माकन मालकिन की उभरे हुए स्तन को दबोचा

मेरी नौकरी मध्य प्रदेश के करीब् एक छोटे से कस्बे मे लगी। मै अपनी पत्नी के साथ् वहाँ रहने चला गया। हमें वहाँ एक छोटा सा मकान भी मिल गया. दुमंजिला मकना था. नीचे माकन मालिक रहता था. ऊपर हमें रहने के लिए दो छोटे कमरे और रसोई . माकन मालिक की किराने की दुकान थी.उसकी पत्नि भी थी लेकिन उनका लड़का बाहर दूसरे शहर में पढ़ रहा अता. माकन मालिक और उसकी पत्नि की उमर करीब चालीस साल थी.लेकिन दिखने में गजब की सुन्दर थी. मैं जैसे ही शाम को घर लौटता मैं और मेरी पत्नि नम्रता एक बार बिस्तर में घुस जाते. मेरी दिन भर की थकान उतर जाती और नम्रता की दिन भर की बोरियत ख़तम हो जाती.

एक दिन इसी तरह मैं और नम्रता बिस्तर में थे. उस दिन गलती से हम दरवाजे की कुण्डी लगाना भूल गए. मैं नम्रता के ऊपर लेता था और उसके अन्दर मेरा लिंग घुसा हुआ था. हम दोनों पूरी मस्ती में थे. तभी मकान मालकिन मेरे नाम आये कोई पत्र को लेकर ऊपर आ गई. उसने दरवाजे को धकेला तो हमें इस हालत में देखकर चौंक गई. हमें उसके आने का पता नहीं चला. उसने धीरे से वापस दरवाजा बंद किया और बाहर खड़ी होकर खिड़की से झांककर हमें देर तक देखती रही और मजा लेती रही.

इसके बाद तो वो रोजाना उस समय आ जाती और बाहर खिड़की से हमें मजे ले लेकर देखती रहती. हम दोनों का इस बात का बिलकुल ही अनुमान नहीं था. एक दिन जब मैं अपने ऑफिस में मेरे एक दोस्त को अपने घर का पता दिया तो चौनते हुए बोला ” क्या!! तुम उस मकान में रहते हो!” मैंने उसके चौंकने का कारण पूछा तो वो बोला ” अरे तेरे मकान मालिक की बिवे बहुत खतरनाक है. वो हर किरायेदार पर डोरे डालती है. और यही कारण है कि वो मकान खाली रहता है.” एक बार तो मैं डर गया. लेकिन फिर ये सोचकर कि मैं शादीशुदा हूँ वो मेरे साथ इस तरह से कुछ नहीं करेगी. निश्चिंत हो गया.

मेरा और नम्रता का ये सिलसिला जारी था और उधर रवीना ( मकान मालकिन ) का हमें देखने का सिलसिला जारी था.एक दिन मैं दोपहर में जल्दी घर आ गया. नम्रता अपनी एक और पहचान वाली पड़ोसन के साथ बाजार गई हुई थी. ये खबर रवीना ने मुझे दी. मैं कमरे में आकर बैठ गया. तभी रवीना ऊपर आई. मैं थोडा चौंका. क्यूंकि रवीना का आँचल नीचे ही था और उसके ब्लाउज का एक बटन भी खुला हुआ था. उसने मेरी तरफ एक शरारत भरी नजर डाली और बोली ” तुम दोनों बहुत खुशकिस्मत हो. रोज रोज बिस्तर गरम हो जता है.” मैं उसकी ये बात सुनकर हैरान रह गया. रवीना ने मुझे सारी बात बता दी. मैं पसीना पसीना हो गया. रवीना ने फिर कहा ” मुझे सब लोग गलत समझते हैं. लेकिन मैं की अकरुण!

मेरे पति तो अपनी दुकान के पीछे रहनेवाली एक औरत में फंसे हुए हैं. वो गन्दी औरत उन्हें छोडती ही नहीं. पिछले दस साल से फंसाया हुआ है. मेरी प्यास भी तो है जिस्म की. इसे कैसे बुझाऊं?”” रवीना ने इसके बाद काफी बातें कही. मुझे उस पर बहुत दया आ गई. रवीना का चेहरा बता रहा था कि वो झूठ नहीं कह रही है. रवीना अपनी जगह से उठी और मेरे करीब आते हुए बोली ” मुझे तुम और नम्रता बहुत अच्छे लगते हो. तुम दोनों खुश रहो. तुम मुझे बस यह सब देखने का मौका रोज देते रहना .” रवीना नीचे चली गई.

मैं सोच में डूब गया. रात को मैंने नम्रता को सारी बात बताई. नम्रता ने भी रवीना के लिए हमदर्दी जताई. अगले दिन जब मैं और नम्रता शाम को बिस्तर में थे तो रवीना आ गई., वो दरवाजे के बाहर खड़ी होकर हमें देखने लगी. हमें भी उसका देखना अच्छा लगा. और हम और जोश से सेक्स करने लगे. धीरे धीरे रवीना का कमरे के अन्दर आकर पलंग के पास खड़े होकर और कभी सोफे पर बैठकर देखना शुरू हो गया.
कभी कभी वो नम्रता के जिस्म को भी छु लेती. नम्रता भी उसे मना नहीं करती. हम दोनों खुश थे कि रवीना की कुछ कुछ प्यास तो कम हो रही है.

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एक दिन रवीना नम्रता के पास आई. उसने कोई मैगजीन नम्रता को दिखलाई. उसमे दो औरतें आपस में एक दूसरे को चूम रही थी. नम्रता के बदन ने सरसराहट दौड़ गई. दोनों के लिए इस तरह की फोटो देखने का ये पहला मौका था. नम्रता ने मैगजीन में उस फोटो के साथ वाले आर्टिकल को पढ़ा. उसने रवीना को सारी बात पढ़कर सुनाई और बतलाया अकी विदेशों में इस तरह की बातें आम है. जाह्न मर्द व्यस्त रहते हैं तो औरतें अपने जिस्म की प्यास इस तरीके से बुझाती हैं.
रवीना ने नम्रता को कहा ” क्या मैं भी अपने जिस्म की प्यास को इस तरीके से तुम्हारे साथ बुझा सकती हूँ?” नम्रता हैरान रह गई. रवीना ने बार बार उसे विनती की. नम्रता से रवीना के आंसू देखे नहीं गए. उसने रवीना को हाँ कह दिया. रवीना की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.
लेकिन नम्रता ये बात मुझे बता दी. रात भर हम दोनों आपस में बहस करते रहे कि ये गलत होगा या सही. सवेरा होते होते नम्रता ने मुझे मना लिया था.

मैं ऑफिस चला गया. दोपहर में नम्रता ने रवीना को ऊपर बुला लिया. दोनों ने उस मैगजीन को खोला और अपने अपने ऊपर के कपडे उतार दिए. स्नाजना ने अजब अपनी चोली उतारी रो नम्रता उसे देखती ही रह गई,. रवीना के स्तन बहुत भरे हुए और बड़े थे. ऐसा लगा अजैसे बरसों से किसी ने उन्हें ना छुआ हो. रवीना ने नम्रता की चोली भी खोल डी. अब दोनों के जिस्म पर सिर्फ पेटीकोट ही रह गया था. दोनों धीरे धीरे एक दूसरे के बहुत करीब आ गई. दोनों ने उस मैगजीन की तरह अपने अपने स्तन एक दूजे से छुआ दिए. दोनों के जिस्म में एक करंट दौड़ गया. रवीना काँप कर नम्रता से लिपट गई. दोनों की साँसें टकरा गई. नम्रता ने कांपती हुई रवीना के गाल से अपने गाल छु दिए. रवीना और सिहर गई. अब नम्रता ने रवीना के गालों को हलके से चूम लिया. रवीना तो जैसे नशे में चली गई और नम्रता की बाहों में ही झूल गई.

नम्रता ने अब अपनी छाती से रवीना की छाती को थोडा जोर से दबा दिया. दोनों को ही अब बहुत मजा आ रहा था. रवीना तो बादलों में उस रही थी. उसने कांपती आवाज में कहा ” आज करीब दस साल के बाद मेरे जिस्म को किसी ने चूमा है , छुआ है. मेरा जिस्म बहुत बहुत प्यासा है , भूखा है. तुम इसकी प्यास बुझा दो आज.” नम्रता ने अब रवीना को गालों के अलावा, गरदन के चारों तरफ और सीने के आस पास चूमना शुरू कर दिया. नम्रता को भी अब नशा सा आने लगा. आखिर दो कोमल बदन एक दूजे में घुल जो रहे थे. अचानक दोनों जोर से एक दूजे से लिपट गई और पलनग पर लेट गई. काफी देर तक इसी तरह दोनों आपस में लिपटी लेटी रही और एक दूजे को चूमती रही. गालों पर , गरदन पर औए एक दूजे के स्तनों को भी लगातार चूमने लगी.

नम्रता ने रवीना के स्तनों के निप्पल को बहुत जोर से चूसकर चूमा. रवीना के मुंह से एक मीठी चीख निकल गई. वे दोनों एक दूजे के साथ पलंग में दो घंटे तक चिपकी रही. लेकिन जब भी एक दूजे के होंठ सामने आ जाते नम्रता झिझक कर रवीना के गालों को चूम लेटी . रवीना चाह रही थी कि नम्रता उसके होठों को चूमे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
शाम को जब मैं घर लौटा तो नम्रता ने मुझे सारी बात विस्तार से बताई. मैं सारी बात सुनकर बहुत उतेजित हो गया. मेरा लिंग एकदम तनकर खड़ा हो गया. रात को मैंने और नम्रता ने खूब सेक्स किया. नम्रता मुझे आज हमेशा से कहीं ज्यादा उत्तेजित और गरम लगी. मैं बहुत खुश हुआ. वो बीच बीच में रवीना के साथ के पलों को बताती और हम दोनों और ज्यादा उत्तेजित हो जाते. हमारी सेक्स लाइफ ज्यादा गरम और रंगीन लगने लगी.

जहाँ अब मेरी सेक्स लाइफ जबरदस्त रंगीन हो चली थी वहीँ नम्रता के तो डबल मजे हो गए थे. दोपहर में रवीना और देर शाम और रात को मैं. नम्रता का जिस्म जबरदस्त गदराने लगा था. उसके स्तन अब और भी उभरने लगे थे. वो मुझे अब हर समय गरम लगती. हम तीनों की जिंदगी अब बेहद रंगीन हो चली थी.

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एक दिन मेरा ऑफिस में मन नहीं लग रहा था. मुझे अचानक नम्रता और रवीना को एक साथ देखने की इच्छा हुई. मैं तुरंत घर आ गया. मैंने चुपचाप मेरे बेडरूम की खिड़की से अंदर झाँका. मैंने देखा कि रवीना एकदम नंगी होकर पलंग पर लेती हुई थी औए नम्रता खुद भी नंगी थी और रवीना के जिस्म को जगह जगह चूम रही थी. रवीना लगातार आह आह की आवाजें निकाल रही थी और पूरे नशे में नम्रता को सहयोग कर रही थी. कुछ देर के बाद नम्रता रवीना की जगह लेट गई और अब रवीना नम्रता के जिस्म को जगह जगह चूमने लगी. सिर्फ्फ़ पांच मिनट में ही मेरी तो हालत खराब हो गई. मैं बेकाबू हो गया. उन दोनों का यह नशीला मिलन मुझसे देखे नहीं जा रहा था. तभी मैंने देखा को अब रवीना वापस पलंग पर लेट गई और उसने अपने दोनों पैर फैला दिए.

नम्रता उसके ऊपर लेट गई और उसने खुद के जननांग वाले हिस्से को रवीना की टांगों के बीच में फंसा दिया. अब नम्रता उसी तरह से जोर लगाने लगी जिस तरह मैं उसके ऊपर लेट कर लगता हूँ. मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. ये क्या हो रहा है!!! दोनों ही के मुंह से सिसकीयाँ औए आह आह , ओह ओह की आवाजें अब तेज होने लगी. उन दोनों पर जोर का नशा छाने लगा था. अब मैं भी पूरी तरह से बेकाबू हो चला था. मैं तुरंत दरवाजा खोलकर भीतर आ गया. दोनों इतन एज्यादा नशे में थी कि उन्हें मेरे अंदर आने का जरा भी पता नहीं चला. मैंने तुरंत अपने सारे कपडे उतार दिए और पलंग के पास जाकर उन्हें बहुत ही करीब से देखने लगा. नम्रता और रवीना सेक्स के चरम सीमा में पहुँच चुकी थी. दोनों के बदन पसीने से तरबतर हो चुके थे. दोनों के पूरे जिस्मों पर पसीना साफ़ साफ़ दिख रहा था.

मैंने गौर से देखा कि दोनों के गाल और होंठो के ऊपर वाली जगह भी पसीने की बूंदों से चमक रही थी. दोनों की साँसें बहुत तेज चल रही थी. तभी मैंने देखा कि रवीना ने नम्रता को अपने सीने से चिपटा लिया. अब दोनों एक दूजे से पूरी तरह से सट चुकी थी. अचानक रवीना ने अपने होंठ खोल दिए औए नम्रता की तरफ बढ़ा दिए.नम्रता लगातार अपने गुप्तांग से रवीना के जननांग को दबाने के लिए जोर जोर से दबाव पैदा कर रही थी और रवीना को दबाए हुए थी. रवीना के होंठ खुले तो मैंने देखा वो काँप रहे थे. थरथरा रहे थे. साफ साफ़ नजर आ रहा था कि वे बरसों से प्यासे थे और बरसों से उन्हें किसी ने भी नहीं चूमा और चूसा था. दोनों होठों में लबालब रस भरा हुआ था. अचानक नम्रता की नजर मुझ पर पड़ गई. मैंने उसे इशारा किया कि वो अपना काम जारी रखे. नम्रता मुस्कुराने लगी. मैंने उसे इशारा किया और पलंग पर दोनों के साथ लेट गया.

मैंने रवीना के थरथराते होठों को अपने हाथों से पकड़ा; उन्हें धीरे धीरे सहलाया और अपने होंठ से उन्हें जोर से चूम लिया. रवीना ने अपनी आँखें खोली. मुझे देखकर वो हैरान रह गई. नम्रता ने उसे शांत रहें को कहा. रवीना का चेहरा खिल उठा. ये चमक उसे एक मर्द के मिलने की ख़ुशी में थी. अब रवीना ने मेरे होठों के चुम्बन का जवाब बहुत गर्मजोशी से दिया. हम दोनों ने एक बहुत लंबा और गीला होठों का चुम्बन किया. रवीना की होठों की प्यास इस चुम्बन से मिट गई. लेकिन मेरी प्यास बढ़ गई. रवीना के जिस्म को मैं निहारने लगा. बहुत ही गदराया हुआ था. हर हिस्सा कसा हुआ और बरसों से अनछुआ और प्यासा. नम्रता ने मुझे कहा ” मैं अब थकने लगी हूँ. ” मैंने नम्रता के होठों को चूमा और बोला ” तुम थोडा आराम करो मैं रवीना की सारी प्यास आज बुझा देता हूँ.” नम्रता ने हाँ में मेरे होंठ फिर चूम लिए. बाद में नम्रता से रवीना से कहा ” आज तुम अपनी एक नयी सुहागरात मना लो.” रवीना ने नम्रता के होठों को बहुत ही जोर से चूमा और मुस्कुराने लगी.

नम्रता बगल में लेट गई और मैं रवीना के ऊपर चढ़ गया.मैंने रवीना की गर्मी , जोश और नशे का पूरा फायदा उठाया. रवीना भी जैसे इसी पल के लिए तैयार थी. बहुत जल्दी हम दोनों बहुत तदप तड़प कर सेक्स में खो गए. कुछ देर के चुम्बनों और रवीना के अंगों को जगह जगह दबाने के बाद मैंने अपनी लगातार कड़क और लम्बे होते हुए लिंग को रवीना के जननांग में धीरे से घुसा दिया. रवीना एक अनोखे आनद में पहुँच गई.अब मैं और रवीना इसी आनंद में खो गए थे. रवीना का गुगुदा जननांग मेरे लिंग के हमले से पूरी तरह से गीला ; चिपचिपा और ढीला हो गया था. रवीना का सारा बदन पसीने से इस तरह से भीग गया था जैसे कोई अभी अभी नहाकर आया हो. नम्रता रवीना की इस प्यास के बुझने से बहुत संतुष्ट और खुश थी. रवीना अब धीरे धीरे ठंडी पड़ने लगी. उसका बदन अब धेला पड़ गया था.

मैंने रवीना की तरफ देखा. रवीना ने आँखें खोली और मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देख कर बोली ” आज तुमने मेरी बरसों की प्यास बुझाई है. मैं जानती हूँ ये सम्बन्ध नाजायज है लेकिन मैं मजबूर थी.” नम्रता ने रवीना के गालों को चूमा और बोली ” किसी की इस तरह से मदद करना नाजायज नहीं होता. तुम कितना तड़प रही थी ये मैं अच्छी तरह जानती हूँ.” रवीना ने मेरे होठों को चूमा और फिर नम्रता के होठों को चूम लिया. हम तीनों कुछ देर तक युहीं लेते रहे. बाद में रवीना उठी , उसने अपने कपडे पहने और एक बात फिर मुझे और नम्रता को चूमकर नीचे जने लगी. नम्रता ने रवीना से कहा ” अब हर शाम को जब हम दोनों बिस्तर में होंगे तब आप जरुर आ जाया करना. हमें कोई आपत्ति नहीं होगी.” रवीना मुस्काई और नीचे उतर गई.

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अब हर शाम को जब मैं छः बजे अपने घर लौटा तो नम्रता और रवीना दोनों पलंग पर तैयार मिलती. हम तीनों कभी एक घन्टे तक तो कभी दो घंटों तक खूब सेक्स करते. ये सिलसिला करीब दो महीने तक बिना रुकावट के चला.
एक दिन रवीना जब सेक्स करने के बाद नीचे उतर रही थी तो उसके एक रिश्तेदार ने उसे देख लिया. उस रिश्तेदार को कुछ शक हो गया. उस रिश्तेदार ने रवीना के पति को यह बात बताई. एक दिन रवीना का पति जल्दी घर आ गया. लेकिन वो इतना जल्दी आ गया कि मैं उस समय ऑफिस से नहीं आया था. इसलिए हम तीनों उस दिन बच गए. लेकिन हम सभी के लिए एक इशारा काफी था. अब हम अगले एक सप्ताह तक तीनों एक साथ सेक्स नहीं कर सके. रवीना का पति रोज अब दिन में घर के चार पांच चक्कर लगाने लगा. रवीना फिर तड़पने लगी. उसने कई बार कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली. मैं और नम्रता कोई और तरीका सोचने लगे.

एक दिन रवीना से नहीं रहा गया. उसने दिमाग लगाकर एक तरीका निकाल ही लिया. रात को रवीना का पति पूरे दिन दुकान की थकान से ऐसा सोता कि सुबह ही वापस उठता. रवीना ने नम्रता से ये बात बताई. मैंने और नम्रता ने मना किया कि रात को ख़तरा नहीं उठाना चाहिए. लेकिन रवीना नहीं मानी. रवीना ने एक और खतरनाक खेल खेला. अब उसने ये निर्णय किया कि रात को वो अपने पति को सोने के वक्त पानी में एक नींद की सामान्य दवाई मिलाकर देने की सोची. एक दिन उसने ये कर भी दिया. वो सारी रात बीच में उठ उठकर अपने पति को देखती रही. उसने इस तरह से जब लगातार तीन चार दिन तक देख लिया कि उसका पति इस दवाई के कारण सीधा सुबह ही उठता है तो वो निश्चिंत हो गई

अगले ही दिन रात को जैसे ही उसका पति खर्राटे भरने लगा वो तुरन हमारे बेडरूम में आ गई. उसने आकर हम दोनों को ये सारी बात बता दी. मैं और नम्रता बहुत खुश हो गए. नम्रता ने मुझे कहा ” आज तुम रवीना की प्यास ही बुझाना. ये दस दिन की पतासी है.” मैंने दो गह्न्तों तक रवीना के जननांग को अपने लिंग से तरबतर किये रखा. बाद में नम्रता के साथ लेट गया. नम्रता के जननांग को भी मैंने गीला किया. सुबह करीब पांच बजे मैंने रवीना को उठाया और अपने कमरे में भेज दिया. अब हमारा रास्ता साफ़ था. अब तो हर रात रंगीन होने लगी थी. अब लगभग हर रात रवीना आ जाती. इस तरह से एक महीना बीत गया.

एक दिन रवीना के पति को अपने किसी रिश्तेदार की मौत के सिलसिले में पास के एक शहर जाना पड़ा. रवीना अकेली थी. उस दिन मैंने ऑफिस की छुट्टी ले ली. अब हम तीनों थे. सारे दिन हम तीनों ने जी भरकर सेक्स का मजा लिया. देर रात तक भी खूब खेल चला. रवीना उस दिन हर तरह से संतुष्ट हो गई.
आज रवीना और नम्रता के साथ मुझे इस तरह का आनंद लेते हुए करीब एक साल बीत चुका है. आज तक रवीना का पति इस सारे खेल से अनजान है. और अनजान ही रहेगा. रवीना बहुत खुश है. नम्रता भी बहुत खुश है. मैं भी बहुत बहुत खुश हूँ.

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