मादरचोद और बहनचोद की चुदक्कड़ फॅमिली

आज मैं आप सभी को एक सेक्सी कहानी सुनाने जा रहा हूँ. उम्मीद है आप सभी को ये कहानी जरुर पसंद आएगी. बात तब की है, जब सुकृति अपनी बड़ी बहन की बेटी की शादी के लिए शापिंग करने निकली थी। सुकृति, एक हाउसवाइफ, उम्र 42 साल, पति जो की एक बैंकर है, काफी पैसे कमाता है सुकृति के लिए जिसे वो खुशी से खर्च करती है शापिंग में।

उसका बेटा लंकेश, 23 साल, एक नंबर का मादरचोद। बस बहाने ढूँढ़ता रहता है अपनी माँ को नंगा करने का और उसे चोदने का ख्वाब देखता रहता है। लेकिन ये सिर्फ मादरचोद ही नहीं बहनचोद भी है, अपनी 17 साल की कमसिन बहन अष्मिता को तो चोद भी चुका है। लेकिन वो कहानी बाद में।

सुकृति एक हाउसवाइफ है और पति के पैसे सिर्फ शापिंग में ही नहीं, फिटनेस में भी खर्च करती है। एक जिम जहां सब इंपोर्टेड मशीनें है वहां वर्काउट करती है। इसीलिये 42 साल की उम्र में भी वो एक कामदेवी से कम नहीं। उसकी 34डी के स्तन उसकी छाती की शोभा ही नहीं बल्की अच्छे अच्छो के लण्ड का साइज भी बढ़ा देते हैं।

उसकी 28” की पतली कमर, और गहरी नाभि उसके जिश्म का चौथा छेद है जहां आप उंगली कर सकते हैं। और गाण्ड… गाण्ड के क्या कहने, 36” की साइज की मोटी और गोल गाण्ड जिस कुर्सी पर रखती होगी, कुर्सी भी खुश हो जाए। और सुकृति अपनी कामुकतका प्रदर्शन करने में कभी पीछे भी नहीं रहती। तो अब सुकृति की बड़ी बहन की बेटी की शादी का वक़्त था इसीलिए सुकृति को शादी के लिए शापिंग करनी थी।

इसीलिए डिनर के वक़्त सुकृति- “मंगेश (सुकृति का पति) दीक्षा की शादी तय हो गई है और शादी अगले हफ्ते ही है हमें शापिंग कर लेनी चाहिए।

मंगेश- तुम ठीक कह रही हो, एक काम करो मेरा क्रेडिट कार्ड ले लो और कल लंकेश के साथ जाकर शापिंग कर लो।

सुकृति- ठीक है। लंकेश चलोगे ना?

लंकेश- क्यों नहीं माँ, बिल्कुल।

अगले दिन, दोपहर 12:00 बजे-

सुकृति- लंकेश चलो, हमें देर हो जाएगी। मैं कपड़े बदलने जा रही हूँ, तुम भी कपड़े बदल लो।

कपड़े बदलने का नाम सुनते ही लंकेश अपने पलंग से उठकर चुपके से अपनी माँ के कमरे में जने लगा। सुकृति ब्लाउज़ और पेटिकोट में थी। धीरे-धीरे उसने अपना ब्लाउज़ और ब्रा उतार दी। उसके गोरे-गोरे मोटे-मोटे नारियल देखते ही लंकेश का लण्ड खड़ा हो गया।

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तभी सुकृति ने अपनी पेटीकोट और पैंटी भी उतार दी, और नंगी होकर कबार्ड की तरफ बढ़ी। ये सब लंकेश के लिए सहन करना मुश्किल था, और वो मूठ मारने लगा और अपना क्रीम गिरा दिया। फिर अपने कमरे में कपड़े बदलने चला गया। लंकेश कपड़े बदलकर लिविंग रूम में बैठा था।

लंकेश- माँ, मैं तैयार हूँ, आप चलो जल्दी।

सुकृति- हाँ बेटा, आ रही हूँ। दरवाजे पे तुमने जो सफेद पानी गिराया है उसे साफ तो कर दूं। यह कहानी आप न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

ये सुनते ही लंकेश के पशीने छूट गये।

सुकृति लिविंग रूम आ गई। क्या कयामत लग रही थी वो। गोरे बदन पे काली साड़ी और काला ब्लाउज़, और साड़ी भी झलकाऊ। ब्लाउज़ इतना लो-कट की उसकी क्लीवेज किसी अंधे को भी दिख जाए। वही हाल पीठ का भी। साड़ी सुकृति ने इतनी नीचे पहनी थी की अगर एक इंच भी वो नीचे हो जाए तो उसकी चूत के बाल बाहर आ जाएं।

ऐसा नजारा देखकर लंकेश का लण्ड फिर से खड़ा हो गया। आँखें फटी की फटी और मुँह खुला रह गया।

सुकृति- कैसी लग रही हू?

लंकेश- अच्छी।

सुकृति- अच्छी या बहुत अच्छी?

लंकेश- बहुत अच्छी माँ।

सुकृति- बहुत अच्छी या माल?

लंकेश- ये क्या कह रही हो माँ? मैं तुम्हारा बेटा हूँ।

सुकृति- अच्छा? इस बेटे को अपनी नंगी माँ को देखकर मूठ मारने में तो शर्म नहीं आई क्यों?

लंकेश- सारी माँ… आई अम रियली सारी।

सुकृति- “अरे सारी क्यो? तू मेरा बेटा है, तू मुझे नंगा नहीं देखेगा तो कौन देखेगा, हुम्म्म?” और ये कहकर सुकृति ने अपने बेटे के होंठों पर अपने लाल-लाल होंठ रख दिये और वो एक दूसरे को चूमने लगे। लंकेश का हाथ अपनी माँ के एक स्तन को दबाने लगा तभी सुकृति ने उससे रोक दिया।

लंकेश- प्लीज… माँ, प्लीज… करने दो ना।
सुकृति- “आज नहीं, आज शापिंग के लिए जाना है। माँ का दूध पीने के लिए सारी रात है, वैसे भी तुम्हारे डैडी आज घर नहीं आने वाले और तुम्हारी बहन तो होस्टेल में ही पढ़ाई के लिये रुकने वाली है, रात भर मजे कर लेना। ठीक है?”

लंकेश खुश हो गया और उसे फिर से चूमने लगा और फिर वो शापिंग के लिए निकल पड़े। एक घंटे बाद माल में, दोपहर 1:30 बजे।

सुकृति- आज तो माल में बिल्कुल ही भीड़ नहीं, क्या बात है?

लंकेश- शायद आफ-सीजन की वजह से।

सुकृति- चलो पहले तुम्हारे कपड़े खरीदें।

माँ बेटे एक मेनस-वेयर शोप्पी में लंकेश के लिए कपड़े देखने लगे और वहां के हसन सुकृति के जिश्म को अपनी आँखों से ही चोदने लगे। सुकृति ये सब नोटिस कर रही थी और उसने भी मजे लेने का इरादा बना लिया।

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सुकृति- भैया जरा पैंट तो निकालना।

शापकीपर- क्या?

सुकृति- वो जो ब्लू पैंट है ना लटकी हुई, जरा निकालना वो।

स्क- ओह्ह… आइ अम सारी, अभी निकालता हूँ।

सुकृति- “अरे आप तो नर्वस हो गये, मैंने आपको आपकी पैंट निकालने के लिए तो नहीं कहा?”

कुछ ऐसी ही मस्ती मजाक करके वो अगली शाप में चले गये। करीब 40 मिनट में लंकेश ने अपने कपड़े खरीद लिए। अब सुकृति शापिंग के लिए साड़ियों की दुकान में जाने लगी।

सुकृति- बेटा, तुम वहां बोर हो जाओगे, क्यों ना तुम एक फिल्म देख आओ, या कुछ खाने चले जाओ?

लंकेश- ठीक है माँ। आपकी शोपिग होने के बाद मुझे काल कर देना। ओके?

सुकृति- “ओके…” कहकर सुकृति एक साड़ी की दुकान में चली गई। वहां पे 5 हसन और 7-8 फीमेल ग्राहक थे। सुकृति को अटेंड करने एक शापकीपर आगे आया।

हसन- हेलो मेम, मेरा नाम हसन है, आपकी क्या मदद कर सकता हू?

सुकृति- जी मुझे शादी के लिए कुछ साड़ियां खरीदनी है, क्या आप मुझे दिखाएंगे?

हसन- “क्यों नहीं, आइए मेम…” और हसन ने सुकृति को 10 से 15 साड़ियां दिखाई। यह कहानी आप न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

उसमें से सुकृति ने 3 आलग करके रखी, और कहा- क्या मैं इन्हें ट्राई कर सकती हू?

– ऐसा मेम, देयर इज दि ट्रायल रूम।

सुकृति ट्रायल रूम चली गई।

हसन अपने दूसरे शोपकीपर दोस्त की तरफ बढ़ा और बोला- अबे क्या माल है यार?

मनोज- हाँ यार, क्या लग रही है उस साड़ी में?

हसन- अबे उसने साड़ी इतने नीचे पहनी है कि उसकी चूत के बाल दिखाई पड़ रहे हैं।

मनोज- चूत के बाल? अबे पीछे से उसकी गाण्ड की दरार नजर आ रही है। मैंने तो मोबाइल में फोटो भी ले लिया है।

हसन- मादरचोद।

मनोज- क्या बोलता है? चोद देते हैं इसे।

हसन- मान जाएगी?

मनोज- क्यों नहीं मानेगी, ऐसे कपड़े सिर्फ रंडिया ही पहनती हैं।

हसन- ठीक है। चल आज इसका गमे कर देते हैं।

सुकृति ने अपने लिए 3 साड़ियां पसंद कर ली, और बिल बनाने हसन के साथ निकल पड़ी।

हसन- मेम हमारी शाप में एक नया ब्रा-पैंटी का सेक्षन भी खुला है, आप इन साड़ियों के लिए मैचिंग ब्रा और पैंटीस खरीदना पसंद करेंगी?

सुकृति को थोड़ा शक हुआ लेकिन आज तो वो भी मूड में थी, कहा- ठीक है चलिए।

हसन सुकृति को एक कमरे में ले गया जहां पे बहुत सारे ब्रा पैंटी के सेक्सन्स थे।

सुकृति- ग्रीन साड़ी के लिए मैचिंग ब्रा दिखाईए।

हसन- ये लीजिए मेम।

सुकृति- ट्राई कहा करूं?

मनोज- सारी मेम, यहां पे ट्रायल रूम नहीं है।

सुकृति- ओह्ह… तो फिर मुझे पता कैसे चलेगा कि ये सही साइज है या नहीं?

हसन- कोई बात नहीं मेम, आप यही ट्राई कर लीजिए।

सुकृति- तुम दोनों के सामने?

मनोज- अरे मेम परेशान ना होइए, ये तो हमारा रोज का काम है।

सुकृति- ठीक है।

ये कहकर सुकृति ने अपनी साड़ी का पल्लू गिराया। उसके लो-कट ब्लाउज़ से उसने आधे स्तन को हसन और मनोज की नजरों में चमका दिया। उनके मुँह में पानी आ गया। सुकृति ने हसन की आँखों में आँख डालकर अपनी ब्लाउज़ का एक हुक खोला। फिर मनोज की आँख में आँख डालकर दूसरा हुक खोला। फिर हसन फिर मनोज और फिर एक मादक अंगड़ाई देकर उसने अपना ब्लाउज़ उतारकर हसन को पकड़ने के लिए दिया।

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फिर वो ब्रा उतारने के लिए पीछे का हुक खोलने लगी। हसन और मनोज के टाइट लण्ड उनके पैंट में तंबू बना चुके थे और सुकृति वो देखकर मन ही मन मुश्कुरा रही थी। सुकृति हुक खोल दो। ब्रा की दायां लेस नीचे धकेल दी, फिर लेफ्ट लेस, और अपनी ब्रा की दोनों कप हाथ में पकड़कर नीचे कर दी।

हसन और मनोज तिलमिला रहे थे।

लेकिन सुकृति कहां रुकने वाली थी। वो आगे बढ़ी और हसन से कहा,- मेरी साड़ी उतारने में मदद करोगे?

हसन- क्यों नहीं?

सुकृति- ये लो मेरा पल्लू और खिचो।

हसन सुकृति की साड़ी खींच रहा था और सुकृति गोल-गोल घूमते हुए साड़ी उतार रही थी। सुकृति का चीरहरण उसकी मर्ज़ी से हो रहा था और आज इस द्रौपदी को नंगा होने से कोई रोकने वाला नहीं था। सुकृति की साड़ी उतरते ही उसने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया, तो उसका पेटीकोट एक झटके में नीचे उतर गया। उसकी गोरी-गोरी मांसल जांघें दोनों मर्दों के लण्ड को उत्तेजित करने लगी। सुकृति पीछे पलटकर पैंटी उतारने लगी। सुकृति ने पैंटी उतारते वक़्त अपनी गाण्ड का नजारा दोनों को दिखाया।

और फिर हसन और मनोज की तरफ बढ़ी और बोली- तो अब, ब्रा पैंटी ट्राई करे या?
उसके आगे बोलने से पहले ही हसन ने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। मनोज पीछे से उसकी गाण्ड को चाटने लगा और चूत में उंगली करने लगा। सुकृति पहले से ही गीली हो चुकी थी। हसन उसकी चूचियां को जोर-जोर से दबाने लगा और फिर उन्हें चूसने लगा।

सुकृति- “आह्ह… चूस्स मेरे राजा चूस ले…”

मनोज- साली रांड़, आज तो तुझे मसल के रख देंगे।

हसन और मनोज ने अपना टाइट लण्ड बाहर निकाला, और सुकृति अपने घुटनों पर बैठे हुए उनको एक-एक करके चूसने लगी। करीब 5 मिनट तक चूसने के बाद दोनों के लण्ड झड़ गये और सुकृति उन दोनों का पानी पी गई। हसन ने सुकृति को टेबल पर लिटा दिया और उसकी चूत चाटने लगा। सुकृति कामुकता से चहकने लगी। हसन की जीभ जब भी उसकी चूत के दाने से टकराती सुकृति के मुँह से तड़पती हुई आवाज आने लगती। यह कहानी आप न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मनोज ने उन आवाजों को अपने लण्ड से बंद कर दिया। सुकृति मनोज का सोया हुआ लण्ड जगाने के लिए उसे जोर-जोर से चूसने लगी। नीचे हसन उसकी चूत को चाट-चाट कर नरम करने लगा। करीब 10 मिनट तक मनोज का लण्ड चूसने के बाद, मनोज का लण्ड खड़ा हो गया।

सुकृति- चलो, अब अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दो। प्लीज अब सबर नहीं होता। चोद दे मुझे हमंगेशी, चोद मुझे।

मनोज- “हमंगेशी किसे बोल रही है रंडी? रुक साली छिनाल तेरी चूत का भोसड़ा ही बना देता हूँ…” कहकर मनोज ने सुकृति की एक टांग अपने कंधे पर रखी, और अपना लण्ड एक ही झटके में पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसेड़ दिया।

सुकृति के मुँह से एक जोरदार चीख निकली- “हे भगवान्न… मादरचोद, निकाल भड़वे अपना लण्ड मेरी चूत से… लौड़े के बाल दर्द हो रहा है, निकाल अपना काला लण्ड कुत्ते।

हसन- “चुप कर साली कुतिया छिनाल कहीं की… ये ले…” हसन ने अपना लण्ड सुकृति के मुँह में डालकर उसकी आवाज बंद कर दी।

थोड़ी देर बाद सुकृति का डर कम हुआ और अब वो चुदाई का मजा लेने लगी- “आह्ह… आह्ह… आह्ह… आह्ह… हअँ हअँ हअँ फक में, फक में, फक में, ऊओह्ह… ऊओह्ह… और जोर से और जोर से फास्टर फास्टर ऊओ… आश… उउंम्म्म…”

मनोज ने अपनी स्पीड बधाई और उससे जोर-जोर से चोदने लग।

सुकृति- “और जोर से भड़वे और जोर से आह्ह… आइ अम कमिंग… मैं झड़ने वाली हूँ आअह्ह…” और सुकृति की चूत से पानी निकलने लगा। ऐसा लग रहा था कि मूत रही है। सुकृति झड़ने की वजह से मछली की तरह तड़पने लगी।

हसन- “ला अब मैं चोदता हूँ इसे…” हसन अब मनोज की जगह आ गया और उसकी चूत में अपना मोटा लण्ड घुसेड़ दिया।

सुकृति सिसकियां भरने लगी- “कम ओन हसन, फक में, फक में, फक में लीके होर… मुझे रंडी बना दो और जोर से हसन और जोर से…”

हसन- उम्म्म… उफ्फ़…, ये ले रंडी ये ले।

सुकृति- साले भड़वे जोर से चोद ना मादरचोद… कभी अपनी माँ को चोदा नहीं क्या और जोर से चोद फाड़ दे मेरी चूत।

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हसन ने अपनी स्पीड एकदम तेज कर दी और सुकृति एक बार फिर झड़ गई।

सुकृति- हसन तुम जमीन पर सो जाओ।

हसन- क्यों?

सुकृति- रंडी की औलाद जितना बोला है उतना कर।

हसन नीचे फिर्श पर सो गया। उसका टाइट लण्ड चाट की तरफ खड़ा था। तभी सुकृति हसन के लण्ड पर बैठ गई और ऊपर-नीचे करने लगी। हसन को बड़ा मजा आने लगा, सुकृति नीचे झुक कर उसे किस करने लगी। हसन अपनी गाण्ड उठाकर उसकी चूत पेलने लगा तभी सुकृति को कुछ महसूस हुआ। उसे एहसास हो गया कि मनोज उसकी गाण्ड मारना चाहता है।

लेकिन पुजा के कुछ कहने से पहले ही मनोज ने एक जोरदार झटका लगाया और अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड में डाल दिया।

सुकृति फिर से चिल्लाने लगी- “मादरचोद, लौड़े जा अपनी माँ की गाण्ड मार, मेरी क्यों मार रहा है? हीईए भगवान्न्, साले भड़वे…”

सुकृति की आँखों से आँसू आने लगे लेकिन मनोज ने उसपर कोई रहम नहीं किया और गाण्ड मारने लगा, सुकृति एक ही पोजीशन में चूत भी चुदवा रही थी और गाण्ड भी मरवा रही थी। कालेज के दिनों के बाद ये पहला वक़्त था जब सुकृति दो लौड़ों से एक ही वक़्त चुद रही थी, लेकिन इस बार हसन चूत में उसकी चुदाई कर रहा था और मनोज उसकी गाण्ड मारकर उसका बलात्कार कर रहा था।

सुकृति दर्द से तड़प रही थी। रोते-रोते चुदाई का मजा वो आज पहली बार ले रही थी। थोड़ी देर बाद मनोज हसन की जगह चला गया और सुकृति को अपने काले लण्ड पे बिठा दिया और हसन उसकी गाण्ड मारने लगा। करीब 25 मिनट तक वो दोनों चूत और गाण्ड बदलकर करके सुकृति को चोद रहे थे।

25 मिनट तक गाण्ड मरवाकर सुकृति की गाण्ड ढीली हो चुकी थी और वो भी मजे लेने लगी और उनका साथ देने लगी- “और जोर से और जोर से मुझे ऐसे चोदो जैसे अपनी माँ को चोदते हो आआह्ह, ऊओह्ह… ऊह्ह आअह्ह…”

10 मिनट बाद मनोज सुकृति की चूत में झड़ गया और हसन सुकृति की गाण्ड में। तीनों 10 मिनट तक नंगे एक दूसरे के ऊपर ही लेते रहे।

हसन- वाहह… मजा आ गया।

मनोज- क्या औरत है तू… साली तुझे तो रंडी होना चाहिए।

सुकृति- हाहाहा… चलो अब कपड़े पहन लो और चलो।

अब तीनों कपड़े पहेनने लगे।

सुकृति- हसन, तुम्हारी शाप में क्या सभी औरतों को ऐसे ही सर्विस मिलती है?

हसन- सबको नहीं, सिर्फ खास कस्टमर्स को।

सुकृति- “और तुम?” मनोज की तरफ उंगली करते हुए- नाम क्या है तेरा?

मनोज- “रऽराऽमनोज…”

सुकृति- “मनोज। ह्म अपनी माँ को क्या ऐसे ही चोदता है क्या? कभी किसी को चोदा भी या नहीं? जाकर किसी भैंस को चोदा कर हमंगेशी भड़वे…”

मनोज- सारी मेम, तुम हो ही ऐसी माल कि कंट्रोल नहीं हुआ अगली बार ऐसा नहीं होगा। यह कहानी आप न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

सुकृति- अगली बार?

हसन- अगली बार साड़ी खरीदने आएंगी ना आप, हमें खिदमत का दूसरा मौका मिलेगा।

सुकृति- मादरचोदो मन नहीं भरा? और इन मचिंग ब्रा पैंटीस का बिल?

मनोज और हसन- फ्री।

सुकृति- ह्म्म… थैंक योउ, चलो चलते हैं।

करीब दो घंटे की चुदाई के बाद सुकृति अपनी साड़ियां लेकर शाप के बाहर आ गई और लंकेश को काल करके पार्किंग में बुलाया।
करीब दो घंटे की चुदाई के बाद सुकृति अपनी साड़ियां लेकर शाप के बाहर आ गई और लंकेश को काल करके पार्किंग में बुलाया।

लंकेश- माँ, तुम्हारे बालों को क्या हुआ?

सुकृति- क्या हुआ?

लंकेश- सब बिखरे हुए हैं, ऐसा लग रहा है कि तुम्हारा किसी ने बलात्कार कर दिया।

सुकृति- बालात्कार नहीं हुआ।

लंकेश- तो फिर?

सुकृति- बस थोड़ा मजा।

लंकेश- किससे चुदकर आई हो?

सुकृति- बस दो हसन थे।

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ये सुनते ही लंकेश अपनी माँ पर पार्किंग लाट में ही टूट पड़ा। लंकेश ने एक मिनट के अंदर सुकृति की साड़ी पेटीकोट और ब्लाउज़ उतार दिया, और ोूछा- “माँ, तुम्हारी ब्रा पैंटी कहां है?

सुकृति- वहीं छोड़ दी है।

और तभी लंकेश ने अपनी माँ के चूत में अपना लण्ड डाल दिया और उससे खड़े-खड़े ही चोदने लगा।

सुकृति- “लंकेश बेटा, घर चलके चोदो ना प्लीज, प्लीज…”

लंकेश- नहीं माँ अब सहन नहीं होता, प्लीज… चोदने दो।

सुकृति- “आअह्ह… अह्ह… चोद बेटा चोद… तू तो सच में बड़ा हो गया रे चोद दे अपनी माँ को…”

लंकेश- “आह्ह माँ तुम बहुत गरम हो। माँ तुम्हारी चूत भी गरम है, मैं ज्यादा देर तक कंट्रोक नहीं कर पाऊँगा।

सुकृति- “तू बस चोदता रह बेटा लंबी चुदाई तो घर जाकर करेंगे आह्ह… ऐसे ही… ऐसे ही बेटा ऐसे ही चोद… वाह… मेरा बेटा अब बड़ा हो गया है चोद बेटा चोद आअह्ह…”

लंकेश- माँ मैं झड़ने वाला हूँ… माँ, मैं झड़ने वाला हूँ।

सुकृति- “अंदर ही झड़ बेटा, डाल दे अपना पानी मेरी चूत में आअह्ह…”

लंकेश- “आह्ह… माँ आआह्ह…”

सुकृति- वाउ… मेरे बेटे के लण्ड में तो बहुत दम है और पानी भी बहुत है। बेटा, दैट वाज रियली गुड…”

लंकेश के लण्ड का पानी अपनी माँ के चूत से निकलकर उसकी जांघों पर बहने लगा। सुकृति ने उसे अपने हाथ में लिया और उस हाथ पर लगे पानी को चाटने लगी- “उउंम्म… तेरा पानी तो टेस्टी भी है। चल घर चल आज इस कुंवें का सारा पानी पी जाऊँगी…”
और दोनों घर चले गये, लंकेश ने उस रात अपनी माँ को घर के हर कमरे में, हर कोने में, हर पोजीशन में चोदा। लिविग रूम, बेडरूम, किचेन, बाल्कनी, खाना बनाते वक़्त, खाना खाते वक़्त, चलते हुए, बैठते हुए, यहां तक की मूतते वक़्त भी लंकेश अपनी माँ को चोदता रहा। और इस तरह, वो रात लंकेश की सबसे यादगार और मजेदार रात रही, और सुकृति कालेज के दिनों के बाद पहली बार इतना चुदी थी।

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  • anup

    koi baat nuhi chut me saali ki dum he .tubhi tu itne lode bhi use pude kum hai .chut se bhosdi bunwai apne bete se .ab wo chudwati firti he bahur ke lodo se . muja ab wo kya nuhi payegi ghur me bete se bahur bhai -bandhuo se chudwayegi. –anup