अतरंगी परिवार की सतरंगी चुदाई- 1

गतांग से आगे ..

मैं उसकी स्कर्ट को उसकी फैली टांगों से जरा ऊपर सरका कर उसकी जांघ पर चिकोटी काट कर बोली- तुम्हारे लिए आज का दिन बहुत अच्छा है … अगर यहाँ तुम्हारे भईया होते तब तो और भी ज्यादा मजा रहता, फिर भी मेरा भाई तुम्हें संतुष्ट करने में सक्षम है … .हमने इसे पूरी तरह ट्रेंड कर दिया है !
मैंने अपने भाई के अंडरवीयर की झिरी में से उसके लिंग को बाहर निकाल कर रेवती के हाथ में थमा कर कहा- इसे धीरे धीरे सहलाओ ! तब देखना यह कैसा कठोर और लंबा हो जाता है ! …भभकने लगेगा यह !
मैंने चाय का खाली कप बेड की पुश्त पर रखा और अपने हाथों से रेवती के टॉप की जिप खोलने लगी।
मेरे भाई ने भी चाय का खाली कप तिपाई पर रख कर मेरे ब्लाउज को मेरी बाजूओं से निकाल कर मेरी ब्रा के हुक खोल कर उसके जालीदार कप को स्तनों से नीचे सरका कर मेरे स्तनों को सहलाना और चूसना शुरु कर दिया था, मैं उत्तेजित होने लगी थी, उत्तेजना में मेरा शरीर बेड पर फैलने लगा था।

भाभी पहले मैं आपके स्तन को चूसूंगी … .रेवती ने मेरे भाई के लिंग को छोड़ कर मेरे स्तनों पर आते हुए कहा।
ठीक है … . मैंने उससे कहा और फिर अपने भाई से कहा- तुम रेवती के स्तनों को चूसो … मगर आहिस्ता आहिस्ता … और इसकी स्कर्ट भी निकाल दो !
… इतना कह कर मैं उसके लिंग को सहलाने लगी।

रेवती नें मेरे स्तनों को चूसना शुरू कर दिया, मेरे भाई ने रेवती के टॉप के नीचे की शमीज उसके गोरे गुदाज स्तनों से ऊपर कर उसके निप्पल चूसने शुरू कर दिये। हम तीनों ही की साँसें तीव्र हो उठी थी, बैडरूम का दृश्य उन्मुक्त यौवन के रस में डूबता जा रहा था।
रेवती द्बारा निरंतर होते स्तनपान ने मुझे उत्तेजित कर डाला था, अब मैं चरमोत्कर्ष की ओर बढ़ चली थी, मुझे मालूम था कि मेरा भाई लगातार दो बार स्खलित हो सकता है, इसलिए मैंने पहले रेवती को उसके द्बारा आनंद दिलवाना ठीक समझा और यही सोच कर अपने भाई से कहा- तुम रेवती की योनि में लिंग प्रवेश करो … .लेकिन पहले कुछ थूक या क्रीम लगा लेना … लो तेल ही लगा लो … मैंने बेड की पुश्त पर रखी तेल की कटोरी उसकी ओर बढ़ाई।

वह रेवती की स्कर्ट को खोल चुका था और उसके नितंबों को व चिकनी जाँघों को सहला रहा था। उसने अपने तपते लिंग के मोटे से मुंड पर तेल चुपड़ा फिर जरा सा तेल रेवती की अनछुई नर्म रोयों से सज्जित योनि पर लगाया और अपने लिंग को उसके टाइट मुख में फंसा कर उसकी जांघ को हाथ से ऊपर उठा कर जोर का धक्का मारा, लिंग मुंड रेवती की योनि में उतर गया।

रेवती जोरों से चीखी, उसका यह पहला अनुभव था, मैंने उसकी पीठ को सहलाया और उसके होंठ अपने होंठ से बंद कर दिये, उसकी गर्म साँसे मेरी गर्म साँसों से उलझने लगी थी, उसके हाथों को मैंने अपनी साड़ी के नीचे प्रवेश दे दिया था, वह उत्तेजना और दर्द के चक्रवात में फंसती जा रही थी, उसके हाथ मेरी चिकनी जाँघों को सहलाने मसलने लगे थे, मैं काफी उत्तेजित हो चुकी थी।
मेरे भाई ने रेवती की जाँघों को पकड़ कर एक और धक्का मारा तो रेवती तड़पते हुए कह उठी- तुम्हारे भाई तो मुझसे कोई दुश्मनी निकाल रहे हैं … … उफ … आह … कितना दर्द हो रहा है उफ … .इनसे कहो जो करे आराम से करें उफ … .

वह और कुछ कहती उससे पहले ही मैंने उसके मुँह में अपने एक स्तन का निप्पल दे दिया, वह उसे चूसने लगी, मेरे भाई ने थोड़ा पीछे होकर और जोर का धक्का मारा, इस बार उसका सात आठ इंच का लिंग जड़ तक रेवती की योनि में समां गया, रेवती की बड़ी तेज़ चीख निकली, मेरे भाई ने लिंग फ़ौरन बाहर खींचा तो रेवती ने ठंडी सांस ली और तड़पती हुई बोली- ..उफ … भाभी तुमने तो कुछ ज्यादा ही ट्रेंड कर दिया है इन्हें … .उफ कैसे स्पेशल शॉट खेलते हैं उफ … आप रुक क्यों गए महाशय … इसे आगे पीछे करते रहो … .अभी तो मजा आना शुरू हुआ है उफ ….रेवती ने मेरे भाई से इतना कहा और मेरे स्तन का निप्पल मुंह में ले लिया, वह निप्पल को किसी भूखे की भांति चूसने लगी।

मेरा भाई उसकी योनि में अपने लिंग से घर्षण करने लगा था और मैं अपने हाथों से रेवती के हाथों को पकड़ कर उनसे अपनी पेंटी का वह हिस्सा रगड़ने लगी थी जिसके नीचे मेरी योनि थी, मेरा भाई मुद्रा बदल बदल कर रेवती को आनंद दे रहा था, रेवती का शरीर उत्तेजना से काँपने लगा था, वह कराह भी रही थी और मेरे भाई का सहयोग भी कर रही थी।
अंततः थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ चरम पर पहुँच कर स्खलित हो गये, फिर मेरे भाई ने मेरी भी प्यास बुझाई।
रेवती ने मेरे स्तनों को जिस तरह चूस चूस कर मेरा उत्तेजना के मारे बुरा हाल कर दिया था वैसे ही मैंने भी उसके स्तनों को चूस चूस कर उसे कंपकंपा डाला था।
हम तीनों की काम-क्रीड़ा तब तक चलती रही जब तक हम थक न गये।

इस घटना ने रेवती को भी हम लोगों के प्रति बोल्ड कर दिया था।

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