेरे लिप्स पर किस करने लगी और लिप्स को सक करने लगी, उन्होंने अपना एक हाथ नीचे ले लिया और मेरे लंड को पकड़ लिया. वह बेड से उठ कर नीचे बैठ गई और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी.

मेने उसका सर पकड़ लिया और अपनी हिप्स आगे पीछे करने लगा, मुझे बहुत मजा आ रहा था, ५ मिनट चूसने के बाद वह फिर से बेड पर लेट गई थी. वंदिता आंटी ने मेरे लंड को पकड़ लिया जो अब गीला और सख्त था, और अपनी चूत के छेद पर रख दिया, और अपनी आंखें बंद कर ली. मैंने एक जोरदार झटका मारा और मेरा आधा लंड उनकी चूत में चला गया, आंटी का बदन एन्ठ गया और उन्होंने मुझे गले से लगा लिया, और मुझे किस करने लगी. मैं उनके लिप्स को चूसने लगा और हाथों से बूब्स को मसलने लगा. फिर मैं आगे पीछे धक्के मारने लगा और मेरा सारा लंड उन की चूत में चला गया, आंटी ने अपने पैर मोड़कर मेरे कंधो पर रख दिए और मेरे हिप्स को पकड़ लिया, और मैं धक्के मारने लगा. वह पूरे जोश में मेरा साथ दे रही थी. और कह रही थी और जोर से और तेज मैंने भी जोश में आकर अब अपनी स्पीड बढ़ा दी और वह जोर से आह औउ ई हहह औऊ ई ओऊ आवाज निकाल रही थी.

मैं करीब ५ मिनट तक इस पोजीशन में चोदने के बाद मैं उनके पीछे आ गया और अपना लंड अंदर डाल दिया, और धक्के लगाने लगा. वह भी अपनी गांड को पीछे धकेल रही थी, और बहुत ही सेक्सी आवाजें निकाल रही थी. ५ मिनट तक चोदने के बाद उसकी चूत से पानी निकलने लगा और वह जड़ गई, पर मैं अभी तक नहीं जडा था, और उन्हें चोदता रहा, वह मुझे कह रही थी कि अब उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा. पर मैं अपने काम में मशगुल रहा और ३ मिनट बाद वह फिर से गर्म हो गई और उठ कर मेरे ऊपर आ गई और मेरे लंड को चूत के छेद पर रख दिया और ऊपर नीचे होने लगी, जैसे ही वह ऊपर नीचे होती उनके बूब्स हिलते मेने उनके बूब को पकड़ लिया और दबाने लगा, वह मस्ती में आकर तेजी से उछलने लगी और ५ मिनट बाद फिर से झड़ गई, और मेरे ऊपर गिर गई. और मुझे गले से लगा लिया, और होंठो पर किस करने लगी, मैं नीचे से धक्के मारने लगा और एक मिनट बाद मैं भी झड़ गया और हम एक दूसरे को किस करते रहे, फिर उस दिन हमने ५ बार सेक्स किया और हमें जब भी चांस मिलता तो हम सेक्स करते.

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