चाची की बुर की खुशबू सुघ कर चुदाई किया

मेरी चाची एक गदराई हुई जवान औरत हैं उनका फिगर एकदम हॉट हैं एकदम टाईट गोल चुंचे और मसलवाली बड़ी गांड भी हैं उनकी। चाची को देखते हुए किसी का भी लंड खड़ा हो जाए ऐसा रंग हैं उसका, देखने वो किसी परी के जैसी लगती हैं। एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था सिर्फ मैं और मेरी चाची थे। वो दोपहर में सो गई थी तभी मैं क्रिकेट खेल के घर आया तो देखा की उनकी साड़ी ऊपर उठी हुई थी और उनका बुर पूरा पसीने से भीगा हुआ था। उस समय मुझे पता नहीं चला की चाची नींद में ही झड़ चुकी हैं।

मैं उन्हें नींद में समझ के उनके जांघ की तरफ जा के सूंघने लगा। क्या मस्त खुसबू आ रही थी उनके बुर से। दोस्तों आप यह कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |  मैंने उसकी साडी को थोडा ऊपर किया तभी उनकी आँख खुल गई तब भी उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा। और वो उठ के मेरी तरफ देख रही थी तो मैंने बहाना बना के कहा की चाची खाना दो न बहुत भूख लग रही हैं। पर मैंने देखा की वो मुझे एकदम नशीली आँखों से देख रही थी। मैंने कहा, क्या हुआ चाची ऐसे क्यूँ देख रही हो। तो उसने कहा की मेरा एक काम करेगा तू?

मैं: क्यों नहीं चाची!

चाची: किसी से कहेगा तो नहीं ना?

मैं: नहीं चाची क्या बात हैं।

चाची: वही जो तू अभी मेरे साथ करने लगा था उसे अछे से और खुल कर कर लेते हैं।

मैं पूरा शर्म के मारे लाल हो गया।

चाची: मेरी नजर तेरे ऊपर बड़े पहले से ही थी। तू जब भी नहाता तो मैं तेरा लंड बड़े ही प्यार से देखती हूँ।

मैं चाची के पास गया तो उन्होंने मुझे कमर से पकड़ लिया। मुझे भी अन्दर से बहुत मस्त लग रहा था क्यूंकि मेरी भी सालो की तमन्ना आज पूरी होने को थी। कितने दिनों से मैं चाची की गांड और बूब्स को देखना और टच करना चाहता था। और तभी चाची ने मेरा माथा पकड के अपने बुर की तरफ कर दिया।

ये भी पढ़े : पापा के दोस्त संग माँ का लाइव सेक्स

मुझे चाची के बुर से गीली खुसबू का अहसास हो रहा था। मैंने उनके बुर पर हाथ रखा तो जैसे मेरे लोडे में पूरा करंट लगा। अब वो उठी और मेरी पेंट को निचे कर के बोली, जो तू रोज मेरे नाम की मुठ मारता हैं तो आज जो करना चाहता हैं कर ले। मैंने भी देरी न करते हुए पसीने से लथपथ उनके कंधे को और कानो को चाटना चालू कर दिया। चाची भी एकदम मदहोशी में डूबी हुई थी, अब मैं निचे गया और उनके बुर को चाटना चालू कर दिया। वो पूरी मदहोशी से मोनिंग कर रही थी।। आह्ह्ह चाट आह्ह्ह मेरे राजा चाट चाट के साफ़ कर के अपनी चाची के भोसड़े को! आह आह तू ही है जो मेरी चुदाई का दर्द दूर करेगा मेरे राजा,, आह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह।

चाची ने अपनी जांघो के बिच में मेरी मुंडी को कस के दबा ली और मैं समझ गया की मेरे चाटने की वजह से वो झड़ने की कगार पर आ चुकी थी। दोस्तों आप यह कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |  तभी मुझे किसी के आने की आवाज सुनाई दी…। वो कोई और नहीं मेरे बड़े पापा थे। मैं जैसे तैसे अपनेआप को रोक के वहाँ से भाग खड़ा हुआ। और चाची को बड़ा गुस्सा आ गया।

चाची ने बुर में लंड लिया

फिर मैं शाम को बड़ी मम्मी के यहाँ गया तो देखा उनकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। मैंने कुछ बोला भी नहीं और वो मेरे पास आइ और एक झटके में मुझे किस करने लगी। मैंने भी जवान में खूब जोर से उसे किस करना चालू कर दिया।

फिर मैंने देर न करते अपने दोनों हाथो से उनकी साडी के अन्दर के बूब्स को पकड़ लिया। पहले मैंने बूब्स को थोडा मसला और फिर अपना एक हाथ उनके बुर में डाल दिया। क्या बताऊँ दोस्तों उनके बुर की खुसबू को मैं सूंघना चाहता था और इसलिए मैं खुद को रोक नहीं सका। मैंने अपना हाथ बुर से निकाल के अपने उंगलियों को चाटना और सूंघना चालू कर दिया।

चाची ने कहा, चाटना हैं तो पहले से बता देता।

यह कह के उन्होंने नंगे हो के सोफे के ऊपर अपनी जांघो को खोल दिया। मैं उनके पास गया और उनके बुर को चाटने लगा। बुर को चाट रहा था और लंड भी मेरे हाथ में था। मैं लंड हिलाते हुए अपनी चाची का बुर चाट रहा था। मैंने २० मिनट तक उनका बुर अपनी जबान से चोदा और इस बिच में वो २ बार झड़ भी गई। वो मुझे अपना बुर जोर जोर से चाटने के लिए कहती रहती थी बिच बिच में।

अब मैंने और भी जोर जोर से चाची का बुर चाटा। वो फिर से एक बार झड़ गई और मैं उसके बुर का सब पानी पी गया। अब मैंने अपना लंड चाची को चूसने के लिए दे दिया। बड़ी मम्मी सच में एक चुदस्सी औरत थी और उसने इतना हॉट ब्लोव्जोब दिया मुझे की मेरे लौड़े में जैसे आग सी लगा दी। वो अपनी जबान से सुपारे को हिलाती थी और लंड को एकदम तडपा के फिर अपने मुह में ले लेती थी। मैं ५ मिनट में ही उसके मुहं में झड़ गया। चाची ने सब वीर्य पी लिया।

ये भी पढ़े : देवर के साथ करवाचौथ की रात

फिर हम दोंनो ने एक दुसरे को गले लगा लिया। २ मिनट में उसके हाथ से फिर से मेरा लंड हिलना चालू हो गया। सिकुड़े हुए लोडे में फिर से खुसपुसाहट सी हो गई और उसकी सलवटें मिट के लंड फिर से कडक हो गया। अब मैंने चाची की बुर को खोला और अपना लंड उनके बुर पर रख दिया।

चाची: आह जल्दी से अन्दर कर दे अपने तोते को मेरी मैना बहुत ही प्यासी हैं। मैंने एक झटका दिया और मेरा लंड चाची के बुर में घुस गया। मैंने अपने मुह में उनके बूब्स भर लिये और मैं बूब्स को चूसते हुए ही उन्हें चोदने लगा। चाची को बड़ा अच्छा लग रहा था और वो भी अपनी गांड हिला हिला के चुदवा रही थी।

इस कहानी को WhatsApp और Facebook पर शेयर करें
  • ए के एम

    मेरे विचार से किसी भी चूत को चोदने से पहले उसे सूंघना चाहिये , उसे चाटना चाहिये और उसे भलि भाँति चूसना चहिये तब तक जब तक चूत 3-4 बार अल्प चर्मोत्कर्ष वाला रस न छोड़ दे। और मर्द को यह रस ज़रूर पीना चहिये।
    इस क्रिया में जीभ को योनिकली (क्लिट) से गुदा (गाँड) द्वार तक ऊपर-नीचे बार-बार चलाना चाहोये। जिन मित्रों को पसन्द न हो वे अपनी जिव्हा को चूत के द्वार से क्लिट तक चलायें
    और देखिये आपकी साथिन क्या जलवे पेश करती है अपनी चूत के आपके लण्ड के लिये।
    मेरे अनुभव के अनुसार इस रस को पीने से लण्ड मे कड़ापन बढ़ जाता है और लण्ड झड़ता भी देर से है !
    बाकी सबकी अपनी-अपनी समझ
    सप्रेम
    चूत का पिस्सू
    ए के एम