माँ की चुदाई देखकर पापा से चुदवाने का प्लान बनाई

दोस्तो मेरा नाम युक्ती है और मैं मेरे घर मैं सबके साथ चुदाई कर चुकी हो मुझे मेरे घर मैं और ससुराल मैं भी सबसे चुदाई हूआ. मैं पूरी 21 साल की हो चुकी और मैं औरत मर्द के रिश्ते को समझती थी. एक बार पापा को मम्मी को चोदते देखा तू इतना मज़ा आया की रोज़ देखने लगी. मैं पापा की चुदाई देख इतना मस्त हुई थी की अपने पापा को फंसाने का जाल बुनने लगी और आख़िर एक दिन कामयाबी मिल ही गयी. पापा को मैने फँसा ही लिया.

अब जब भी मौक़ा मिलता, पापा की गोद मैं बैठ उनसे चूचियाँ दबवा दबवा मज़ा लेती. पर अभी तक केवल चूचियों को ही दबवा पाई थी, पूरा मज़ा नही लिया था. मेरे मामा की शादी थी इसलिए मम्मी अपने मयक़े जा रही थी. रात मैं पापा ने मुझे अपनी गोद मैं खड़े लंड पे बिठाकर कहा था बेटी कल तेरी मम्मी चली जाएगी फिर तुझे कल पूरा मज़ा देकर जवान होने का मतलब बताएँगे. मैं पापा की बात सुन ख़ुश हो गयी थी. पापा अब अपने बेडरूम की कोई ना कोई विंडो खुली रखते थे जिससे मैं पापा को मम्मी को चोदते देख सकूँ. ऐसा मैने ही कहा था.

फिर उस रात पापा ने मम्मी को एक कुर्सी पैर बिठाकर उनकी चूत को चाटकार दो बार झाड़ा और फिर 3 बार हचाक कर चोदा फिर दोनो सो गाये. अगले दिन मम्मी को जाना थाआज मम्मी ज्जा रही थी पापा ने मेरे कमरे मैं आ मेरी चूचियों को पकड़कर दो टीन बार मेरे हूत चूमे और लंड से चूत दबा कहा की तुम्हारी मम्मी को स्टेशन चोदकर आता हूँ फिर आज रात तुमको पूरा मज़ा देंगे. मैं बड़ी ख़ुश थी.

पापा चले गाये तू मैं घर मैं अकेली रह गयी. मैं अपनी चड्डी उतर पापा की वापसी का इंतेज़र कर रही थी. मैं सोचा की जब तक पापा नही आते अपनी चूत को पापा के लंड के लिए उंगली से फैला लून.

तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया. मैने चूत मैं उंगली पेलते हुए पूचा, “कौन है” मैं हू दिवाकर. दिवाकर का नठसुन मैं गुड़गूदी से भर गयी. दिवाकर मेरा 23 इयर का पड़ोसी था. वा मुझे बड़े दीनो से फासना छह रहा था पर मैं उसे लाइन नही दे रही थी. वा रोज़ मुझे गंदे गंदे इशारे करता था और पास आ कभी कभी चूचि दबा देता और कभी गांड पैर हाथ फैर कहता की रानी बस एक बार चखा दो.

आज अपनी चूत मैं उंगली पेल मैं बेताब हो गयी थी. आज उसके आने पर इतनी मस्ती चाई की बिना चड्डी पहने ही दरवाज़ा खोल दिया. मुझे उसके इशारो से पता चल चक्का थठकी वा मुझे चोदना चाहता है. आज मैं उससे छुड़वाने को तैइय्यर थी. आज सुबह ही पापा ने मम्मी को चेर पर बिठाकर चूत चटकार चोदा था. मम्मी के भाई की शादी थी इसलिए वा एक सप्ताह के लिए गयी थी.

पापा ने कहा था की आज पूरा मज़ा देंगे. इसके पहले पापा ने कई बार मेरी गाड्राई चूचियों को दबाकर मज़ा दिया था. मैं घर मैं अकेली चड्डी उतरकर अपनी चूत मैं उंगली पैल्कर मज़ा ले रही थी जिस से जब पापा का मोटा लंड चूत मैं जाए तू र्द ना हो. दिवाकर के आने पर सोचा की जब तक पापा नही आते तब तक क्यों ना इसी से एक बार चुदवकर मज़ा लिया. यही सोचकर दरवाज़ा खोल दिया.

मैने जैसे ही दरवाज़ा खोला दिवाकर फ़ौरन अंदर आया और मुझे देखकर ख़ुश हो मेरी चूचियों को पकड़कर बोला, “हाए रानी बड़ा अच्चा मौक़ा है.”
मैं उसकी हरकत पर सँसना गयी. उसने मेरी चूचियों को छ्चोदकर पलटकर दरवाज़ा बंद किया और मुझे अपनी गोद मैं उठा लिया और मेरी दोनो चूचियों को मसलते हुवे मेरे हूँतो को चूसने लगा और बोला, “हाए रानी तुम्हारी चूचियों तू बहुत टाइट हैं. हाए बहुत तड्पया है तुमने रानी आज ज़रूर चोदुंगा.”

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हाए भगवान जाने दो पापा आ जाएँगे.
“डरो नही मेरी जान बहुत जल्दी से चोद लूंगा. मेरा टा है दर्द नही होगा.” वा मेरी गांड सहला बोला, “हाए चड्डी नही पहनी है, यह तू बहुत अच्चा है.”

मैं तू अपने पापा से छुड़वाने के जुगाड़ मैं ही नंगी बैठी थी पर यह तू एक सुनहरा मौक़ा मिल गया था. मैं पापा से छुड़वाने के लिए पहले से ही गरम थी. जब दिवाकर मेरी चूचियों और गालो को मसलने लगा तू मैं पापा से पहले दिवाकर से मज़ा लेने को बेठार हो गयी. उसकी छेद चाद मैं मज़ा आ रहा था. मेरी चूत पापा का लंड खाने से पहले दिवाकर का लंड खाने को बेताब हो गयी.

मैं अपनी कमर लचकाती बोली, “हाए दिवाकर जो करना हो जल्दी से कर लो कहीं पापा ना आ जाए.”
मैं पागल होती बोली तू दिवाकर मेरा इशारा पा मुझे बेड पैर लिटा अपनी पंत उतरने लगा. नंगा हो बोला, “रानी बड़ा मज़ा आएगा. तुम एकदम तैयर माल हो. देखो मेरा लंड छ्होटा है ना.”

उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रखा तू मैं उसके 4 इंच के खड़े लंड को पकड़ मस्त हो गयी. इसका तू मेरे पापा से आधा था. मैं उसका लंड सहलती बोली, “हाए राम जो करना है जल्दी से कर लो.” दिवाकर के लंड पकड़ते ही मेरा बदन टापने लगा.

पहले मैं दार्र रही थी पर लंड पकड़ मचल उठी. मेरे कहने पर वा मेरी टॅंगो के बीच आया और मेरी कसी कुँवारी चूत पर अपना छ्होटा लंड रख धक्का मारा. सूपड़ा कुच्छ से अंदर गया. फिर 3-4 धक्के मारकर पूरा ल अंदर पेल दिया. कुच्छ देर बाद उसने धीरे धीरे चोदते हुवे पूच्हा, “मेरी जान दर्द तू नही हो रहा है. मज़ा आ रहा है ना” “हाए मारो धक्के मज़ा आ रहा है.” मेरी बात सुन वा तेज़ी से धक्के मरने लगा. मैं उससे छुड़वते हुवे मस्त हो रही थी.

उसकी चुदाई मुझे जन्नत की शैर करा रही थी. मैं नीचे से गांड उचकाती सीसियते हुवे बोली, “हाए दिवाकर ज़ोर ज़ोर से चोदो तुम्हारा लंड बहुत छ्होटा है. ज़रा ताक़त से चोदो राजा.” मेरी सुन दिवाकर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. उसका छ्होटा लंड सक्साकक मेरी चूत मैं आ जा रहा था. मैं पहली बार छुड़ रही थी इसलिए दिवाकर के छ्होटे लंड से भी बहुत मज़ा आ रहा था. वा इसी तरह चोदते हुवे मुझे जन्नत का मज़ा देने लगा.

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10 मिनट बाद वा मेरी चूचियों पर लुढ़क गया और कुत्ते की तरह हाफ़ने लगा. उसके लंड से गरम, गरम पानी मेरी चूत मैं गिरने लगा. मैं पहली बार चूड़ी थी और पहली बार चूत मेनलॅंड की मलाई गिरी थी इसलिए मज़े से भर मैं उससे चिपक गयी. मेरी चूत भी तपकने लगी. कुछ देर हमलोग अलग हुए.

वों कपड़े पहन चला गया. मेरी चूत चिपचिपा गयी थी. दिवाकर मुझे चोदकर चला गया पैर उसकी इस हिम्मत भारी हरकत से मैं मस्त थी. उसने चोदकर बता दिया की छुड़वाने मैं बहुत मज़ा है. दिवाकर ठीक से चोद नही पाया था, बस ऊपर से चूत को रग़ाद कर चला गया था पैर मैं जान गयी थी की चुदाई मैं अनोखा मज़ा है. उसके जाने पर मैने चड्डी पहन ली थी. मैं सोच रही थी की जब दिवाकर के छ्होटे लंड से इतना मज़ा आया है तू जब पापा अपना मोटा तगड़ा लंड पेलेंगे तू कितना मज़ा आएगा. दोस्तों आप ये कहानी न्यू हिंदी सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

दिवाकर के जाने के 6-7 मिनट बाद ही पापा स्टेशन से वापस आ गाये. वा अंदर आते ही मेरी कड़ी कड़ी चूचियों को फ्रॉक के ऊपर से पकड़ते हुवे बोले, “आओ बेटी अब हम तुमको जवान होने का मतलब बताएँगे.”

“ओह पापा आप ने तू कहा था की रात को बताएँगे.” “अरे अब तू मम्मी चली गयी हैं अब हर समय रात ही है. मम्मी के कमरे मैं ही आओ. क्रीम लेती आना.” पापा मेरी चूचियों को मसलते हुवे बोले.

मैं दिवाकर से छुड़वर जान ही चुकी थी. मैं जान गयी की क्रीम का क्या होगा पैर अनजान बन बोली, “पापा क्रीम क्यों” “अरे लेकर आओ तू बताएँगे.” पापा मेरी चूचियों को इतनी कसकर मसल रहे थे जैसे उखाड़ ही लेंगे. मैं क्रीम और टवल ले मम्मी के बेडरूम मैं फुँछी. मैं बहुत ख़ुश थी. जानती थी की क्रीम क्यों मंगाई है. दिवाकर से छुड़ने के बाद क्रीम का मतलब समझ गयी थी.

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